बांगड़ूनामा

जय जय कोचिंग

अगस्त 6, 2022 कमल पंत

वह एक महान आईआईटियन थे, आईआईटी कहाँ से की थी यह किसी को भी नहीं पता था लेकिन आईआईटी करने के बाद शहर के बच्चों को आईआईटी में पास कराने वाला एकमात्र कोचिंग इंस्टिट्यूट खोलकर बैठे थे।

जगह जगह पोस्टर पर अपने नाम के नीचे एक्स आईआईटीयन लगा रखा था और पढ़ाने और बोलने का गजब का हुनर पाया था, ऐसा उनसे मिलने वाले लोग कहा करते थे।
शहर में वह पहली बार आये थे, ऐसा शहर वाले भी कहते थे और उनके पोस्टर में भी लिखा रहता था, शहर में पहली बार आईआईटी कोचिंग सेंटर।

पहले साल में कुल 100 एडमिशन हो पाए थे और अगले ही साल पोस्टर के नीचे आधा दर्जन बच्चों की फ़ोटो थी जिन्होंने आईआईटी क्रैक कर लिया था।

यह एचीवमेंट थी, इसलिए इसे हर केबल टीवी में दिखाया गया था, बकायदा 200 अलग अलग बच्चों के इंटरव्यू और आये थे जिन्होंने उनके कोचिंग इंस्टिट्यूट में शिक्षा ग्रहण करके एआईईईई में अच्छा स्थान प्राप्त किया था। अब आप कहेंगे एडमिशन 100 और इंटरव्यू 200 यह कैसे सम्भव है।

यह मार्केटिंग है, आप नहीं समझेंगे, जिस शहर में पोस्टर लगाए वहां उस शहर के बच्चों को ढूंढकर उन्हें पोस्टर में चिपकाना, मजाक बात थोड़ी होती है।
खैर इसी प्रकार से कार्य करते करते वह 150 सालों से आईआईटीयन पैदा कर रहे हैं, ऐसा उनके ब्रोचर में लिखा रहता है, अब उन्हें मार्केटिंग की जरूरत नहीं बिल्कुल भी। अब मां बाप कोटा फैक्ट्री देखकर इतने अवेयर हो गए हैं कि बच्चों को कोटा न सही मगर अपने शहर के कोचिंग इंस्टिट्यूट में नौवीं क्लास में ही भर्ती करवा देते हैं। स्कूल एडमिशन भी अब कोचिंग इंस्टिट्यूट के दिशा निर्देश पर होता है। वह जहां कहें वहाँ बच्चा भर्ती।।

बकायदा हॉस्टल खोलकर बैठे हैं, जिसमें बच्चों को भेड़ बकरी बनाकर रखा जाता है, सरकारी हॉस्टल होता तो अब तक आंदोलन हो गए होते और लोकल पत्रकार हॉस्टल की दुर्दशा पर डेढ़ किलोमीटर का लेख लिख चुके होते। लेकिन चूंकि कोचिंग इंस्टिट्यूट का निजी हॉस्टल है इसलिए कोई कुछ नहीं कहता।

अब कुछ ऐसा इत्तेफाक हुआ कि आईआईटीयन महोदय का खुद का भांजा 12 वीं क्लास में मामा के पास आ गया आईआईटीयन बनने। पहले तो मामा टालते रहे कि बेटा, तुम लेट हो, जिद मत करो, वगेरह वगेरह। पर बहन ने जब इमोशनल अत्याचार किया तो भांजे को कोचिंग इंस्टीयूट में रखना पड़ा।
एक्साम हुए और लड़का आईआईटीयन नहीं बना, हर साल की तरह इस साल भी कोचिंग इंस्टिट्यूट के आधा दर्जन आईआईटी में निकले बच्चों के पोस्टर छपे, ऊपर लिखा था गुरु जी का नाम और नीचे एक्स आईआईटीयन।

