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द गाली गलोच

जनवरी 22, 2017 ओये बांगड़ू

विनोद पन्त बता रहे हैं क्या है गाली गलोच, हर भाषा में है गाली , कहीं प्यार वाली कहीं गुस्से वाली

आपने प्रकाश झा की गंगाजल देखी है, या डेल्ही बेली आमिर खान की , या हाल में बनारस में फिल्माई मोहल्ला अस्सी, गालियों के बीच में कहानी रखी गयी हैं इन फिल्मों में . हालाकि
ये विशुद्ध गाली न होकर एक छद्म गाली है . लेकिन हर भाषा में गालियाँ हैं, कहीं प्यार की गाली तो कहीं तकरार की गाली. गलियों की भी एक अलग दुनिया है, आप एसे बहुत से लोगों से मिले होंगे जो दुःख सुख क्रोध खुशी हर तरह के भावों में सिर्फ गालियाँ देते हैं. मेरी पहचान के कई सरदार सुबह उठकर कहते हैं ‘ओ माई आ वो चाई ला ‘ सोते टाईम ‘ओ माई या वो गुड नाईट ‘ कहने का मतलब है सुबह गाली से शुरुवात और रात गाली से दिन खत्म . बिहारी में कई शब्द प्यार के कहे जाते हैं जैसे चोदू.

अच्छा ये चोदू यूपी में गाली है और पहाड़ में कई जगह चोद का मतलब होता है मूली . जी हाँ खाने वाली मूली . भाषाओँ में कई शब्द जगह बदलने के साथ ही अर्थ भी बदल लेते हैं.

एक अभिनेता को एक इन्टरव्यू में सुना कि चरित्र के हिसाब से एग्रेसन लाने के लिए गाली कारगर रहती हैं . हालाकि गालियां सभ्य समाज में निषिद्ध हैं पर शायद बातचीत में रोचकता लाने या अपनी तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए या यूं कहिये बात में वजन डालने के लिए कुछ प्यार भरी गालियां हर भाषा में मौजूद हैं .
कुमाऊनी भाषा में अक्सर कहा जाता है – तेरि सास् कैं लिजाल जोगि(तेरी सासू को जोगी ले जाए ). तेरि सास् कैं लिजाल चोर(तेरी सासू को चोर ले जाए) .त्यार ख्वार भांग फुलि जौ(भांग का नशा सर चढ़ जाए ) . ये सब गालियां प्यार की गालियां हैं . कुमांऊं में बातें ऐसी हैं जो लगती तो गाली सी हैं पर होती परोक्ष रूप से आशीर्वाद ही हैं .

हमारे गांव की एक आमा जो कि पिताजी की भाभी लगती थी से मजाक में कहा – आजाओ बुढिया . तो अम्मा का जवाब था तुम हो जाना बुढे .तुम्हारा ये बेटा हो जाय बूढा . बस मैं बिदक गया. अम्मा के जाने के बाद अम्मा पर बिगड़ गया . तब पिताजी ने समझाया कि दरअसल अम्मा आशीष ही दे रही थी . बूढा हो जाना का मतलब यहां दीर्घायु होने से था . कुमाऊनी में मैने देखा है कि कई बार लोग कुछ गालीनुमा वाक्यों को ही अपना तकिया कलाम बना लेते हैं जैसे – बज्जर पड़ि जाल(बिजली गिर जाए ), भ्योल पड़ि जौ(खाई में गिर जाए ) ,आग लागि जौ(आग लग जाए ), क्वाड़ झुकि जौ, बज्यूण, जलूण, फुकण आदि .
आज बजार गेयूं बज्यूण महंगाईक ख्वार बज्जर पड़ी भै(आज बाजार गया. महंगाई के सर में बिजली गिर जाए )  . मैल कौ फुको . एक किलो आल लि आयूं पेट में तो आग हालणैं भै(एक किलो आटा लाया बस , पेट में आग डालनी हुई ) . ये वाक्य ऐसी ही गालीनुमा शब्दों से युक्त एक उदाहरण है .
साला या साव एक ऐसी गाली है जो पूरी तरह सामाजिक हो गयी है. ऐसी ही कुछ जगह माज्जद प्रयोग
होती है . इसके अर्थ को शायद प्रयोगकर्ता भी नहीं जानते बस बोलचाल में चलन में हैं . ऐसी ही एक गाली कुमांऊं के एक शहर और उसके आसपास के गांवों में धड़ल्ले से प्रयोग होती है – रांडिच्याला . मतलब पर ना जायें . यार दोस्तों के सम्बोधन में भी और गुस्से में भी लड़ाई में भी तकियाकलाम में भी सब जगह फिट . इसी के आसपास की गाली काणीच्याला(काणी का बेटा ), कुकुरीच्याला(कुत्ते का बच्चा ) भी हैं .
ऐसा नहीं कि ये गालियां सिर्फ कुमांऊनी में हैं . हिन्दी में भी साला या उल्लू का पठ्ठा भूतनी के टाइप की गालियां प्रयोग होती हैं . हरिद्वार के आसपास कुछ ऐसे भी बोला जाता है – ब्राह्मण के लड़के को – ओ बामण के, बारबर को – ओ नाई के, धरमपाल के लड़के को – ओ धरमपाल
के , हालांकि ये गालिया नहीं पर जब प्रयोग होती हैं तो लगती गाली सी हैं . यू पी के कुछ इलाकों में रौब गाठने के अंदाज में – ओ बेटी के बाप या ऐ धी के मुरगे या तेरी दादी की सरकारी नौकरी टाइप निरर्थक गालियां प्रयोग होती हैं . हरयाणवी में ऐ बाबली पूंछ ऐसी ही गाली है .
अब आप लोग भी कमेन्ट में कुछ गालियां दें मेरा मतलब कुछ ऐसी मजेदार गालियां हों तो बतायें.

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