बांगड़ूनामा

टाईम मशीन लव

जुलाई 10, 2017 कमल पंत

ये आशिक प्रेमी दीवाना जो है इसके पास एक टाईम मशीन है, इसकी लवर हर जन्म में इसके आस पास से निकल जाती है लेकिन इसके करीब नहीं आती. इस बार ये समुद्र के पास रहने वाले किसी कबीले में गया है अपनी मशीन लेकर, हर बार की तरह.

यहाँ का माहौल कुछ अलग है, आस पास समुद्र है कुछ एक टूटे जहाज हैं, उन जहाजों में कुछ परिवार रहते हैं. लगते आदिवासी जैसे हैं क्योंकि सर में मोरपंखी का मुकुट पहना हुआ है लेकिन आदिवासी हैं या जहाज के वह यात्री जो डूबने से बच गए कह नहीं सकते. जहाज काफी बड़ा है. दूसरा जहाज कुछ दूरी पर है और वहां भी कुछ परिवार रहते हैं. इनका खाना पीना मुख्यतः समुद्र पर निर्भर है. वहीं से मछली और अन्य चीजें इकट्ठा करते हैं ये लोग.

इन्हें देख कर एसा लगा मानो आदिवासी जंगलों से जहाजों में शिफ्ट हो गए हों, गाँव से शहरों की तरफ जैसे आ रहे हैं आजकल लोग. दुसरे जहाज में ज्यादातर हट्टे कट्टे लोग थे वो शायद इस पूरी कालोनी की जरूरतों को पूरा किया करते थे जैसे जंगल से लकड़ी लाना वगेरह वगेरह, इनका सारा काम मिल जुलकर होता था. जहाजों में नहीं बल्कि नीचे जमीन में ये मिलकर खाना बनाया करते थे.

इनके खाना बनाने वालों में ही एक लड़की थी जो सम्भवतः इन सबके हेड की बेटी रही होगी. क्योंकि क्या बनेगा कैसा बनेगा जैसे फैसले सब वह ही ले रही थी. सुबह खाना बनाने से लेकर परोसने तक का सारा जिम्मा इसी का था.समुद्र से सी फ़ूड लाने वाले इसी को दिखाकर आगे सामान फारवर्ड किया करते थे.

मैं इस जन्म में एक केकड़ा था, बड़ा मस्त सा केकड़ा. पहली बार जब मेरी अपनी हीरोइन से मुलाक़ात हुई तो वह नहा रही थे समुद्र में , मैने उसे देखा और देखता ही चला गया पलकें झपकाने का मन ही नहीं किया. अचानक मेरे ऊपर कुछ जाल सा गिरा और अगले ही पल में इनके बावर्ची खाने में था, वहां केकड़ों को आग में भूना जा रहा था सामूहिक रूप से , मेरी डर से हालत खराब थी आठों पाँव मेरे काँप रहे थे. मगर अचानक इस लडकी ने मुझे प्यार से उठाया और अपने आंचल में छिपा लिया, मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

वो मुझे देखकर प्यार से सहलाए जा रही थी, मुझे उसने एक बड़े से कटोरे के अंदर रख लिया. मुझे लग गया कि ये लड़की मेरे को बचा रही है. मैं भी फुल कापरेट करने लगा मैंने उस कटोरे से बाहर आने की कोशिश ही नहीं की ,हालांकि मैं चाहता तो आसानी से बाहर आ जाता.लेकिन लड़की के प्यार ने मेरे कदम रोक दिए.

शाम को वो लड़की फिर मेरे पास आयी, उसने खुशी खुशी मुझे उठाया और कुछ कहा , कहा क्या ये तो मैं समझा नहीं ,लेकिन जो भी कहा बहुत प्यारा था.वो मुझे वैसे ही आंचल में छिपाए कहीं ले जा रही थी.मैं उसके हाथों के कोमल स्पर्श में खोया था तभी मेरे सर पर कुछ धारदार पड़ा.खचाक आवाज आयी और मैं उसके रसोईखाने के ऊपर था. मेरी कुछ समझ नहीं आया.

हां लेकिन अब उसकी बातें मुझे समझ आ रही थी, वो कह रही थी ‘अपने होने वाले पति के लिए सुबह से छिपा कर रखा था अब उन्हें फ्राय करके खिलाऊँगी दारू के साथ ‘

कमबख्त ने खुद ही मेरा गला काट दिया था ,अपने प्यार का सच्चे प्यार का .

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