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विडियो : अपने सपनों को जीना सीखों

दिसंबर 9, 2018 ओये बांगड़ू

संघर्ष का दौर सबके साथ आता है, कुछ संघर्ष करके शाहरुख खान बन जाते हैं और कुछ वही सेम टू सेम संघर्ष करके भी साइड आर्टिस्ट रह जाते हैं मगर इसका मतलब ये नही होता कि शाहरुख और उनके सँघर्ष में कोई अंतर है। संघर्ष सबका एक् जैसा होता है । हां कुछ सफलता की सीढ़ी चढ़ते जाते हैं कुछ ऊंचे मुकाम नही छू पाते।

सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक शिक्षक भी थे। हम बचपन मे जिन शिक्षकों से पढ़ते हैं कई बार उनसे प्रभावित होकर शिक्षक को एक् करियर के रूप में देखने लगते हैं। ऐसे ही एक् सपना देखा श्वेता ने , बचपन से शिक्षक बनने का सपना। मगर इसी बीच उनके माता पिता ने उनकी शादी का सपना देख लिया, अपने सपने को अधूरा छोड़ उन्होंने मा बाप की बात मान ली। मगर मन मे एक् ठसक थी की शिक्षिका बनना ही है।

एक शिक्षक बनने के लिए श्वेता ने जो संघर्ष किये वह अपनेआप में प्रेरणादायक हैं। हम बड़ी बड़ी हस्तियों का इंटरव्यू उनके संघर्ष को सुनते है सिर्फ इसलिए कि हम उनके जैसा बन पाए। मगर क्या हम एक शिक्षक के संघर्ष को जानने की कभी कोशिश करते हैं? शायद नही।  आईए  श्वेता के माध्यम से जानते है कि इस शिक्षिका ने अपने शिक्षक बनने के सपने को पूरा करने के लिए क्या क्या किया. कैसे सपनों को जीना सीखो को उन्होंने अपनी लाइफ का अहम फंडा बना लिया

 

 

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