बांगड़ूनामा

 
  • रमाकांत का पहाड़ी सफर

    रमाकांत बूबू का सन्यास

    एक रमाकांत बूबू ठैरे, मतलब समझ लो कि एमडीएच वाले बूबू जितने बुड्ढे होंगे। अति दारू प्रेमी एकदम खुशवंत सिंह अंकल टाइप। एकदम मजेदार शख्सियत हुई, पियो और...
    जून 18, 2021 कमल पंत
  • शौक

    नताशा काफी दिनों से परेशान थी, नौकरी अब छूटे की तब छूटे। नौकरी में कोई अच्छे हालात नजर नहीं आ रहे थे, अधिकतर स्टाफ अपने लिए दूसरी नौकरी ढूंढने में लग...
    जून 9, 2020 कमल पंत
  • भीखूदास6

    अपने प्राण बचाने वाले को देखकर महिला इतनी उत्साहित थी कि उसका उत्साह देखते ही बनता था,भीखूजी इन सबसे अनभिज्ञ उसके साथ उसके घर की तरफ चले जा रहे थे, उस...
    मई 26, 2020 कमल पंत
  • मजदूर सड़कों पर

    जिन इंसानो ने हमारे सपनो के आशियाँ बनाये हम वाहन दौड़ा सकें वो सड़कें बनायीं नदी पार करने को पुल फ्लाईओवर बनाये चलती सड़क पर ख़राब वाहनों को ठीक किया तपली...
    मई 24, 2020 ओये बांगड़ू
  • भीखूदास 5

    गुरु चेला को 3 दिन थाने में बन्द रहकर दो बातों का ज्ञान हुआ,पहला जंगल से कोई भी चीज नहीं लेनी,जंगलात वाले बुरा मान जाते हैं, दूसरा थाना एक अच्छी जगह ह...
    मई 19, 2020 कमल पंत
  • भीखूदास4

    भीखूजी और उनका चेला वन विभाग की चौकी में अड्डा जमाकर बैठ गए थे,आराम था,चौकी की वजह से चार दीवारें और छत मिल गयी थी, पास में खाने का सामान टटोला तो रोट...
    मई 18, 2020 कमल पंत
  • भीखूदास 3

    भीखूजी ने अपनी आगे की यात्रा के लिए दिन भर का राशन जुगाड़ लिया था, और खुशी की बात ये थी कि धार्मिक पहाड़ी गांवों वालों ने भीखूजी को कोई सिद्ध पुरूष समझक...
    मई 17, 2020 कमल पंत
  • लड़कपन के सपने

    पंछी की तरह आसमान पर उन्मुक्त उड़ते हुए दूर बहुत दूर उड़ जाने का सपना हवा में पंख रोक लेना फिर फड़फड़ाना और मुड़ जाना दूर दूर आंखों से ओझल होने तक नीले आसम...
    मई 16, 2020 ओये बांगड़ू
  • भीखूदास-2

    भीखूजी और उस 12 साल के लड़के के सफर से शुरू होती है भीखू की असल पहाड़ यात्रा,लड़के और भीखूजी दोनों को बर्तन मांजने में एक्सपर्टीज थी,लेकिन अब पहाड़ के दुक...
    मई 15, 2020 कमल पंत
  • भीखूदास 1

    भीखूजी नामसे दुनिया में अपने कारनामों का डंका बजाने वाले,शुद्ध भिखारी की असली शुरुवात कहाँ से हुई कोई नहीं जानता, क्योंकि किसीने कभी जानने की कोशिश ही...
    मई 9, 2020 कमल पंत
  • ऑडिटर साब

    जैसे ही वो आदमी पास आ रहा था लग रहा था. जैसे वो इंसान नहीं आत्मघाती हमलवार हो. उसके हाथ में पानी का ग्लास किसी बम से कम नहीं लग रहा था. जैसे ही वो पास...
    अप्रैल 28, 2020 Girish Lohni
  • ईरिक्शा और ऑटो का प्यार

    दादा पोते को कहानी सुना रहा था, ऑटो और इरिक्शा के प्यार की। अशोक नगर के चौराहे पर दोनो एक दूसरे से चिपक लर खड़े रहते थे,पीले रंग का ऑटो और लाल रंग की ई...
    जून 7, 2019 कमल पंत
  • इस मामले में मैं इतना तटस्थ हूँ – मनास

