यंगिस्तान

कचौड़ी वाला रिस्क

अप्रैल 22, 2024 कमल पंत

अक्सर हमारे बीच हमारे आस पास ऐसे लोग चल रहे होते हैं जिन पर नजर तो रोज पड़ती है मगर उनकी खासियत हम नजरअंदाज कर जाते हैं। दो पहियों की साइकिल में एक पूरी दूकान लेकर चलने वाले कचौड़ी विक्रेता भी उन्हीं में एक हैं। गर्मागर्म कचौड़ी को बहुत ही सस्ते दाम में हमारे लिए उपलब्ध करवाने वाले यह कचौड़ी विक्रेता खुद कितना बड़ा रिस्क लेकर हमारे पास आते हैं इस बात पर शायद ही हमने कभी गौर किया हो।

इनकी दो पहियों की दूकान में गर्मागर्म सब्जी से लेकर ठंडा ठंडा पानी तक सब उपलब्ध रहता है। आपको पैक करके घर ले जानी हो तो उसकी सुविधा भी ये कचोडी वाले आपको देते हैं।

वैसे तो दिल्ली में कचौड़ियों का इतिहास बहुत पुराना है दिल्ली में 100 से 70 साल पुरानी कचोड़ियों की दुकानें भी मौजूद हैं। मगर एक पूरी दूकान के सामान को अपनी छोटी सी साइकिल में बांधकर चलना इन्हें अन्य दूकान वालों के मुकाबले यूनिक बनाता है। इनका काम बहुत दुष्कर है। इस तरह कचौड़ियां बेचकर अपनी जिंदगी के 20 साल गुजार चुके 65 वर्षीय रामफल यादव बताते हैं कि साइकिल में कचोडी बेचने की शुरूवात किसने की यह उन्हें नहीं पता ।
मगर उन्होंने पुरानी दिल्ली के पास एक साइकिल वाले को 1995 में इस तरह मूंगफली बेचते देखा था और तब उन्हें साइकिल में कचोडी बेचने का आईडिया आया। दिल्ली में कचौड़ियों की बहुत मांग है। बस इसी को भुनाने के लिए उन्होंने साइकिल में इसे बेचना शुरू किया। उन्होंने शुरुवात कश्मीरी गेट बस अड्डे से की।

उन्होंने बताया कि मूंगफली के लिए दिल्ली में पहले से काफी लोग मौजूद थे, तब बस स्टेशन कश्मीरी गेट हुआ करता था। वहां उन्होंने कई बार कचौड़ियों पर लोगों को टूटते देखा तो यहीं से शुरुवात कर दी।

एक दो पहिया साइकिल में 10 लीटर की बड़ी स्टील की बाल्टी में गर्मागर्म सब्जी, 10 किलो कचौड़ियां, ब्रेड पकोड़ा, सादी पकोड़ी, 20 लीटर पानी, मसाले, चटनी, दो से तीन किलो प्याज, पैक करने के लिए फॉयल पेपर, अखबार, कूड़े के लिए डस्टबीन, सब्जी गर्म रखने के लिए छोटी सी अंगीठी , कोयला और छोटा मोटा अन्य सामन लटका रहता है।

एक अन्य विक्रेता बताते हैं कि जब गर्म सब्जी घर से लेकर चलते हैं तो सबसे बड़ा डर इस बात का रहता है कि सब्जी ना छलक जाए। इतने सामान के साथ साइकिल में बेलेंस बनाना बहुत मुश्किल होता है ऊपर से दिल्ली का ट्रैफिक और गलियों में बनी गड्ढे वाली सड़क इन साइकिल सवारों को एक स्टंटमैन बना देती हैं जो रोजाना रिस्क लेकर घर से निकलते हैं।

अक्सर कश्मीरी गेट बस अड्डे के आस पास फ्लाईओवर में आपने इन्हें शाम के समय अपना सामान बेचते देखा होगा। जहाँ पुलिस और एन डी एम सी से छिप छिपा कर यह ग्राहकों को स्वादिष्ट कचौड़ियां उपलब्ध कराते हैं। वैसे पूरी दिल्ली में इस तरह के विक्रेता आपको नजर आएंगे मगर कभी उनकी खासियत पर ध्यान नहीं गया होगा। अब कभी गौर से देखियेगा इन स्टंटमैन को जो जिंदगी की गाड़ी खींचने के लिए रोज शाम को स्टंट करते हैं।

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