बांगड़ूनामा

कमबख्त दिल से फ़ोटो निकालने की मशीन क्यों नहीं बनी

अक्टूबर 2, 2016 सुचित्रा दलाल

अक्सर मेट्रो में अपने लिए जीवनसाथी तलाशते चंकी महाराज आज नोएडा टकरायें हैं एक गजब अनुभव के साथ

सफर और भी सुहाना हो जाता है, जब कोई हमसफर मिल जाता है। तो बांगडु आज इसी से जुडा आधुनिक किस्सा पढ़ । यहीं नोएडा का किस्सा  कभी सोचा है आपने , बस की बगल वाली सीट में एक अनजान सी लड़की आये , पूछे सीट खाली है और आप मन ही मन जवाब दो पूरा दिल खाली है। वो बैठे एक लंबे सफ़र में आपका हमसफ़र बनकर, वो पूछे कौन सी किताब है? और फिर एक किताब के माध्यम से बातों का सिलसिला चालू हो, आपके शौक आपके ख़्वाब आदि पर आकर बातें रोमांचक हो जाएँ। आधे सफ़र के बाद आप उससे कहो कि आप औरों से अलग हो और वो आपसे कहे कि आप बहुत इंटरेस्टिंग हो। पूरी बस में आप दो अनजान लोगों के अलावा सभी बोर हो रहे हों लेकिन आप एक दुसरे की बातों में खो चुके हो। आपकी जॉब उसकी जॉब आपके शौक उसके शौक आपकी लाईफस्टाईल उसकी लाईफस्टाईल पूरे सफ़र में ये बातें हो और उतरते समय अचानक नम्बर लेना भूल जाओ। वो ऑटो में नोएडा और आप रोहिणी। अचानक आपको ध्यान आये कि आप तो नाम पूछना ही भूल गए ना सिर्फ पूछना भूले बल्कि बताना भी भूल गए। फेसबुक ट्विटर वाट्सअप गूगल क्रोम इंस्टाग्राम सब धरा का धरा रह जाए क्योंकि ना आपके पास नम्बर है ना नाम ना फ़ोटो। कमबख्त वैज्ञानिकों ने दिल से फ़ोटो निकालने की मशीन ही नहीं बनाई अभी तक।

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