ओए न्यूज़

यूपी नहीं रही कभी मुलायम

जनवरी 3, 2017 ओये बांगड़ू

मुलायम के सख्त होने की कहानी नई नहीं बल्कि बहुते पुरानी हैं. एक बार उन्होंने सोनिया गाँधी को बहुत ही मुलामियत के साथ समर्थन देते हुए चिठ्ठी दे डाली. यह साल 1999 में हुआ जब अटल बिहारी वाजपयी की सरकार 13 महीनें से ज्यादा अटल नहीं रह सकी. तब सोनिया गाँधी सभी विपक्षियों की समर्थन वाली चिठ्ठी ले कर राष्ट्रपति भवन पहुँच गयी और ख़ुशी के मारे समर्थन पत्र हवा में लहराने लगी. लेकिन मुलायम सख्त हो गये और प्रेस कांफ्रेंस कर अपनी साईकल का हैंडल घुमाते हुए कांग्रेस को बिलकुल समर्थन न देने की घोषणा कर डाली. वहीँ 2008 में मुलायम ने अपने पुराने साथी लेफ्ट को सख्ती दिखाते हुए परमाणु करार के मुद्दे पर कांग्रेस का साथ दिया.

तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की गद्दी संभालने के बाद 2012 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद अपने बेटे को देश के सबसे बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया. लेकिन बेटे को गद्दी देने का फैसला सालों से मुलायम के साथ रहे उनके भाई शिवपाल यादव और चचेरे भाई राम गोपाल यादव को बेहद सख्त लगा. लेकिन मुलायम ने अपने सबसे बड़े राजनितिक कुनबे में अपने भाइयों को किसी न किसी तरह अपने साथ जोड़े रखा. लेकिन साल 2016 आते आते यह राजनितिक कुनबा बड़े नाटकीय अंदाज़ में टूटने लगा और अक्टूबर महीनें में भतीजे ने चाचा शिवपाल को पार्टी से निकाल दिया. लेकिन मुलायम सिंह यादव का परिवार के मुलायमवाद जाग उठा और अखिलेश को चाचा शिवपाल को दुबारा पार्टी में शामिल करना पड़ा.

साल 2016 खत्म होते होते सबसे बड़ा ट्विस्ट समाजवादी पार्टी में आ गया और मुलायम सिंह ने एक बार फिर सख्ती दिखाते हुए मुख्यमंत्री बेटे को पुरे 6 साल के लिए पार्टी से बाहर निकाल दिया. सब जगह पार्टी के टुकड़े होने के कयास लगाये जाने लगे थे लेकिन अब साईकल ने टर्न मारते हुए अखिलेश को एक बार फिर पार्टी में शामिल कर लिए है. आगे मुलायम बापू और कितने सख्त या मुलायम बनेंगे ये समय के साथ घूमता साईकल का पहिया ही बताएगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *