बांगड़ूनामा

तू नहीं आया

नवंबर 7, 2016 ओये बांगड़ू

पंज आब (पंजाब) दी बोली पंजाबी दा अपना अलग ही रुबाब है जिसनू अमृता प्रीतम दे शब्द होर वदा देंदे है. पंजाबी विच लिखी गयी एह कविता ‘तू नही आया’ प्रकृति और इंतज़ार दा खूबसूरत वर्णन है. तुस्सी वि पढ़ो

चेतर ने पासा मोड़िया, रंगां दे मेले वास्ते

फुल्लां ने रेशम जोड़िया – तू नहीं आया

 

होईआं दुपहिरां लम्बीआं, दाखां नू लाली छोह गई

दाती ने कणकां चुम्मीआं – तू नहीं आया

 

बद्दलां दी दुनीआं छा गई, धरती ने बुक्कां जोड़ के

अंबर दी रहिमत पी लई – तू नहीं आया

 

रुकखां ने जादू कर लिआ, जंग्गल नू छोहंदी पौण दे

होंठों ‘च शहद भर गिआ – तू नहीं आया

 

रूत्तां ने जादू छोहणीआं, चन्नां ने पाईआं आण के

रातां दे मत्थे दौणीआं – तू नहीं आया

 

अज फेर तारे कह गए, उमरां दे महिलीं अजे वी

हुसनां दे दीवे बल रहे – तू नहीं आया

 

किरणां दा झुरमुट आखदा, रातां दी गूढ़ी नींद चों

हाले वी चानण जागदा – तू नहीं आया

हिंदी में कुछ ऐसे होगी ये कविता (चैत ने करवट ली, रंगों के मेले के लिए
फूलों ने रेशम बटोरा – तू नहीं आया.. दोपहरें लंबी हो गईं, दाख़ों को लाली छू गई
दरांती ने गेहूँ की वालियाँ चूम लीं – तू नहीं आया… बादलों की दुनिया छा गई, धरती ने दोनों हाथ बढ़ा कर , आसमान की रहमत पी ली – तू नहीं आया… पेड़ों ने जादू कर दिया, जंगल से आई हवा के, होंठों में शहद भर गया – तू नहीं आया…ऋतु ने एक टोना कर दिया, चाँद ने आकर
रात के माथे झूमर लटका दिया – तू नहीं आया…आज तारों ने फिर कहा, उम्र के महल में अब भी
हुस्न के दिये जल रहे हैं – तू नहीं आया.. किरणों का झुरमुट कहता है, रातों की गहरी नींद से
रोशनी अब भी जागती है – तू नहीं आया..)

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