यंगिस्तान

Uri Movie Review: फ़िल्म में सिर्फ विकी कौशल और युद्ध होता तो फ़िल्म होती हिट

जनवरी 12, 2019 ओये बांगड़ू

आप अगर हॉलीवुड की वॉर फिल्में देखते हुए ये सोचते हैं कि काश ऐसी फिल्म हमारे यहां बनती, तो उरी आपको देखनी चाहिए.आदित्य धर की यह पहली फ़िल्म है और लगता है आदित्य ने हॉलीवुड की वॉर फिल्मों को चाट खाया है। पूरी फ़िल्म में जितने भी वॉर सीन हैं वह सब हॉलीवुड की वॉर फिल्मों सरीखे हैं। कोई दो राय नही कि फ़िल्म में सिर्फ विकी कौशल और युद्ध होता तो फ़िल्म हिट होती। मगर स्क्रिप्ट को कमजोर करती है अति राजनीति।

वॉर फ़िल्म उरी कैसे सम्भव हुई इसका श्रेय शायद आदित्य धर सरकार को देना चाह रहे थे इसलिए भाव मे बह गए और फ़िल्म के नायक से ज्यादा करेक्टर आर्टिस्टों को स्पेस दे बैठे। अब परेश रावल अजीत डोभाल के रूप में क्यों आते हैं और क्यों इतनी सड़ी सी राजनीति करते हैं ये डायरेक्टर समझा नही पाए.

उरी फ़िल्म को दस में दस नम्बर दे दिए जाते अगर उरी फ़िल्म में जनाब आदित्य धर ने फ़िल्म और फोकस किया होता न कि मोदी भक्ति पर। मोदी भक्ति के चक्कर मे फ़िल्म का सत्यानाश कर गए जनाब।

उरी में विकी कौशल ने फौजियों के मानवीय पक्ष को बखूबी उभारा है और इसके लिए निर्देशक कतई भी श्रेय लेने की न सोचें, पूरी फिल्म में विकी कौशल एकलौते ऐसे किरदार हैं जिन्होंने प्रभावित किया और सम्भवतः यह  इसलिए हो पाया क्योंकि विकी कौशल किसी को खुश करने के लिए अभिनय नही कर रहे थे। परेश रावल जैसे सधे अभिनेता जब डोभाल के रोल से न्याय नही कर पाते तो लगता है कि ओवर करने के चक्कर मे सामान्य से भी चूक गए।

खैर जिनको वॉर फ़िल्म पसन्द है उन्हें इस फ़िल्म के वॉर सीन बेहद पसंद आएंगे। जिनको मोदी जी की सर्जिकल स्ट्राइक देखनी है उन्हें मोदी डोभाल संवादों में आनन्द आ सकता है।

ओवरआल फ़िल्म में विकी कौशल का फौजी अवतार देखना सुखद है। एक आर्मी मैन की भावनाओं को देखना हो तो उरी देखिएगा।

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