बांगड़ूनामा

एंटरप्रेन्योरशिप

सितंबर 1, 2023 कमल पंत

घनघोर निराशा का दौर था जब महाविद्वान जतिंद्र जी मेहनती मनिंद्र को मिले। अद्भुत संजोग था कि यह दो महा निठल्ले पुरुष एक साथ विश्व प्रसिद्ध चाय की टपरी पर टकरा गए।

जतिंद्र जैसा मैंने बताया महाविद्वान था, रोजाना चाय की दुकान पर सुबह 7 से 10 और फिर हर घण्टे के अंतराल पर घण्टे भर के लिए, दुकान पर आए लोगों को व्हाटसप पर आया अद्भुत ज्ञान सुनाता था। उसी के कारण उस पूरे क्षेत्र के लोगों को पता चला कि नेहरू मुस्लिम था और मुस्लिमों की भलाई के लिए उसने हर मदरसे को 100 करोड़ रुपया दे रखा था।

उसी के कारण चाय पर आए समस्त सज्जनों को पता चल पाया कि इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी के समय देश का पैसा विदेशी बैंकों में जमा करवा दिया था। वह सिर्फ राजनीतिक ही नहीं धर्मिक ज्ञान भी बांटा करता था, उसी ने बताया कि काबा में शिवलिंग को तोड़कर इन मुस्लिमों ने हज बनाया, उस पर एक लोटा गंगाजल डालते ही समस्त मुस्लिम एक साथ खत्म हो जाएंगे। कई हिन्दू कोशिश कर चुके हैं मगर सफल कोई न हुआ।

वह अपना फेसबुक पेज सत्य निष्ठ जितेंद्र का भी खूब प्रचार किया करता, जिस पर पूरे पौने दो सौ लाईक थे।
महिंद्र एक कर्मठ,मेहनती ठेकेदारों का ठेकेदार था,वह हजार तरह के बिजेनस आइडिया पर काम कर चुका था, उसने रेहड़ी खरीद कर किराए पर चढ़ा ली थी, जिसका किराया तो उसे कभी मिला नहीं, अलबत्ता चालान वह भरता रहता है, निगम को। उसने ऑटो खरीद कर कबाड़ में डाल दिया क्योंकि ड्राइवर उसे मिले नहीं ढंग के, और खुद उसे चलानी आती नहीं। उसने दारू के ठेके से दारू ख़रीदकर ब्लैक में बेचने का धंधा भी किया था, लेकिन पुलिस ने कमाई होने से पहले ही दारू की बोतलें जब्त कर ली और चालान फाड़ दिया लाख रुपये का, वरना जेल।

