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शौचालय पुरुष दिवस की बधाई

नवंबर 19, 2018 ओये बांगड़ू

त्रिनिनाद में 19 नवम्बर 1999 को ऐसा कुछ हुआ कि आज का भारत का पुरूष गर्व से सर उठाकर कह सकता है कि उसके लिए भी एक् दिन निर्धारित है। हालांकि ये दिवस फिवस का कॉन्सेप्ट अपन के पल्ले नही पड़ता। क्यों मनाते हैं ऐसे ऊलजुलूल दिवस, महिला दिवस, बाल दिवस,पुरुष दिवस,पत्नी दिवस, पति दिवस मतलब चक्कर क्या है ऐसे दिवस मनाने का ?

वैसे दुनिया की कई चीजों की तरह इसकी शुरुवात भी फरवरी 1992 ने यूएस में हुई, तब एक् प्रोफेसर ने (पता नही क्यों?) इस दिवस की शुरुवात की। लेकिन 1995 आते आते ये बन्द हो गया। फिर त्रिनिनाद एंड टोबेको के त्रिलोक सिंह(ये पक्का अपनी पत्नी का सताया रहा होगा) ने 19 नवम्बर को पुरूष दिवस की शुरुवात की। मगर भारत मे यह उसी दिन से शुरू नही हुआ(सच कहूँ तो आज भी बहुत ज्यादा नही मनाया जाता)
भारत मे 2007 में सेव इंडियन फेमिली नामक संस्था ने इसकी शुरुवात की। उनका मानना था कि पुरुषों के विकास के लिए एक् दिन होना जरूरी है(मतलब 365 दिन में एक् दिन विकास होगा)
संस्था के मन में जाने क्या आई उसने महिला विकास मंत्रालय की तरह पुरूष विकास मंत्रालय की मांग भी कर डाली(भारत मे कोई भी कुछ भी कर सकता है)।
कल को हो सकता है कुत्ता विकास मंत्रालय की मांग भी होने लगे। गाय विकास मंत्रालय की तो होने लग गई है। आदमी औरत के बाद गाय कुत्ता ही सबसे ज्यादा पॉपुलर हैं.
वैसे भारत में शौचालय दिवस भी इसी दिन मनाया जाता है,सन 2013 में यूएन ने घोषित किया 19 नवम्बर को विश्व शौचालय दिवस,और भारत में स्वच्छ भारत अभियान के बाद जो है टायलेट दिवस भी पोपुलर हो गया. जैसे टायलेट फिल्म के बाद स्वच्छ भारत अभियान टायलेट अभियान बन गया था.खैर इस पर विस्तार से चर्चा किसी और दिन.
आज जो है टायलेट और पुरुष दोनों का दिन है. दोनों लोगो समाज में आज के दिन अपनी अपनी महत्ता साबित करेंगे बाकी जो होगा वह होगा देखी जायेगी.
खैर आप सभी को पुरुष दिवस की बधाई, बाकी इस दिन क्या करते हैं पता नही, सोमवार वाले आफिस जरूर जाएंगे क्योंकि सरकार छूट्टी नही देती और कम्पनी वाले नार्मल दिन नही देते इस दिन क्या देंगे।आफिस में रोज की तरह लगे रहो। फिर जाकर वापस आओ, खाओ पियो सो जाओ । जै पुरूष दिवस।

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