बांगड़ूनामा

वो निश्छल हंसी

अप्रैल 8, 2018 कमल पंत

सर्दियों की बारिश थी वो,जब ठंड में सिकुड़ते हुए उसे करोल बाग़ के मेट्रो पीलर के नीचे खड़े देखा था,स्वेटर भीग चुकी थी,और होंठ एक दुसरे से मिलते बिछुड़ते रह रहे थे,दोनों होंठों में एक प्रतियोगिता सी चल रही थी हूतूतू की ,ऊपर वाला नीचे को छूता और ऊपर हो जाता और उसी स्पीड से ऊपर वाला नीचे को छूकर नीचे आ जाता,बारिश जोरों पर थी और आस पास दूर दूर तक कोइ आसरा नहीं.
अपनी स्कूटी वहीं रोड साईड खड़े करके मै उससे पहले से वहां मौजूद था,एक भीगी लडकी को हल्का सा भी नजर उठाकर देख दो तो उसे लगने लगता है कि ये उन सब स्केनर आँखों का ही रिश्तेदार है जो कपडे स्केन करके अंदर तक झाँकने की कोशिश करते हैं, बस वही उस लडकी के दिमाग में भी चल रहा था शायद, क्योंकि जिस हालत में उसे स्वेटर उतारकर निचोड़ लेनी चाहिए थी उस हालत में वो स्वेटर को और ज्यादा कसे जा रही थी,स्वेटर से लीक होता पानी वापस उसी पर जा रहा था.
ठंड बहुत ज्यादा थी,इसलिए अपनी जैकेट उतारकर सलमान खान बनने का थोड़ा सा भी ख्याल मेरे मन में नहीं आया,अगर आ भी गया होता तो ठंड को देखते हुए शायद में ख्याल को ही दफन कर देता.
बारिश ने विकट तबाही मचाई थी,उधर मेट्रो पीलर के नीचे बैठने वाले भिखारी बच्चों के कपड़े हमारे मुकाबले आधे थे मगर फिर भी उनकी हालत हमसे दो गुना अच्छी थी,उन्होंने कहीं से जुगाड़ करके एक टायर जला लिया था जो उस समय ज़िंदा रहने के लिए सबसे जरूरी था,लंगर खुलते ही जैसे भिखारी सबसे पहले पाने के लालच में टूट पड़ते हैं लगभग वैसे ही आग जलते ही मैं कूद कर वहां आग के बगल में खड़ा हो गया.
उधर लडकी को देखा तो उसने अपने को और ज्यादा समेट लिया था,पर्स को छाती से चिपकाकर वह अपने कपडे अंदर ही अंदर निचोड़ रही थी,उससे उसको लगने वाली ठंड में इजाफा होता जा रहा था.
मुझे अपनी लडकी को घूर कर न देखने वाली इमेज पर भयंकर गर्व था,लेकिन यहाँ मामला कुछ और था,उसे घूर कर देखना जरूरी था क्योंकि छठी इन्द्री बार बार कह रही थी कि ये गिरेगी ,बेहोश होगी.
हालांकि मेरी छठी इन्द्री जब भी कुछ कहती हमेशा उसका उलटा होता है लेकिन जिस समय छठी इन्द्री कुछ कह रही होती है उस समय उसकी बात को यकीन करने का हमेशा मन करता है.
मैंने आग का मोहजाल कुछ देर के लिए छोड़ा और उसके पास जाकर उसको बोला ‘ पहले तो आप अपने को उस आग के पास थोड़ा सा गर्म कर लें,आपके हाव भाव से लग रहा है कि आप गिर जाओगे ठंड से , और दूसरा इस स्वेटर को यूं अंदर ही अंदर निचोड़ने से अच्छा है इसे उतारकर आप अच्छे से निचोड़ लें, जिस कद्र आप कंपकंपा रही हैं मुझे शक है कि अभी बीएल कपूर में एडमिट न करना पड़े’