    हरियाणा के छोटे से गाँव में रह कर खेती करने वाले मनास अक्सर अपने गाँव वालों और आस पास वालों को किताबों की दुनियां से रूबरू कराते रहते है. मनास के लिखे...
    फरवरी 22, 2019 ओये बांगड़ू
  • हमेशा की तरह अकेला

    स्कूटी से दौड़ते भागते कई बार सिग्नल और जाम के ठहराव में नजरें चार हो जाती हैं और मौक़ा जब वेलेंटाइन के आस पास का हो तो नजरें बार बार बाकी की दो नजरें त...
    फरवरी 15, 2019 ओये बांगड़ू
  • कुबाट

    कुमाउनी में लिखी गयी इस कहानी के लेखक हैं मशहूर कुमाउनी व्यंगकार विनोद पन्त, कहानी का हिंदी ट्रांसलेशन कहानी के आखिर में है व्यंगकार विनोद पन्त जूनियर...
    फरवरी 14, 2019 ओये बांगड़ू
  • इन ढलानों पर वसंत आएगा – मंगलेश डबराल

      इन ढलानों पर वसंत आएगा हमारी स्मृति में ठंड से मरी हुई इच्छाओं को फिर से जीवित करता धीमे-धीमे धुँधुवाता खाली कोटरों में घाटी की घास फैलती र...
    फरवरी 10, 2019 ओये बांगड़ू
  • लार्ड मैकाले तेरा मुँह काला हो – कमल जीत चौधरी

      बच्चे ! मैं उस दौर का बच्चा था जो माँ से पूछते थे पिता की छुट्टी कब खत्म होगी बच्चे ! तुम उस दौर के बच्चे हो जो माँ से पूछते हैं पापा किस द...
    जनवरी 21, 2019 ओये बांगड़ू
  • इतने भले नहीं बन जाना: वीरेन डंगवाल

    इतने भले नहीं बन जाना साथी जितने भले हुआ करते हैं सरकस के हाथी गदहा बनने में लगा दी अपनी सारी कुव्वत सारी प्रतिभा किसी से कुछ लिया नहीं न किसी को कुछ ...
    जनवरी 19, 2019 ओये बांगड़ू
  • गाँव के रास्ते

    गांव के कच्चे रास्तों पर जवान जानवर भाग रहे हैं. जिनके पीछे बूढ़े भागते हैं. बूढ़ों के पसीने और जानवरों के दूध से बना घी खाकर दूर शहरों में जवानों के बच...
    जनवरी 16, 2019 Girish Lohni
  • कैफ़ी आज़मी, जिनका लिखा बार बार याद आया

    उर्दू के एक अजीम शायर कैफ़ी आज़मी एक ऐसा नाम रहा जिनका लिखा हर अंदाज़ में लोगों को पसंद आया.फिर वह चाहे शेरो शायरी हो,नज्में या बॉलीवुड में यादगार बन जान...
    जनवरी 15, 2019 ओये बांगड़ू
  • किताबें: सफ़दर हाशमी

    किताबें करती हैं बातें बीते जमानों की दुनिया की, इंसानों की आज की कल की एक-एक पल की। खुशियों की, गमों की फूलों की, बमों की जीत की, हार की प्यार की, मा...
    जनवरी 11, 2019 ओये बांगड़ू
  • पढ़ना-लिखना सीखो

    किसी जमाने में साक्षरता अभियान चला था तब हमारे प्यारे दूरदर्शन पर इस गाने को बड़े सुर में गाया जाता था.सफदर हाशमी की लिखी ये कविता नुक्कड़ नाटकों और आंद...
    जनवरी 4, 2019 ओये बांगड़ू
  • पहचान- अमृता प्रीतम

    तुम मिले तो कई जन्म मेरी नब्ज़ में धड़के तो मेरी साँसों ने तुम्हारी साँसों का घूँट पिया तब मस्तक में कई काल पलट गए–   एक गुफा हुआ क...
    जनवरी 3, 2019 ओये बांगड़ू
  • इस उत्तरायणी सुनिए सुर में काले कव्वा

