गंभीर अड्डा

इतिहास के पन्नों से गायब महिलाएं

नवंबर 15, 2017 Girish Lohni

भले ही आज भारत में सबसे लोकप्रिय होने वाले चुटकुले पत्नी प्रताड़ित पतियों के हों पर हकीकत ये है कि वर्तमान में भारत की लोकसभा में महिलाओं का संख्या 11.8 प्रतिशत है. भारत की संविधान सभा में भाग लेने वाली पंद्रह की पंद्रह महिलाओं ने संसद में महिलाओं के लिये सीटों के आरक्षित किये जाने का एक आवाज में विरोध किया था. उन्हें उम्मीद थी कि वे बिना किसी विशेष अधिकार के अपना प्रतिनिधित्व पा लेंगी. वास्तविकता ये है कि महिलायें इतिहास के पन्नों से हमेशा गायब रही.

फिर चाहे वो वैदिक युग हो, मध्यकाल हो या फिर आधुनिक काल महिलायें हर जगह इतिहास के पन्नों से गायब रही हैं. किसी ऐतिहासिक पुरुष के नाम में तू या आप की गलती हो जाये तो देश में हडताल देश बंद जैसे हालात हो जाते हैं लेकिन महिलाओं का नाम ही दर्ज नहीं है इस पर कोई सवाल करने वाला तक नहीं.

वैदिककाल और मध्यकाल के विषय में एक बार के लिये मान भी लिया जाए की बात पुरानी थी हालांकि पुरुषों के सबंध में ये पूरा हिस्सा दंगे तक का स्कोप रखता हो. लेकिन आधुनिक काल में भी किसी ने महिलाओं के योगदान को विशेष नहीं समझा. दुखद ये है कि सामान्य रुप से इतिहासकारों ने योगदान को छुपाने का पूर्ण प्रयास किया.

ब्रिटिश वर्चस्व के खिलाफ हुये 40 बड़े विद्रोहों में महिलाओं के नाम नदारद हैं. फिर चाहे वो नील विद्रोह हो, संथाल विद्रोह हो, कोल विद्रोह हो, विरसा मुंडा विद्रोह हो, खारवार विद्रोह हो, महिलाओं की बिना भागीदारी के प्रत्येक विद्रोह अधूरा है. नील विद्रोह में शामिल महिलाओं पर ब्रिटिश अत्याचार का जानकारी प्रायः सभी इतिहास की किताबों में मिल जायेंगी लेकिन ऐसी गिनती की किताबें हैं जो नील विद्रोह में महिलाओं द्वारा थालीयो, ईटो व मजबूत बेत के बने हथियारों के प्रयोग की जानकारी देती हैं.

अधिकांश ऐतिहासिक किताबों में रानियों का गौरवपूर्ण नाम मिल जाता है जिसने पिता पुत्र या पति की खातिर युद्ध लड़े. लेकिन वास्तविकता में मुख्य भूमिका में रहने वाली हजारों गरीब महिलओ को भुला दिया जाता है. कित्तूर की रानी चेन्न्मा हो झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई हो या लखनऊ  की बेगम हजरत महल हो सभी की सेना में हजारों वीर महिलायें थी. न लक्ष्मीबाई की हमश्क्ल झलकारी बाई को इतिहास के पन्नों में स्थान दिया गया न बेगम हजरत की साथी उदा देवी को. 1857 की क्रांति की चिंगारी को हवा देने वाली मुज्जफ्फरनगर की महाबीरी देवी और उनकी टोली की 23 अन्य महिलाओँ का उल्लेख तक किसी ऐतिहासिक पुस्तक में देखने को नहीं मिला .अत्यधिक दबाव के चलते नागा हीरो रानी गडियालो का नाम एनसीआरटी की इतिहास की किताब में केवल दर्ज किया गया लेकिन वर्णन अभी भी नहीं.

Rani Gaidinliu

आधुनिक काल के इतिहास में गाँधी के आगमन पश्चात महिलाओं की भागीदारी में तीव्र वृध्दि का उल्लेख ऐतिहासिक किताबों में मिलता है लेकिन हमारा दुर्भाग्य ये है कि इस दौर में महिलाओं के स्वतंत्रता आँदोलन में भागीदारी से अधिक लोगों की दिलचस्पी गाँधीजी और महिलाओं से उनके संबंध के विषय में  हैं. बाकी भगत सिंह के क्रांतिकारी विचारों से प्रभावित महिलाओं के नाम हों या सुभाष चंद्र बोस की लक्ष्मीबाई रेजिमेंट की हजारों महिलाओ के नाम इतिहास में खोजने पर भी मुश्किल से मिलेंगे.

बाकी पत्ति पत्नी वाले चुटकुले से फुरसत मिले तो सोचियेगा जरुर की इतिहास के पन्नों से महिला क्यों गायब है?  पदमावती के नाम पर पक्ष- विपक्ष से फुर्सत मिले तो पूछियेगा जरुर इतिहास के पन्नों से महिला क्यों गायब है?

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