गंभीर अड्डा

लिंडा गुडमैन बनते बनते रह गए

अगस्त 25, 2022 कमल पंत

उन दिनों मैं  हिंदी उपन्यास पढ़ने वाले उन लौंडों की श्रेणी में आ गया था जो जासूसी के हिंदी उपन्यास पढ़कर सस्ते शरलॉक होम्स बनने की कोशिशों में रहते थे, दूरदर्शन पर आने वाले “जासूस विजय” ने हिंदी पट्टी को व्योमकेश बख्सी के बाद एक् नया नाम दिया था।

हालांकि इस बीच कुछ और नये नाम भी चले होंगे लेकिन हमारी एज ग्रुप में जासूस विजय ही प्रसिद्धि पा रहा था। तो धीरे धीरे वह जासूसी उपन्यास की क्वालिटी गिरने में थी, शुद्ध जासूसी के बाद अश्लील जासूसी का दौर भी उन उपन्यासों में हमारे पढ़ने में आया जिसमे हार्मोन्स एक्टिव करने की पूरी खुराख शामिल रहती थी।

अब उपन्यास पढना खतरे से खाली नही था क्योंकि घर मे गलती से भी किसी के हाथ वह लग जाएं तो सीधे धारा “लड़का बिगड़ गया है” के अंतर्गत संस्कृति की सजा सुनाई जा सकती थी। इसलिए हमने खुद को दूसरे उपन्यासों में ढूंढने की कोशिशें शुरु कर दी।

इसी बीच किसी ने “फाइव प्वाइंट समवन” पकड़ा दी, जिसके किरदार में हम खुद को ढूंढने लगे थे।  जाने चेतन भगत की लिखाई में दम था या हम हिंदी प्रिय लोगों को वह समझ आ रहा था जो भी कारण रहा हो, हम हिंदी से अंग्रेजी के रीडर बन गए।

अब जो लड़का सौरी को भी क्षमा कीजिये कहता हो उसके इंग्लिश प्रेम को हर कोई समझ सकता है।  इसलिए हमारे हाथों में आये चेतन भगत को आस पास के लोगों द्वारा पढ़ने का ढोंग करार दे दिया गया।
एक् तरह से यह अच्छा भी था, क्योंकि शो आफ बन्द करना नही था और चेतन भगत भी अंग्रेजी का वह सस्ता (जासूसी) उपन्यासकार टाइप(हालांकि बेस्ट सेलर बन गया) ही तो था जो हार्मोन्स एक्टीव करने का मटीरियल दे रहा था।  ऊपर से धीरे धीरे अंग्रेजी में इमेजिन करने की पावर भी डेवलेप हो रही थी।
चेतन के बाद हालांकि एक् बार भटक कर ओथेलो पकड़ ली थी मगर जल्द ही औकात पता चलने पर वापस चेतन भगत के मित्रों की खोज बीन शुरू कर दी, “लव हेपन्स टवाईस” “आई टू हेड ए लव स्टोरी” “थ्री मिस्टेक्स आफ माई लाइफ” ऐसे लगभग डेढ़ से दो दर्जन उपन्यास उस समय पढ़ डाले और खुद को अंग्रेजों का प्रेमचंद समझने लगे गए थे।

अब तो चाय की दुकान में भी “ब्रिंग सम फ्रेश टी” बोला जाने लगा था, एक् तरह से हिंदी बेल्ट से प्रमोट होकर अंग्रेजी के तलवों तक पहुँच ही गए थे।
फिर कुछ पढ़े लिखे लोग मिल गए, उन लोगों ने अंग्रेजी के ऐसे ऐसे उपन्यास पकड़ा दिए कि अंग्रेजी उपन्यासों से भरोसा उठ गया, अब आप कैसे पूरी डिक्शनरी पकड़ कर एक् उपन्यास पढोगे, पढ़ तो लोगे इमेजिन कैसे करोगे, मैं और मेरी इमेजिशन के बीच आ रहे इन ख्यातिप्राप्त अंग्रेजी उपन्यासकारों को मैंने तभी सिरे से खारिज कर दिया।

फिर धीरे धीरे आम जिंदगी में अंग्रेजी जबरन घुसने लगी, कभी फार्म भरने के बहाने तो कभी किसी टेस्ट के बहाने, उसका यूं लाइफ में जबरन आना पसन्द नही आ रहा था मगर क्या करें, मजबूरी थी।

उसी दौरान एक् किताब हाथ लगी लिंडा गुडमैन की लव साईंन, जवानी उफान मार रही थी, किसकी जोड़ी किसके साथ हिट होगी जैसे खुफिया राज इसी किताब में दर्ज थे, ऊपर से चेतन भगत के कारण अंग्रेजी पढ़ना हमें आता था ऐसा माहौल खुद के मन मे हमने बनाया हुआ था।

किताब को कहीं से जुगाड़ कर घर ले आये। “किताब जो है पूरी की पूरी अंग्रेजों का पंचांग है” ऐसा एक् पढ़े लिखे पण्डि जी ने बताया था, तो बस शुरू कर दिया किताब का पारायण, मगर यह क्या, न कमबख्त, मिथुन,न मेष,न कन्या, न कर्क, सब अलग ही चल रहा था, हम खुद को पहचानें तो कहां पहचानें, लव ज्योतिष बनने का अच्छा उपाय हाथ लगा था और कोशिश करते तो शायद दिन के हजार की कमाई भी हो जाती, मगर कमबख्त बिजनेस में तो हाथ टाइट रहा है हमेशा।

किताब कुछ पल्ले ही न पड़ रही थी फिर हमने रमेश, सुरेश विमल पुष्पा गीता वगेरह के रिश्ते जोड़ दिए थे।
कोशिशें जारी थी और किताब की समय सीमा 7 दिन।

एंड आफ द डे हमने अपने पापा के कहने पर भारतीय दर्शन पर भरोसा जताया और हिंदी पंचांग को समझने में यह 7 दिन लगा दिए, अलबत्ता लिंडा गुडमैन की किताब को भी हमने हिन्दुस्तानी पंचांग के साथ मिलकर पूरा पढा। सनद रहे सिर्फ पढा, इमेजिनेशन जीरो रही, इसलिए समझ कुछ नही आया।और हम एक् सफल प्रेम के ज्योतिष बनते बनते रह गए।

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