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अर्थ का अनर्थ करते शब्द

अक्टूबर 4, 2018 ओये बांगड़ू

काल्पनिक लोक सा लगता है वो दौर जब हमें चिट्ठियों में नमस्कार करना सिखाया जाता था,चिट्ठी लिखते समय कहाँ पर कैसे एक-एक शब्द में भावना डालनी है, ये बात घर वाले बहुत ध्यान से सिखाते थे. पहली चिट्ठी मैंने अपनी नानी को पेन्सिल से लिखी थी.

परम आदरणीय नानी जी को प्रणाम ,हम सब कुशल मंगल से रहते हुए आपके कुशल मंगल की कामना करते हैं. इसके बाद जो जो लिखा जाता था उसके सभी मतलबों पर गौर भी कर लिया जाता था,कोइ शब्द अर्थ का अनर्थ न कर दे इसका पूरा ध्यान रखा जाए इसकी हिदायत बकायदा देते थे. आज व्हाट्सप करते हुए शायद ही हम इतना ध्यान देते हो कभी.

जैसे एक बार मैंने किसी परिचित रिश्तेदार को लिख दिया कि आप 15 दिन रुके बहुत अच्छा लगा, तुरंत वो सेंटेंस चिट्ठी से हटवाया गया,उसकी जगह सिर्फ इतना लिखा कि आप आये बहुत अच्छा लगा, क्योंकि मेरे उस अर्थ का भारी अनर्थ निकल सकता था.

अब आइये व्हाटसप या फेसबुक पर, क्या हम इतना ध्यान देते हैं ? शायद नही, तुरंत दान महाकल्याण, बस लिख दो,कुछ अर्थ का अनर्थ हो गया तो इंस्टेंट माफी तो है ही ,कौनसा चिठ्ठी ने 7 दिन बाद पहुंचना है.

इस ढिलाई के कारण कई एसे अनर्थ हुए हैं कि लोगों को जान से हाथ तक धोना पड़ गया. क्योंकि पहले तो सिर्फ बिना ध्यान दिए लिखना शुरू किया था बाद में कॉपी पेस्ट करना शुरू कर दिया.

अभी कुछ दिन पहले एक परिचित की खबर मिली,बुजुर्ग को हार्ट अटैक आ गया,बेटे ने पिताश्री को स्मार्ट फोन और एक नौकर दे दिया . नौकर पिताश्री का ध्यान रखता और बेटा नौकर का.

अच्छी कट रही थी दोनों की, पिताश्री को जब भी बेटे से बात करनी होती वह नौकर को कह देते,वह या तो विडियो कॉल कर देता या फिर व्हाट्सअप .व्हाट्सप के मेसेज नौकर ही पढ़कर सुनाया करता था.

वहां की रात और यहाँ के दिन में बुजुर्ग ने कोई मेसेज भिजवाया शायद, किसी परिचित की मृत्यू के सम्बन्ध में, उधर से रिप्लाई आया ‘आप कब जाओगे ?’

पुत्र कहना चाहता था परिचित के यहाँ कब जाओगे, मगर नौकर ने इस भाव के साथ पढ़ा ,जैसे बेटे ने कहा हो ‘तू कब मरेगा बुड्ढे ‘

बस पिताश्री सदमे में और हर्ट अटेक ..

जीवित हैं मरे नहीं ..

इसलिए मेसेज फैलाओ,मगर थोड़ा ध्यान से …

 

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