    बचपन से छतों में चीख चीख कर कव्वों को बुलाया होगा आपने , काले कव्वा काले घुघते की माला खा ले, ये हमने इतना बेसुरा होकर गाया है कि कई बार कव्वों ने आकर...
    जनवरी 2, 2019 ओये बांगड़ू
  • टूटी हुई बिखरी हुई- शमशेर बहादुर सिंह

    टूटी हुई बिखरी हुई चाय की दली हुई पांव के नीचे पत्तियां मेरी कविता बाल झड़े हुए, मैल से रूखे, गिरे हुए गर्दन से फिर भी चिपके ….कुछ ऐसी मेरी ...
    दिसंबर 31, 2018 ओये बांगड़ू
  • बाबा बनने में फायदा है…

    बचपन से उसे बता दिया गया था कि बड़ा होकर उसने सरकारी नौकरी करनी है. देव सिंह नाम था उसका बचपन से ही बहुत बड़ा बेवकूफ, तीसरी क्लास से लेकर बारहवीं तक उसन...
    दिसंबर 29, 2018 ओये बांगड़ू
  • कहीं और मिला कर मुझसे -साहिर लुधियानवी

    कहानी और कविताओं में इश्क,मुहब्बत ,प्यार ऐसा टॉपिक है जिसे हर किसी ने कभी न कभी अपनी ज़िन्दगी में उतारा होता है. ऐसे में अपने पसंदीदा लेखकों की इश्क पर...
    दिसंबर 27, 2018 ओये बांगड़ू
  • जन्म

    अंगेठी के चूल्हे पर मैने शब्दों को रख दिया उबलने को   पतीला अब गर्म हो चुका आग की धाह से पानी खौलने लगा जिससे निकलते बुलबुले कुछ गढ़ने को आतु...
    दिसंबर 24, 2018 ओये बांगड़ू
  • सुनो कहानी : जंगल में इश्कबाज़ी

    कहानी पढ़ी तो आपने खूब होंगी लेकिन जंगल में जानवरों की खाल पहने लोगों के इश्क की दिलचस्प कहानी यहाँ सुनिए-  http://www.oyebangdu.com/wp-content/uploads...
    दिसंबर 23, 2018 ओये बांगड़ू
  • अब लगन लगी किह करिए- बुल्ले शाह

    बाबा बुल्ले शाह दा नाम पंजाबी सूफ़ी काव्य दे आसमान उते एक चमकते सितारे वर्गा हैं।बॉलीवुड गीता विच आए बुल्ले शाह दे लिखे लव्ज़ हर जुबान उते चढ़ कर बोले. उ...
    दिसंबर 19, 2018 ओये बांगड़ू
  • आज कोए राज नहीं न्यायकारी – मुकेश यादव

    आज कोए राज नहीं न्यायकारी जनता फिर री मारी मारी झूठा ढोंग रचा राख्या, न्यारे-न्यारे पाड़ै, फूट का फायदा ठा राख्या   शहीदां नै दी थी कुर्बानी,...
    दिसंबर 11, 2018 ओये बांगड़ू
  • बाजार

    एक मान्यता, एक दिखावा जहाँ होड़ लगी नीचा , ऊँचा दिखाने की, और वहाँ दूर जंगल में.  शव काटता एक आदमी अपनी मान्यताओं से मजबूर उसके सपने बादलों में दूर जाक...
    दिसंबर 7, 2018 ओये बांगड़ू
  • पिता

    मेरी धमनियों में दौड़ता रक्त और तुम्हारी रिक्तता महसूस करती मैं, चेहरे की रंगत का तुमसा होना सुकून भर देता है मुझमें मैं हूँ पर तुमसी दिखती तो हूँ खैर ...
    दिसंबर 4, 2018 ओये बांगड़ू
  • आइसक्रीम

    बस एक कोन वाली आईस्क्रीम खानी थी उसे, लेकिन साथ खड़े महाशय बार बार मना कर रहे थे, आखिर सर्दियां शुरू हो गयी थी , जुकाम लगा था और मोहतरमा जिद पर अड़ी थी ...
    नवंबर 30, 2018 ओये बांगड़ू
  • हरिवंश राय बच्चन – जीवन की आपाधापी में

