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ध्यान से पढ़ लो उर्जित क्यों न मान रा ताऊ की बात

नवंबर 2, 2018 ओये बांगड़ू

आरबीआई का मसला देखो बड़ा ही जबरदस्त चल रहा। कल ठाकुर साब आये कै रे कि ओए पत्तलकार, ये उर्जित क्यों न मान रा ताऊ की बात, मैंने कई अरे ठाकुर साब मामला क्या हो रा क्यों खड़े खड़े अपनी ऐसी तैसी करा रे, बैठ जाओ बैठ के कराओ।

बोले देख ज्यादा न बने मति, तू सब जान रा जो मैने कैने आया हूँ।  अखबार पड़ा सुबह सुबह तेरा ये उर्जित पटेल भी दुश्मनों से मिलकर हमाये मोई जी को हराना चाह रा। कमबख्त बहुतेई पैसा बनाकर रखी है इटेलियन। सबको खरीद दे री।

मैंने कई दख़ो चचा मुंह न खुलवाओ खामखा में रोते हुए जाओगे। बोले बक तो सही पैले मामला क्या है।

मैंने कई चचा सुन लो फिर, मान लो गांव का पुत्तन तुमसे 1000 रूपये लेकर जाए। और कहे कि हर बारी 100 100 रूपये करके सारी रकम चुका दूंगा।

अबे पुत्तन को मेरी जुत्ती न दे पैसे। मैंने कई चचा सुन तो लो, खाली कै रा हूँ कि मान लो तुमने दिए, देने को तो तुम अपने सगे बेटे को न दो, मगर फिर भी मान लो तुमने दिए। तुम रिजर्व बैंक हो। आरबीआई। समझे

हा अब बके जा रुकना मति। मैंने शुरू हो गया। तो जनाब चचा तुमने दिए हजार रुपये, पुत्तन ने हजार का कहीं सौदा कर लिया। और तुम्हे देते टाइम कैने लगा, प्रधान से बात कर लो।

तुम गए प्रधान के पास, तुमने कई कि रे प्रधान पुत्तन हजार ले गया था, किश्तों में देने की कै रहा था, मगर अब नही दे रहा। प्रधान बोल्या कि पुत्तन के साथ साथ कल्लन को भी दे दे हजार, मैं कै रिया हूँ

अब तुमने पुत्तन के साथ साथ कल्लन को भी दे दिए। पैसे मांगने की बारी आई तो दोनों मुकर लिए, बोले हम तो भूखे नंगे हो रखे हैज़ तुझे कहाँ से दे दें पैसे। वो दोनो चले गए प्रधान के पास।

प्रधान ने फिर कै दी कि इन दोनों की छोड़ छत्तन को भी दे दे हजार। अब तुमने प्रधान के कैने पर छत्तन को भी दे दिए पैसे।

अब तुमारे पास कुछ ही रकम रह गयी। तुमने प्रधान से कई की पुत्तन छत्तन और कल्लन के पास रकम है वापस मांग लो सरकार ने कही कि क्या बात कर रहा वो दोनो मुसीबत में हो रहे अभी। अभी मत मांग। तुमने कई प्रधान से कि प्रधान मेरा दिवाला निकल जाएगा मेरे पास और पैसे नही है इनको बोल कि पैसे दे दे।

प्रधान कह रहा कि तुम और पैसा दे दो, तुमने कई पैसा है ही नही, मगर प्रधान मानने को राजी नही हो रहा।

उधर कल्लन पुत्तन छत्तन एक् भी पैसा नही लौटा रहे।

इधर ठाकुर कहने लगा अबे इतना पका क्यों रहा मुद्दे पर आ। मैंने कई चचा तुम उर्जित पटेल हो , प्रधान सरकार है, पुत्तन कल्लन छत्तन व्यापारी है। अब बताओ उर्जित गलत है या प्रधान

अरे जाहिर है साला प्रधान को पैसे निकलवा के देने चाहिए।

हा तो बस देश मे वही तो नही हो रहा। देश का पैसा जा रहा है मगर वापस न आ रिया.

आरबीआई परेशान हो गई उर्जित किल्स गया मगर सरकार अभी भी मजे लेने के मूड में और तुम जैसे लोग इसे विपक्ष की चाल मान रहे। वैसे अब वो आरएसएस के कोए आर्थिक शाखा स्वदेशी जागरण मंच ने भी जागते हुए उर्जित को ज्ञान दे दिया और बोला है या तो ताऊ के साथ काम करो या इस्तीफा दे कर साइड हो लो

आरबीआई को पैसा ओएबंगड़ू को देना चाहिए, हम ईमानदारी से एक् एक् पैसा लौटा देंगे.

ओये नसीहति बेटा आरबीआई लोन नही देता। चिचा देता है लोन मगर सीधे बैंकों को पब्लिक को नही। बैंक को ही वापस नही मिलेगा तो आरबीआई को क्या घण्टा मिलेगा। आई मीन मंदिर वाला, राम मंदिर वाला

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