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खड़िया खनन पर डीडब्लू की रिपोर्ट, कुमाऊँ की पहाड़ियों में भी दरारें

सितंबर 1, 2023 कमल पंत

डीडब्ल्यू हिंदी की एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में खनन माफिया जल्द ही उत्तराखंड की पहाड़ियों को तबाह कर देगा, इस फीचर रिपोर्ट को आप डीडब्लू के हिन्दी यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं।  खड़िया खनन पर एक बेहद उम्दा रिपोर्ट बनाई है।

रिपोर्ट काफी अच्छी और डीटेल में है, खनन सम्बन्धी कानूनों पर भी बात करती है। बागेश्वर के कांडा में खनन के कारण हो रहे नुकसान को हाईलाइट करती है। जोशीमठ की तरह वहां भी मकानों में दरार है। एक कांडपाल जी के घर के इर्द गिर्द सिर्फ कुछ किलोमीटर के दायरे में 5 से ज्यादा खदानें हैं। अत्याधुनिक मशीनें, बुलडोजर, बड़े बड़े ट्रक 24 घण्टे कार्यरत हैं।


खड़िया को सरल भाषा में यूं समझे कि आप जिस क्रीम पाउडर का इस्तेमाल करते हैं उन सबमें खड़िया इस्तेमाल होता है, इसलिए डिमांड जबरदस्त है और सप्लाई के पहाड़ को नंगा करने पर तुले हुए हैं।
कपकोट के भाजपा विधायक साहब की खुद की खदानें थी एक दो साल पहले तक, बागेश्वर में आंदोलन हुए तो फिलहाल यह दावा कर रहे हैं कि उनकी खदानें नहीं हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि खनन का 60% क्षेत्र के विकास में खर्च करने का प्रावधान है। मगर बदकिस्मती से किसी को यह जरूरी नहीं लगता कि इस पैसे का हिसाब मांगा जाए। मौजूदा धामी सरकार के राज में खनन माफिया और ज्यादा फल फूल रहे हैं।
बागेश्वर में नदी सूख रही है, जलस्रोत सूख रहे है, सीढ़ीदार खेत तबाह हो चुके हैं। एक गांव के लोग तो सरकार से नाराज होकर देवताओं की शरण में जा चुके हैं। एक देवी मां के सुपुर्द कर दिया है सब कुछ कि हमसे कुछ न होता मां अब तू सम्भाल। सरकार ने तो हमारी सुननी नहीं है।
खैर इन खदानों के कारण बड़े हिस्से के जोशीमठ से हाल हो रहे हैं धीरे धीरे, पानी सूख रहा है। खेती हो रही है।

रिपोर्ट के अनुसार कांडा क्षेत्र में कई मकान इसके कारण दरारें झेल रहे हैं और उन्हें नुकसान भी हुआ है। ग्राम वासी शिकायत करके देख चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अलबत्ता इस क्षेत्र में जिलाधिकारियों के तबादले जरूर जल्दी कर दिए जाते रहे हैं।

(नीचे वाली खदानें मेरे गाँव से नीचे रीठा रैतोली नामक गाँव के आस पास हैं, यहां भी बागेश्वर जैसा ही हाल है)

 

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