गंभीर अड्डा

राजस्थान में भूतों का सामना करने वाले परिवार की आपबीती !

अक्टूबर 26, 2018 ओये बांगड़ू

भारत विभिन्न परंपराओं और प्रथाओं वाला देश है. भारत का इतिहास भी बेहद पुराना है और उसी इतिहास में कई ऐसी जगहों का जिक्र है जहाँ लोगों ने पैरानॉर्मल ऐक्टिविटीज को महसूस किया हैं. भारत में कई ऐसी जगहें है जो डरावनी होने के कारण मशहूर हैं. हो सकता है आप भूत प्रेत में विश्वास न रखते हो लेकिन आपने जिंदगी में कभी न कभी ‘डर’ जरुर महसूस किया होगा.

हमारे देश में राजस्थान भी एक ऐसी जगह है जो जितना अपनी खूबसूरती और एतिहासिक जगहों के लिए फेमस है उतना ही वहां मौजूद डरावने किलों और कई डरावनी जगहों के लिए जाना जाता है. अकसर भूत प्रेतों में विश्वास करने वाले लोग  उन से छुटकारा पाने के लिए राजस्थान में हनुमान जी की शरण में जाते हैं.

ये डरावनी घटना भी राजस्थान के एक गांव सामोद की है.जो चोमू  शहर के पास  है .उस दिन मंगलवार था  ओर जिनके साथ ये घटना घटी वो लोग दिल्ली से सवामणी करने समोद मैं हनुमानजी के  मंदिर गए थे. सारा दिन पूजा पाठ ओर भंडारे में बीत गया और काफी देर हो गई और उन्हें वापिस दिल्ली भी आना था. लोग ज्यादा होने के कारण जो सवामणी का प्रसाद बचा उसे गाड़ी की छत पर रख लिया गया और वो परिवार दिल्ली की तरफ रवाना हो गया . ठंड का महीना था और  रात के लगभग 11 बज चुके थे. कोहरा भी बढ़ गया था और हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था .हाईवे पर आने के बाद ड्राइवर ने कहा कि थोड़ी चाय पी लेते है फिर चलते हैं चाय पीने में 20 मिनट लग गए और उसके बाद गाड़ी हाइवे पर बढ़ गई.

दिन भर की थकान के कारण सब लोग ही थके हुए थे तो सब लोग सो गए. गाड़ी के ड्राइवर ने सुबह तक दिल्ली पहुंचने के लिए खाली हाईवे पर तेजी से गाडी चलाई.लेकिन ड्राइवर रात भर गाड़ी घुमाता रहा पर उसे दिल्ली का रास्ता नहीं मिला. सुबह के 4 बज चुके थे कोहरे के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा था. आखिर परेशान हो कर ड्राइवर ने सब को जगाया और बोला कि उसे दिल्ली का रास्ता नहीं दिखाई दे रहा. तब सब लोगो ने गाड़ी को साइड में लगवाया ओर गाड़ी से उतर कर एकदूसरी तरफ से आती गाड़ी को देखकर हाथ का इशारा किया और पूछा ये कौन सी जगह है तब उस गाड़ी वाले ने कहा ये सामोद है , यह सुन कर सबके होश उड़ गए. ड्राइवर तो मानो पागल ही हो गया.

ड्राईवर ने होश सँभालते हुए सबको बताया कि ‘ मै पिछले 4 घंटे से गाड़ी चला रहा हूँ और सारी रात यही घूमता रहा.’ वो इतना डर गया बोला अब मुझसे गाड़ी नही चलेगी सब लोग उसे समझाने लगे उनमे से एक बुजुर्ग महिला थी वो समझ गई दरसल हुआ क्या है . समोद से बाहर निकल कर रास्ते में एक शमशान घाट पड़ता है और वो गलत समय में वहां से निकले जिसके कारण जो भी नकारात्मक ऊर्जा वहाँ  घूम रही थी उसने उन्हें वहा से जाने नही दिया. बुजुर्ग महिला ने सबको गाड़ी में बैठने को कहा और जो प्रशाद का टोकरा गाड़ी की छत पर था उसे उतरवाया  और गाड़ी के अन्दर रख लिया उसके बाद उस महिला ने प्रसाद गाड़ी की खिड़की से बाहर की तरफ फेका, और कहा जिसे खाना है यही बैठकर खाना आगे मत आना. फिर गाड़ी स्पीड से वहा से निकल गई तब जाकर गाड़ी दिन के12 बजे दिल्ली पहुंची. आज भी ये बात जब लोग सुनते हैं तो डर के मारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं इस घटना के बाद दोबारा कभी भी वो ड्राइवर सामोद की तरफ नही गया.

(यह घटना ओएबांगड़ू को महेश जी महाराज ने लिख कर भेजी है. जो अकसर राजस्थान की डरावनी जगहों और पैरानॉर्मल ऐक्टिविटीज का अध्यन करने वहां जाते रहते है)

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