व्यंग

 
  • ‘ उखड़े खम्भे ‘ – हरिशंकर परसाई

    आजकल  खबरों की दुनिया में एक मुद्दे को दबाने के लिए कई बनावटी मुद्दों को उठा दिया जाता है ताकि मुख्य मुद्दा खुद बा खुद दब जाए .  आइये इस मुद्दे खड़े कर...
    अक्टूबर 13, 2016 ओये बांगड़ू