यह देखकर बहन एकदम गुस्से में भाई के पास आई बोली, शर्म कर तेरा खुद का भांजा निकला नहीं और तू प्रचार में लिख रहा है, आईआईटीयन मेकर।
अपने भांजे को आईआईटी भेज, वरना तेरा मेरा रिश्ता खत्म। भाई कुछ न कह पाया, दोबारा उसे इंस्टिट्यूट में रखा, दोबारा उसने आईआईटी फेल किया और फिर से बहन घर आ गयी।
अब आई तो एकदम बवाल था, बहन ने भाई से जो न कहा वह शब्द ही नहीं। बहनों की डायरी में मौजूद हर इमोशनल शब्द का इस्तेमाल किया, महिलाओं की डिक्शनरी में मौजूद हर ताने का इस्तेमाल किया।
इतना भयंकर टॉर्चर किया कि भाई डिप्रेशन में जाकर वापस आया और बोला बहन मैंने आईआईटी कब की। बहन बोली “तूने कब आईआईटी की? तू तो इंद्रा इंजीनियरिंग एंड टेक्निकल कॉलेज से पढ़ा है, गुजरात वाले, तेरी तो एआईईईई में भी इतनी भयंकर रैंक थी कि पापा को तेरे लिया पूरे नार्थ इंडिया में कोई कॉलेज नहीं मिला, गुजरात जाकर एडमिशन करवाया”।
भाई बोला “बस बहन इतना सोच कि जिसका खुद का आईआईटी नहीं निकला वह दूसरों का क्या निकालेगा”।
बहन एकदम शॉक्ड।
भाई ने आगे कंटिन्यू किया “बहन, गुजरात के एक महान कोचिंग इंस्टिट्यूट ने मुझे ज्ञान दिया कि इंस्टिट्यूट खोलो, कोचिंग इंस्टिट्यूट, बच्चों के मां बाप का पागल बनाओ और बच्चों को अपने इधर ले आओ, पांचवीं के मास्टर से भी पढवाओगे तब भी उन्हें घण्टा समझ नहीं आना कि पढ़ाया क्या जा रहा है। हर बैच में एक लड़का ऐसा होगा जो एक्स्ट्रा ऑर्डनरी होगा, उस पर फोकस करो, उसे मोटिवेट करो, उसकी हर सम्भव मदद करो, बाकी बच्चों से बस पेपर सॉल्व करवाओ । वह एक बच्चा खुद से निकालेगा आईआईटी और नाम होगा तुम्हारा। ऐसे ही मार्केटिंग करते रहो। इंस्टिट्यूट चलता रहेगा।
बस बहन तब से यही कर रहा हूँ, मेरी नौकरी कहीं लगी नहीं, इंस्टिट्यूट खोल लिया। अब इंस्टिट्यूट में हर साल 5 6 बच्चे ऐसे निकल आते हैं जो अपनी मेहनत से आईआईटी पास कर लेते हैं, बाकी तो बस मां बाप के पैसे खर्चने आते हैं और मैं उन्हें खर्चने का मौका देता हूँ। 70 80 की भीड़ में उन्हें घण्टा समझ नहीं आता कि क्या पढ़ाया जा रहा है, लेकिन इतनी भीड़ में दोबारा पूछें तो किसस पूछें, आपस में ही पूछ पाछ कर मेहनत करते हैं बिचारे, मैं बस पिछले सालों के पेपर सॉल्व करवाकर एक माहौल बना देता हूँ और यही माहौल बनाना कोचिंग लगता है उन्हें। मुझे किसी ने नहीं पूछा मेरी आईआईटी के बारे में। सबको लगता है मैं पास करवाता हूँ मगर मैं और मेरा दिल जानता है कि मैं तो अपनी 4 बैक आजतक क्लियर नहीं कर पाया,इन्हें क्या पास करवाऊंगा। बहन तभी भांजे के लिए मना कर रहा था।”
बस इस तरह आईआईटीयन कोचिंग इंस्टिट्यूट वाले सर थोड़ा बेहतर महसूस करने लगे, बहन के जाने के बाद उन्होंने नया पोस्टर बनाया, अब इंस्टिट्यूट में यूपीएससी की कोचिंग भी करवाई जाएगी। रिटन टेस्ट के बाद, क्वालीफाई हुए सेलेक्टेड बच्चों का ही एडमिशन होगा।
#जयजयकोचिंग

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *