यंगिस्तान

ऑडियो -सातवां सालाना डोयाट (2018) तीसरा दिन

दिसंबर 11, 2018 ओये बांगड़ू

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तीसरा दिन

गुममा से रेकोंग पीओ (275 किलोमीटर)

कुल जमा 993 किलोमीटर

गुममा में रात बिताने के बाद सुबह 8 बजे गुममा छोड़ दिया था. गुम्मा हिमाचल के शिमला जिले मे आता है. मजेदार बात ये है कि इस रूट पर आप कई बार उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के अंदर बाहर करते हो. गुममा तक जो NH 707 टूटा हुआ रात तक साथ दे रहा था उसने यहां से 12 किलोमीटर तक और साथ दिया. टोन्स नदी साथ देते हुए तियूनी तक ले जाती है, यहां के पहाड़ चट्टानी हैं, पहाड़ों मे पेड़ नहीं झाड़ जैसी वनस्पति है. ये इलाका उत्तराखंड हिमाचल का बार्डर एरिया है और यहां के लोकल पहनावे में उसकी झलक बखूबी दिखती है. गुममा से फैड़िज पहले पड़ता है यहां एक पुल है फैड़िज पुल जो आपको फिर उत्तराखंड मे ले जा लेता है. यहां से रास्ता अब अच्छा हो चला है, NH 707 अब बमुस्किल 25 फिट की सिंगल पट्टी रोड जैसी दिखती है. त्यूनी कोई 20 किलोमीटर रहा होगा यहां से, ये एक बड़ा इलाका है अब यहां टोन्स बिल्कुल सड़क से लग कर थोड़ी दूर तक चलती है. यहां एक पुल से शिमला, चकराता का रास्ता कट जाता है, हम यहाँ से सीधे हाटकोटि के लिए बढ़ते हैं जो यहां से कोई 35 किलोमीटर होता है, दूसरी बात यहाँ से जो शिमला के लिए रास्ता कट ता है उस पर 15 किलोमीटर आगे हनोल मे महाशू देवता का मंदिर पड़ता है, क्यूंकि ये हमारे रास्ते से हट कर था इसलिए इसे वापसी के लिए छोड़ दिया.

यहां से आगे फिर उत्तरकाशी लग जाता है मोरी कस्बे का. यहां से आगे बढ़ने पर एक नजर रोहडू पर भी रहती है जो हाटकोटी के बाद पड़ता है. यहां से पूरी तरह हम हिमाचल मे आ जाते हैं, जिला शिमला शुरू हो जाता है. हाटकोटी से रोहडू के बीच मे जो रोड है वो गजब की किसी फोर लेन हाई वे की माफिक. रोहडू पहुंचते ही ये रोड ख़तम हो जाती है. रोहडू के बाद अगला पड़ाव सुंगरी होता रहा. सुंगरी के आगे रामपुर बुशहर पड़ता है जो एक अच्छा खासा इलाका है. हिमाचल के गाँव बड़े खूबसूरत हैं, असली लड़ाई शुरू होती है सुंगरी के आगे जहां से 12 किलोमीटर पूरी रोड टूटी हुई है, और आपके बाईकिंग स्किल का अच्छा एक्जाम लेती है. 12 किलोमीटर पार करने मे लग गए 45 मिनट.

कभी कभी चीजे आप के हाथ में नहीं होती, आपको बस बहते जाना होता है वो ही मैंने किया. इस बीच समरकोट एक जगह पड़ती है, हिमाचल क्यूँ सेबों के लिए जाना जाता है आज मैंने जाना. ये पट्टी सेब, बादाम के लिए फैमस है. सेब के बाग रोड से झांकते हुए मिलते रहते हैं. सुंगरी से रामपुर बुशहर नरक है, पूरा रास्ता पत्थरों से पटा है, यहां एक चीज मजेदार देखने को मिली एक पहाड़ से दूसरे पहाड़ घिरनी बधी है, जो समान ऊपर नीचे पहुंचाती है. गजब इनवेंट है. रामपुर बुशहर सतलुज के किनारे बसा है और आज के रूट का सबसे बड़ा इलाका, पूरे बाज़ार आपको हिमाचल टोपी पहने बुजुर्ग युवा दिखते हैं. रामपुर से आगे बढ़ने पर किन्नौर जिला लग जाता है, किन्नौर महादेव की भूमि है किन्नौर कैलाश की भूमि है. यहां का NH 5 पूरी चट्टान को काट के बना है जो आपको रिकोन्ग पियो तक छोड़ता है.

सतलुज को पूरा निचोड़ ते हुए हिमाचल ने हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की बाढ़ लगा रखी है, यहां से बर्फ से ढकी किन्नौर कि चोटियां दिखने लग जाती है, सतलुज यहां भी साथ देती है, नाथपा, सैन्ग टोक, करचम, होते हुए 6 बजे मैं रेकोंग पीओ पहुच गया, रेकोंग पीओ किन्नौर का हेड क्वार्टर हैं, और यहां से किन्नौर चोटियों का गजब नजारा दिखता है, जो मैं आपको सुबह दिखाऊंगा. फिलहाल अभी गप्पें लगाने का वक़्त है और मेरा होटल मालिक इसमे बखूबी साथ दे रहा है. रेकोंग पीओ का अभी टेंपरेचर 3 डिग्री है रात को माइनस में जाएगा ऐसा गूगल बाबा बता रहे हैं, फोटो लेखनी के क्रम मे हैं, कल फिर निकलेंगे नाको के लिए तब तक

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ऑडियो:सातवां सालाना डोयाट (2018)(दूसरा दिन)

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