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उत्तरायणी-मकरैणी महोत्सव बलजीत नगर

जनवरी 14, 2019 ओये बांगड़ू

मकर संक्रांति को देश के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग नाम से मनाया जाता है उत्तर में पंजाब में यह लोहड़ी तो दक्षिण में तमिल लोगों के बीच यह पोंगल कहलाता है पूर्व असम  मेंं यह बिहू हो जाता है और पश्चिम में इसे मकर संक्रांति ही कहा जाता है.

कहीं इस दिन पतंग उड़ाते हैं तो कहीं आग जलाते हैं कहीं नया साल मानते हैं तो कहीं प्रकृति का त्यौहार.एसे ही उत्तराखंड में यह त्यौहार कहलाता है पुसुडिया(उत्तरायणी). जैसा इसका नाम वैसा इसे मनाने का तरीका,गीत संगीत के साथ साथ घुघते और खजूरे बनाए जाते हैं. अब आज की पीढी के बीच यह त्यौहार इतना पोपुलर रह नहीं गया शायद इसी को ध्यान में रखते हुए बलजीत नगर के रघुवर जोशी ने कुमाऊं कीर्तन मंडली के माध्यम से इस त्यौहार को दिल्ली के इस इलाके में करने की सोची. आज की पीढी के बच्चे सभी राज्यों के कुछ कुछ हिस्से को जानते हैं,जैसे लोहड़ी है लकड़ी जलानी है,गुजरात के हिसाब से पतंग उडानी है मगर वह यह नहीं जानती कि उसके अपने राज्य में इस दिन क्या किया जाता है.

बलजीत नगर में हुई इस बार की उत्तरायणी असल में बच्चों की पाठशाला थी,जहाँ छोटे छोटे बच्चे अपने माता पिता आमा बूबू के साथ उत्तराखंड के कल्चर को जानने समझने के लिए जमा हुए थे,झोडा चांचरी पहाडी गीतों से सजी इस महफ़िल का आगाज हुआ सुबह के दस बजे पारम्परीक छलिया नृत्य के साथ , जब पहाड़ की वेशभूषा में सजी औरतें पिछोड़ा और नथ पहने ढोल दमुआ की धुन में पहाड़ी डांस करते हुए बलजीत नगर में घूमकर विजय पार्क पहुंचे. विजय पार्क में पहाडी संस्कृति से जुडी हुई बहुत सारी चीजें उन बच्चों को देखने मिली जो अब तक इन सब चीजों से अनजान थे.अपनी दादी माओं के साथ आये बच्चे न सिर्फ कार्यक्रम का लुत्फ़ उठा रहे थे बल्कि कार्यक्रम के माध्यम से उत्तराखंड को जानने समझने की कोशिश भी कर रहे थे.

 

गर्जिया नृत्य मंडली और अन्य समूहों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में देर शाम तक रंगारंग कार्यक्रमों का दौर चलता रहा. इस कार्यक्रम में महापौर आदेश गुप्ता और निगम पार्षद सुनीता गाबा ने भी शामिल हुए. साथ ही कुमाऊं कीर्तन मंडली मण्डली द्वारा उत्तरायणी-मकरैणी महोत्सव को सफल बनाने में अध्यक्ष सिंह जलाल, कार्यकारी अध्यक्ष दीवान सिंह ,महासचिव रघुवर दत्त,हीरा सिंह बिष्ट ,दिनेश फुलोरिया,मोहन सत्यवती, हेमा जोशी ,राधा नेगी ,कविता रावत,पूजा किरौली व कई अन्य लोगो की अहम भूमिका रही.

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