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व्हाट्सअप मेसेज पर भरोसा मत करना,देश का कर्जा बड़ा है

जनवरी 19, 2019 ओये बांगड़ू

सोशल मीडिया या आपके पर्सनल मेसेज में अब भी वह मेसेज आता है क्या ‘भारत ने मोदी राज में चार साल में एक भी पैसे का कर्ज नहीं लिया’ अगर एसे मेसेज अब भी आपके मोबाईल की शोभा बड़ा रहे हैं तो फौरन डीलीट कर दीजिये. क्योंकि बेइजती होने के बड़े जबर्दस्त खतरे हैं.क्योंकि सरकार ने जो अपना बहीखाता पेश किया है उसमे पता चला है कि कर्जा 49 प्रतीशत बड़ा है.अब एसा तो हुआ नहीं होगा कि मोदी जी सरकार चलाते रहे और कर्जा मनमोहन लेते रहे.अब फेक न्यूज से बाहर आ जाइये.

इकोनॉमिक टाईम्स में छपी एक खबर के मुताबिक़ मोदी सरकार ने मनमोहन सरकार की तुलना में डेढ़ गुना ज्यादा कर्जा लिया है.रिपोर्ट में बताया गया है कि पहले आठ महीने में नवंबर तक राजकोषीय घाटा 7.17 लाख करोड़ रुपये या पूरे साल के 6.24 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य का 114.8 फीसदी रहा है. जून 2014 में जहाँ सरकार पर कुल कर्ज का आंकड़ा 54,90,763 करोड़ रुपये था वहीँ सरकार का कर्ज साढ़े चार साल में 50 फीसदी बढ़कर 82 लाख करोड़ पर पहुंचा है.

मगर सरकार के चमचों ने व्हाट्सप फेसबुक के जरिये फर्जी मेसेज का प्रचार करके जनता तक ये बात पहुँचने ही नहीं दी वह लगातार कहते रहे कि मोदी जी ने एक पैसा विदेश से कर्जा नहीं लिया जो भी पैसा लिया पिछले सत्तर सालों में कांग्रेस ने लिया मोदी जी ने सबका कर्जा उतारकर देश का कर्जा कम कर दिया.

चुनाव आ रहे हैं इसलिए एसी भ्रामक खबरें आप तक लगातार पहुंचेंगी,तभी कहता हूँ बांगडू पर खबर पढो,हमें दोनों जगह क्या खबर चल रही है इसका पूरा पता है,कहाँ फेक है कहाँ रियल इसकी जांच करके ही हम आप तक खबर पहुंचाते हैं.

शुक्रवार को केंद्र सरकार के कर्ज पर स्टेटस रिपोर्ट का आठवां संस्करण जारी हुआ, जिसके मुताबिक केंद्र में सत्तासीन नरेंद्र मोदी सरकार के बीते साढ़े चार साल के कार्यकाल के दौरान सरकार पर कर्ज 49 फीसदी बढ़कर 82 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

सरकार के कर्ज पर वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2014 में सरकार पर कुल कर्ज का आंकड़ा 54,90,763 करोड़ रुपये था, जो सितंबर 2018 में बढ़कर 82,03,253 करोड़ रुपये पर पहुंच गया

सरकार पर कर्ज में भारी बढ़ोतरी की वजह पब्लिक डेट(उधार) में 51.7 फीसदी की वृद्धि है, जो विगत साढ़े चार वर्षों में 48 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 73 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. पब्लिक डेट में यह बढ़ोतरी इंटरनल डेट में 54 फीसदी की बढ़ोतरी की वजह से हुई है, जो लगभग 68 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई.

इस अवधि में मार्केट लोन 47.5 फीसदी बढ़कर 52 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। जून 2014 के अंत तक गोल्ड बॉन्ड के जरिये कोई कर्ज नहीं लिया गया था और गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम सहित यह 9,089 करोड़ रुपये पर बरकरार है.

 

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