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  • आखिरी शाम

    शाम के कुछ ६ बजे होंगे, सूरज ढले १५ मिनट बीत चुके थे, सिमलगैर मार्किट में युवओं की चहल पहल अभी उस दिन के लिए चरम सीमा पर थी. ये साल का वो समय था जब लो...
    दिसंबर 3, 2017 ओये बांगड़ू
  • किस्सा पहाड़ का आमा की ज़ुबानी

    डाक्टर कुसुम जोशी की ये मार्मिक कहानी उस समय को दर्शाती है जब पहाड़ों में बाल विवाह प्रचलित था डाक्टर कुसुम जोशी नन्ही सी रेबा ,पांच साल की, बच्ची के ल...
    सितंबर 26, 2017 ओये बांगड़ू
  • चाहा उसने

    पहाड़ों की औरतें जो हर दिन कई मुश्किलों से लड़ती हुई अपने हर दिन के काम करती हैं. घर की रीढ़ सी यह औरतें  क्या चाहती हैं यह बता रही है डॉक्टर कुसुम जोशी ...
    अप्रैल 17, 2017 ओये बांगड़ू
  • होली खास – विरासत

    डाक्टर कुसुम जोशी डॉक्टर कुसुम जोशी की कहानियों में पहाड़ की आत्मा नजर आती है, इस कहानी में भी पहाड़ की होली का एहसास है होली के रँग में आते मनहर काका ...
    मार्च 13, 2017 ओये बांगड़ू
  • ऐसा भी होता है

    जिला गाजियाबाद में रहने वाली डा.कुसुम जोशी का जन्म पिथौरागढ़ में हुआ जो जहाँ की खूबसूरती और सुनहरी यादें आज भी उनकी लेखनी में साफ़ नज़र आता है . आज उन्हो...
    जनवरी 4, 2017 ओये बांगड़ू