एक अननोन घूरने वाले लड़के के मुंह से अचानक इतनी सारी बातें एकसाथ सुनकर उसे समझ नहीं आया कि बात माने या इग्नोर करे. वो कुछ देर मुझे घूरती रही ,फिर जाने क्या सूझी कि बारिश में ही आगे बड ली,मै हेलो एक्सक्यूज मी वगेरह वगेरह कहता रह गया मगर उसने पलट कर न देखा. उधर टायर जलाने वाले बच्चों के पास जब जाकर खड़ा हुआ तो एक बड़ा बच्चा बोला,’अच्छा भला बारिश से बचने के लिए खडी थी,आपने खामखा छेड़कर भगा दिया,इतनी बारिश में कैसे जायेगी अब वो ‘
मैं अपना एक्सप्लेनेशन देता उससे पहले उस बच्चे की बात में दो चार बड़े लोगों ने भी हां मिला दी,’अरे भाईसाहब बारिश वारिश में तो छेड़छाड़ नही करनी चाहिए कम से कम, अरे अकेली लडकी देखी नही कि बस चालू हो जाते हैं, बस इसी तरह की बातें शुरू हो गयी और मुझे भी बारिश में ही निकलना पड़ गया,शर्म के मारे पानी पानी वैसे ही हो रहा था ऊपर का पानी क्या कुछ बिगाड़ लेता.
वहां से बस कुछ किलोमीटर आगे आया ही था कि एक ईरिक्शा के अंदर वह बैठी दिख गयी, अब बात करूं या न करू ये सबसे बड़ा प्रश्न मन में घूम रहा था,मैंने उन बच्चों की बातों को दिल से ले लिया था इसलिए जाने क्या हुआ कि मैंने रिक्शा रुकवाकर सीधे लडकी को कहा ‘मैडम पहली बात मैंने आपको छेड़ने के लिए कोइ बात नहीं कही ,और दूसरा ये कि मुझे सच में लग रहा था आप बेहोश होकर गिरोगे,बाकी मै छेड़ने वाला लडका नहीं हूँ’
अबकी फिर से वो मुझे उसी तरह घूरती रही. और मैं कन्फ्यूज होकर उसे देखे जा रहा था. अचानक वो बोली ‘मेरे को रिक्शा नजर आ गया इतनी बारिश में इसलिए मैं चली आयी,वरना मैं आपके कहे बिना ही आग सेकने के लिए वहां पर आने वाली थी,और थैंक्स फ़िक्र करने के लिए,वैसे आपको क्यों लगा कि मैं बेहोश होकर गिरूंगी ‘?
अब मैं कैसे बता कि मेरी एक स्टुपिड सिक्स्थ सेन्स है जिसे हमेशा कुछ न कुछ अटपटा लग जाता है. खैर मैंने बात सम्भालते हुए कहा,’बस आपके हाव भाव देखकर लगा कि आप …….वो  ठंड बहुत ज्यादा है न,और मै सलमान खान बनकर आपको जैकेट देने की हिम्मत नही कर सकता’
सलमान खान वाली बात पर वो खिलखिलाकर हंस दी,अबकी उसके हूतूतू खेल रहे होंठ भी नहीं काँपे एकदम नार्मल होकर हिले,मुझे बहुत अच्छा लगा मैं उस हंसी में खो ही रहा था कि उसने बाई बोला और रिक्शा आगे से लेफ्ट. थोड़ा संभलते हुए लडकी का पीछा नहीं करना वाले सिद्धांत को फोलो करते हुए मैं सीधा आगे बड गया,मगर आगे बड़ते बड़ते ये सोचता रहा कि कुछ तो पीछे छूट रहा,शायद वो हंसी …
वापस पीछे आया,यूटर्न लिया उसी लेफ्ट में घुसता चला गया,मगर सही लेफ्ट ही राईट होता है वरना हमेशा गलत होता है….
हमेशा कि तरह बारिश की लव स्टोरी ,बारिश में ही खत्म ..

एक और लव स्टोरी पढनी है तो यहाँ क्लिक करो 

खून सनी कुल्हाड़ी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *