यंगिस्तान

उत्तरायणी-मकरैणी महोत्सव

जनवरी 11, 2019 ओये बांगड़ू

कुमाऊं कीर्तन मंडली द्वारा आगामी मकर संक्रांति को उत्तराखण्ड का प्रसिद्ध उत्तरायणी मेला दिल्ली के बलजीत नगर इलाके में आयोजित करवाया जा रहा है। कुमाऊं मंडल में पुसूड़िया के नाम से प्रसिद्ध इस त्योहार में सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करने का उत्सव मनाया जाता है,आपने महाभारत में सुना होगा कि तीरों की शैय्या में जाने के बाद इच्छामृत्यु प्राप्त भीष्म कहते हैं कि वह उत्तरायण में शरीर त्यागेंगे। भारतीय संस्कृति में उत्तरायण के सूर्य के इससे बड़े महत्व का उदाहरण और क्या हो सकता है।

खैर श्री कुमाऊँ कीर्तन मंडली 13 जनवरी को प्रवासी उत्तराखण्डियों के लिए एक बड़े समारोह का आयोजन करने का रही है। जिसमे सुदूर उत्तराखण्ड से आये कलाकारों समेत दिल्ली के कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे.

शादीपुर डिपो के पीछे विजय पार्क में आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम में दिल्ली और दिल्ली से बाहर के तमाम उत्तराखण्ड वासी और अन्य संस्कृति प्रेमियों के आने की उम्मीद है।

उत्तराखण्ड के गायक विपिन देव,कविता देव, रवि चन्द्र, नरिया रावत कोमल नेगी और कमल पांडे उत्तरायणी के इस रंगारंग कार्यक्रम को अपने सुरों से सजा देंगे.इनके अलावा गर्जिया कीर्तन मंडली द्वारा कुमाऊं का झोड़ा, छलिया वगेरह प्रस्तुत किया जाएगा।

कुमाऊं कीर्तन मंडली के अध्यक्ष सूर सिंह जलाल ने बताया कि महिला कीर्तन मंडली और नौदुर्गा कीर्तन मंडली द्वारा अपनी प्रस्तुति दी जाएगी।

उत्तरायणी के दिन कुमाऊं के कई इलाकों में घुघते खजूरे बनाकर कौव्वों को खिलाने की प्रथा है, प्रकृति के इस त्योहार में पशु पक्षी और प्रकति की पूजा करते हैं । दिल्ली में भी अपनी संस्कृति को जिंदा रखने के उद्देश्य से जब प्रवासी लोग इस तरह के आयोजन करते हैं तो उत्तराखण्ड दिल्ली में आ जाता है।

आयोजक मंडली के महासचिव रघुवर दत्त सत्यवली ने बताया कि 13 जनवरी,रविवार के दिन होने जा रहे इस कार्यक्रम को वह बड़े लेवल पर करने जा रहे हैं। इससे पहले भी कई जगह इस तरह के कार्यक्रम हो चुके हैं, मगर इस बार उत्तराखण्ड से आई थियेटर और भजन मंडली उत्तराखण्ड के गीतों से माहौल को उत्तराखण्ड के रंग में रंग देगी.

दिल्ली सरकार के सौजन्य से होने जा रहे इस कार्यक्रम के मुख्य अथिति मनीष सिसौदिया होंगे, उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार हर साल उत्तराखण्ड समाज के लोगों के इस उत्सव को बड़ा मंच प्रदान करती है जिससे कला और संस्कृति का प्रचार प्रसार हो सके। ऐसे आयोजनों के माध्यम से ही कलाकार को आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलता है। साथ ही कार्यक्रम में आने वाले बच्चे अपनी संस्कृति से भली भांति परिचित हो पाते हैं।

ऐसे कार्यक्रमों में आने वाले बुजुर्ग जिनका बचपन पहाड़ों में बीता है वह अपने बचपन की एक सुगन्ध ऐसे कार्यक्रमों के जरिये ही ले पाते हैं।

कुमाऊं कीर्तन मंडली मण्डली द्वारा उत्तरायणी-मकरैणी महोत्सव के आयोजन में अध्यक्ष सिंह जलाल, कार्यकारी अध्यक्ष दीवान सिंह ,महासचिव रघुवर दत्त,हीरा सिंह बिष्ट ,दिनेश फुलोरिया,मोहन सत्यवती, हेमा जोशी ,राधा नेगी ,कविता रावत,पूजा किरौली व कई अन्य अहम भूमिका निभा रहे है.

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