    शब्दों के जरिए दुनियां को जीवन के कई रहस्य समझाने वाले महान लेखक हरिवंश राय बच्चन का आज जन्मदिन है. आजादी के बाद हिंदी साहित्य को एक अहम जगह दिलाने वा...
    नवंबर 27, 2018 ओये बांगड़ू
  • एक कहानी- देवता लग जाना

    पहाड़ में एक प्रथा है । किसी को देवता “लग” जाता है और वह निदान के लिए ‘पुछ्यारे’ /’वाक्किये&#821...
    नवंबर 23, 2018 ओये बांगड़ू
  • आरक्षण वाली शोले

    वीरू – ये दोस्ती हम नही तोडेंगे ! जय –भक्क दलित कहीं के!   जय – मौसी बसंती को बोल हाँ कर दे वर्ना कुद जाऊँगा फान जाऊँगा !...
    नवंबर 22, 2018 ओये बांगड़ू
  • इन्कलाब का दहका खाकै गोरी सत्ता मृत होगी – राजेश दलाल

    इन्कलाब का दहका खाकै गोरी सत्ता मृत होगी झुण्ड के झुण्ड जां जय जय करते लाहौर जेळ तीर्थ होगी   दसौं दिशा लहरागी लपटें भट्ठी होगी लाहौर मैं भार...
    नवंबर 15, 2018 ओये बांगड़ू
  • बचपन की यादें -कमलकांत सक्सेना

    बचपन की यादें लिखती है, रोज-रोज नया इतिहास! ज्यों-ज्यों तन साया बढ़ता, बढ़ती जाती उम्र की प्यास!   घुटरूं-घुटरूं चलना, गिरना, उठना, फिर बढ़ना...
    नवंबर 14, 2018 ओये बांगड़ू
  • साची बात कहण म्हं सखी होया करै तकरार -बाजे भगत

    साची बात कहण म्हं सखी होया करै तकरार दगाबाज बेरहम बहन ना मरदां का इतवार   रंगी थी सती प्रेम के रंग म्हं, साथ री बिपत रूप के जंग म्हं दमयन्ती ...
    नवंबर 10, 2018 ओये बांगड़ू
  • डरपोक मित्रमंडली और चमत्कारिक मन्त्र

    बचपन में कुछ बच्चे घर से बाहर निकलने में घबराते थे . सुनसान रात उस पर झींगुर की आवाज टर्र टर्र,सन सन चलती सर्द हवा . कभी कभी आवाज के साथ चलने वाले झों...
    नवंबर 8, 2018 ओये बांगड़ू
  • परदेसी बेटा

    इस दीवाली मेरा घरौंदा सूना सा होगा मिट्टी के दीयरी (दीये) का उजाला घुँधलाएगा ओसारे की चौखट राह तकेगा आने का  अब बेटा परेदेशी वापस कैसे घर आयेगा &n...
    नवंबर 7, 2018 ओये बांगड़ू
  • हीर-रांझा, लैला-मजनू किस्से बाजैं गली गली : राजेश दलाल

    हरियाणा के रोहतक म्ह रहण वाले राजेश दलाल की लिखी “हीर-रांझा, लैला-मजनू किस्से बाजैं गली गली” कविता प्यार पर चलती खाप पंचयात की तलव...
    नवंबर 2, 2018 ओये बांगड़ू
  • भारत का यह रेशमी नगर – रामधारी सिंह दिनकर

    भारत धूलों से भरा, आंसुओं से गीला, भारत अब भी व्याकुल विपत्ति के घेरे में. दिल्ली में तो है खूब ज्योति की चहल-पहल, पर, भटक रहा है सारा देश अँधेरे में....
    अक्टूबर 30, 2018 ओये बांगड़ू
  • एक प्रेम कविता – प्रेत आएगा : बद्री नारायण

    किताब से निकाल ले जायेगा प्रेमपत्र गिद्ध उसे पहाड़ पर नोच-नोच खायेगा   चोर आयेगा तो प्रेमपत्र ही चुराएगा जुआरी प्रेमपत्र ही दांव लगाएगा ऋषि आ...
    अक्टूबर 28, 2018 ओये बांगड़ू