गंभीर अड्डा

ये थी पहली महिला

अप्रैल 2, 2018 कमल पंत

भारत में सबसे पहले स्नातक अर्थात ग्रेजुएशन किसने किया होगा ? खासकर कौन महिला रही होगी जिसने सबसे पहले 15 कक्षा पास की होंगी ? एसे सवाल आपके भी मन में आते हैं. हमारी महिलाओं पर बनायी गयी इस विशेष सीरीज में आप तीन प्रथम महिलाओं के बारे में जान पायेंगे, एक तो वो जिन्होंने सबसे पहले स्नातक किया ,दूसरी वो जिन्होंने सबसे पहले एक्टिंग की,प्रोड्क्शन कम्पनी खोली,जी एकता कपूर से भी पहले की कम्पनी है उनकी.और तीसरी वो जो भारत की पहली महिला वैज्ञानिक बनी. इन सभी जानकारी का संकलन हैदर रिजवी द्वारा किया गया है.

1 कादम्बनी गांगुली 

भारत की पहली महिला स्नातक कादम्बिनी गांगुली थीं। इनका जन्म भागलपुर में एक स्कूल हेड मास्टर के परिवार में हुआ था। इनके पिता महिला शिक्षा के इतने बड़े पक्षधर थे कि 1863 में लाख विरोधों के बावजूद इन्होंने भारत की पहली महिला समिति गठित की।

कादिम्बिनी गांगुली साउथ एशिया की पहली महिला डॉक्टर बनीं।
कादिम्बिनी गांगुली ने संघर्ष करके कलकत्ता यूनिवर्सिटी से समबद्ध बैठूंन कॉलेज को फाइन आर्ट्स के स्नातक की डिग्री शुरू करने पर मजबूर किया। कादम्बिनी गांगुली और चंद्रमुखी बोस ने 1883 में वहां से पहली स्नातक की डिग्री हासिल की। भारत के कुछ कट्टर शिक्षकों और बुद्धिजीवियों के विरोध के कारण गांगुली लन्दन गईं और LRCP, LRCS तथा GFPS की डिग्री लेकर साउथ एशिया की पहली महिला डॉक्टर बनीं।

२ फातिमा बेगम 

फातिमा बेगम ने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत 1922 में बतौर अदाकारा की थी। 1926 में उन्होंने फातिमा फिल्म्स के नाम से प्रोडक्शन कंपनी भी खोली, जोकि अविभाजित भारत में किसी महिला द्वारा खोली गई पहली फिल्म प्रोडक्शन कंपनी थी। बाद में 1928 में इसका नाम विक्टोरिया-फातिमा फिल्म्स कंपनी हुआ। फातिमा बेगम ने अपने समय की कई फिल्मों का निर्देशन भी किया और यह भी भारत में किसी महिला द्वारा किया गया पहला कार्य था।

फातिमा बेगम ने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत 1922 में बतौर अदाकारा की थी।
फातिमा बेगम की तीन बेटियां भी भारतीय सिनेमा की मशहूर अदाकारा बनीं। जिसमें सबसे बड़ी बेटी जुबेदा भारत की पहली बोलती फिल्म आलम आरा की हेरोइन थीं। पाकिस्तान सरकार ने फातिमा बेगम को ‘बुलबुले पाकिस्तान’ के खिताब से भी नवाज़ा।

 

3 आसिमा चटर्जी 

आसिमा चैटर्जी भारत की पहली महिला वैज्ञानिक थीं।
आसिमा चैटर्जी भारत की पहली महिला वैज्ञानिक थीं। आसिमा चैटर्जी ने 1938 में कलकत्ता यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री में मास्टर्स विद ऑनर्स किया और फिर कलकत्ता विश्वविद्यालय से ही डॉक्टरेट किया। वे मेडिसन एवं कैलटेक विश्वविद्यालय में भी प्रोफेसर रहीं। 1984 में चैटर्जी भारत की किसी भी यूनिवर्सिटी से ‘डॉक्टरेट ऑफ साइंस’ करने वाली पहली महिला भी बनीं।

इन्होंने ऑरगेनिक केमेस्ट्री और दवाइयों पर काफी प्रयोग किए जिनमें एंटी एपिलेप्टिक और एंटी मलेरिया की दवाइयों पर किए गए प्रयोग सबसे महत्वपूर्ण रहे।

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