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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री और ढकोसलेबाजों की हार

जनवरी 2, 2019 ओये बांगड़ू

सबरीमाला मंदिर के बारे में अब तक सभी लोग भर भर के जान गए होंगे,2018 में सबरीमाला में इतने आर्टिकल छपे इतने छपे कि गूगल पर सबरीमाला भर भर के ट्रेंड हुआ.अब तक शायद ही कोई बचा हो जिसे सबरीमाला के भगवान के अयप्पा के बारे में पता न चला हो।

अयप्पा भगवान जो हैं वह ब्रह्मचारी हैं, ब्रह्मचारी मतलब जिसने आजीवन सेक्स न करने की कसम खाई हो, सौरी हां मैंने फ्लूएंटली प्रेक्टिकल बात बोलकर आप सब की भावनाओं को आहत किया हो तो। मगर असल मे ब्रह्मचारी का मतलब यही होता है ।

मगर हमारे पंडितों ने इसे दो कदम आगे आकर ब्रह्मचर्य की अलग ही व्याख्या कर दी। ब्रह्मचर्य का मतलब होता है अपनी इंद्रियों को इस तरह काबू करना कि किसी भी प्रकार हमारा ध्यान भंग न हो और भगवान अयप्पा ने वही किया था उनकी इंद्रियां किसी भी महिला को देखकर उसके स्पर्श से या किसी भी अन्य प्रकार से नहीं भटकती थी। उनकी सभी इंद्रियां उनके काबू में थी।

इसलिए भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हुए। महिलाएं उनके यहां जाएं या न जाएं उन्हें कोई फर्क नही पड़ता वह किसी भी तरह नही भटकते। उनके लिए सभी भक्त एक बराबर.

मगर उनकी पूजा करने वाले ठरकी पंडितों का ध्यान जरूर भटकता रहा होगा इसलिए उन्होंने भगवान अयप्पा के दरबार मे महिलाओं के आने पर पाबंदी लगा दी।

बाकी आप सब जानते ही हैं अप्रैल 1991 में पहली पीआईएल दाखिल हुई केरला हाईकोर्ट में, जब कोर्ट ये कहक़र पीआईएल खारिज कर दी कि पब्लिक की भावना का ध्यान रखते हुए। खैर मामला सुप्रीम कोर्ट में गया जहां बीते साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के लिए अयप्पा का दरबर खोल दिया। मगर पण्डित मानें तब न.

ये ढकोसले पैदा करने वाले लोगों ने इसे ईगो पर ले लिया,मगर बिन्दु और कनकदुर्गा ने 2 जनवरी को सबरीमाला के गर्भगृह तक पहुंचकर उन सभी ढकोसलेबाजों की बोलती बंद कर दी जिन्होंने महिलाओं के अयप्पा दरबार मे इंट्री पर बैन लगा रखी था.

अब आप कहेंगे कि हम इतना स्पोर्ट क्यों कर रहे हैं महिलाओं को। देखिए, भगवान ने कभी नही कहा कि मेरे दरबार मे ये लोग आएंगे और ये लोग नही आएंगे, भगवान ने अपना दरबार सबके लिए खुला रखा है, मगर कुछ लोगों ने इसे धंधा बना दिया, धंधा चमकाने का तरीका होता है चीज को स्पेशल बना देना या कुछ हटकर बना देना। सबरीमाला को भी यूंही धंधेबाजों ने स्पेशल बना दिया।

महिलाओं को कहा कि देखो अंदर न आना भगवान ब्रह्मचारी है, तुम्हे देखकर उनका ब्रह्मचर्य खंडित हो जाएगा। अब पण्डित जी कह रहे होंगे तो सही ही कह रहे होंगे, आखिर शास्त्रों के ज्ञाता हैं, शायद तब की जनता ने यही सोचा और महिलाओं के उधर न जाने के माहौल को एकदम फैला दिया। अब महिलाएं दूर से ही अयप्पा भगवान को देखने लगी, मल्लब मंदिर से कई कोसो दूर।

लेकिन 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाएं जा सकती हैं मंदिर में अगर जाने चाहें तो। बड़ा गजब का फैसला था, और उसके बाद से महिलाएं लगातार मंदिर प्रवेश की कोशिशें करने लगी। भगवान सबके हैं उन्होंने जब भेदभाव नही किया तो आम इंसान क्यों भेदभाव कर रहा है।

खैर 2 जनवरी को महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश किया, विडियो बना वायरल हुआ मगर भगवान और सँविधान की जीत हुई ,हां ढकोसलेबाज हार गए।

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