तो यह दोनों महापुरुष निराशा के दौर में चाय की दुकान पर एक हुए, जितेंद्र को जीतू और मनिंद्र को मनु कहते हैं शॉर्टकट में दुनिया वाले।
तो जीतू ने मनु को ज्ञान दिया कि पहले अडानी और अम्बानी भी 150 बार असफल हुए थे, मगर फिर उन्हें सही राह मिली और वह सफल हो गए। तो मनु महाराज इस ज्ञान से काफी इम्प्रेस हुए। वह अगले चार रोज तक जीतू महाराज से चाय की दुकान पर टाटा, बिड़ला, गुप्ता, अग्रवाल, जैन, गोदरेज, के कई किस्से सुनता रहा।
जीतू ने मनु को तमाम तरह की कहानियां सुनाई, जिसका सार बस यह था कि गुप्ता अग्रवाल जैन बिड़ला टाटा अम्बानी अडानी को कोई जीतू मिला तभी उसका भला हुआ वरना यह सब आज कहीं कचरा बीन रहे होते।
मनु ने भी जीतू में अपना जीतू ढूंढा और नए बिजनेस आइडिया पर काम करने की रजामंदी दे दी। रेहड़ी और ऑटो में भारी नुकसान झेलने के बाद मनु को अच्छा अनुभव हो गया था घाटा खाने का।
जीतू भी व्हाटसप फेसबुक पर आए दिन नये नये बिजेनस आइडिया देखता रहता था। दो दिन का समय ख़र्चने के बाद जीतू ने मनु को आइडिया दिया कि इंस्टाग्राम पर मेहनत की जाए । अब मनु के लिए यह इंस्टा की मेहनत समझ के परे थी । जीतू ने देखा था कि इंस्टाग्राम पर रील नाम की नई बीमारी आई है, जो कोरोना से भी तेज फैल रही है। बस जीतू ने मनु को आइडिया चेप दिया कि हम भी रील का धंधा करेंगे।
अब यह धंधा करें तो करें कैसे, आता तो था नहीं मनु को, वह तो पिताजी से पैसे लेकर प्रॉपर्टी डीलर की दुकान डालने के चक्कर में था। पिताजी पैसे दे नहीं रहे थे। हालांकि आता उसे यह काम भी नहीं था मगर जब दस काम बिगाड़े तो ग्याहरवा और सही।
और दूसरी तरफ जीतू जिसके पास सोशल मीडिया में मौजूद तमाम अच्छी बुरी जानकारियां उपलब्ध थी, वह अपने लिए कोई ऐसा ही काम ढूंढ रहा था जिसमें उसकी यह जानकारियां काम आ जाएं।।
तो जीतू जी को मनु में स्कोप दिखा और मनु को जीतू में होप। निराशा के घनघोर दौर के बीच दोनों मिले और 200 250 वीं चाय के बाद दोनों ने फैसला कर लिया कि इंस्टा रील बनाएंगे। प्रोफेशनल हायर कर नहीं सकते थे इसलिए यूट्यूब से जीतू ने ट्रेनिंग ली, हाऊ टू क्रिएट ए वायरल रील।
ट्रेनिंग का पहला लेशन था, आप उस विषय में रील बनाओ जो सबसे अलग हो, यूनिक हो, एकदम डिफरेंट और पब्लिक देखते ही आ जाये।।
जीतू ने मनु से यह महान जानकारी शेयर की और मनु ने फौरन कहा कि लोगों को तो सस्ता घर चाहिए जो आजकल मिलता नहीं है। मनु अपने प्रोपर्टी डीलिंग वाले बिजेनस की सोच रहा था।
जीतू एंड मनु रियल स्टेट के नाम से दोनों ने प्रॉपर्टी डीलिंग वाली रील बनानी शुरू कर दी। पहले तो रील वायरल ही नहीं हुई। 1k 100 300 500 व्यूज। और लाईक शेयर का कॉलम तो अक्सर खाली।
दोनों फिर से निराश। जीतू को एक रोज यूट्यूब से पता चला कि फेक न्यूज बड़ी तेजी से वायरल होती है। उसने वीडियो बना डाला 1 लाख में एक बीएचके, आज ही बुक करें।
ले रील में अच्छे खासे लाईक शेयर और डीएम पर डीएम। डीएम मने वही डाइरेक्ट मैसेज।
अब दोनों जवाब दें तो क्या जवाब दें। दोनों डर गए और कोई जवाब न देना ही जरूरी समझा।
अगले वीडियो में एक लाख को बढ़ाकर 10 लाख कर दिया। अब 10 1 से ज्यादा तो है, मगर दिल्ली के हिसाब से बहुत कम, फिर से भीड़ डीएम पर डीएम करे जाए। दोनों कहाँ से लाएं 10 में मकान।
अब दोनों की एक बात समझ आ गयी कि भैया रील ऐसे वायरल होती है। तो अब दोनों ने रील में झूठ बोलना कर दिया शुरू।
दो महीने की लगातार रील मेकिंग के बाद उन्होनें एक फ्लैट बेचा, 40 लाख का, उसका कमीशन अंदर किया और चेहरे पर कमाल की रौनक आ गयी।।
पैसा नजर आते ही, फ्लैट के अलावा, गाड़ी स्कूटर की भी रील बनाने लगे।
मतलब कमाल का धंधा चला दिया दोनों ने।
एक रोज जीतू ने रील बनाई, आज ही बुक करें 10000 में फ्लैट, इस नम्बर पर करें पैसे ट्रांसफर। मनु की कुछ समझ नहीं आया कि कहां के फ्लैट बुक करवा रहा उसका पार्टनर। मगर रील सच में चल पड़ी। 2 लाख रूपये अलग अलग जगह से खाते में आ गए। मनु हैरान की इतने बेवकूफ लोग कहाँ बैठे हैं जो बिना रसीद, बिना इंक्वायरी के पैसे भेज दे रहे।
महाविद्वान जीतू जानता था इसे फ्रॉड कहते हैं और अच्छी खासी सजा मुकर्रर है इसके लिए।
मगर जीतू खामोश रहा, मनु ने कुछ दिन के अंतराल में एक बड़ी सी बिल्डिंग का वीडियो बनाया और 50000 में फ्लैट बुक करें वाला विज्ञापन रील कर दिया।
नीचे डाला अपना फोन नम्बर, फोन आते जाएं, वह सबको कहे लास्ट बचा है, करना है तो अकाउंट में पैसे डालो। हड़बड़ी में 8 लाख रुपये जमा हुए, 16 लोगों ने पैसे ट्रांसफर किये।
धंधा चमकता देख दोनों ने कुछ और स्कीमें भी निकाली 5 हजार में गाड़ी, 2 हजार में नया स्कूटर।
ऐसे ही मेहनत से आगे बढ़ते बढ़ते, आज यह दोनों तिहाड़ जेल में पहुंच गए हैं। न तो पुलिस न ही जनता अपना पैसा रिकवर कर पाई है। दोनों जन तिहाड़ में करोड़पति बनाने की स्कीमें बता रहे हैं। ऑनलाइन करोड़पति कैसे बनें। एक गैंग सरगना के मोबाइल फोन से तो फेसबुक में चंदा जमा करवा कर दिखा दिया सबूत के तौर पर।।
अब कुछ गैंग इस बिजनेस को सीरियसली आगे बढाने की सोच रहे हैं।।
कहानी से हमें यह नैतिक शिक्षा मिलती है कि निराशा में मत पड़ो, हर हुनर आपको आगे ले जा सकता है।

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