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कुछ ऐसी है यादव परिवार की छुटकि बहू- अपर्णा यादव

फरवरी 17, 2017 ओये बांगड़ू

उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े राजनीतिक कुनबे की सबसे छुटकि बहू अपर्णा यादव के बारे में विस्तार से बता रहे है गिरीश लोहनी , तो पढिये परिवारवाद के बीच बढ़ते महिला सशक्तिकरण की शुरुआत  को

सपा नेता मुलायम सिंह यादव की छुटकि बहु से आज भारतीय राजनीती में सभी परिचित हैं। नाम है, अपर्णा यादव। आज तक जिस उत्तर प्रदेश के विकास की चाबी डिम्पल भाभी थी उसे विकास की एक और नयी चाबी के रुप में मिली है अपर्णा भाभी। खास बात ये है कि जहां पूरे उत्तर प्रदेश में भैय्या की घरवाली के लिये भौजाई शब्द का प्रयोग शान से होता है वहां यादव परिवार की बहुओं के लिये भौजाई शब्द का प्रयोग वर्जित है। हो भी क्यों ना विदेशों में समाजवाद की शिक्षा लेने वाले सूबे के सबसे बड़े समाजवादी परिवार की बहू के लिये भौजाई शब्द का प्रयोग किसी अपशब्द से कम जो क्या है।

हालांकि बड़कि भौजाई से एकदम अलग तेवर हैं छुटकि भौजाई के। उत्तर प्रदेश राजनीति के मुख्य परिवार की बहू होने के बावजूद राजनीतिक सफर की शुरुआत एक ऐसी सीट से करना जिस पर सपा पिछले पच्चीस साल से कभी न जीती हो, अपर्णा के साहसिक व्यक्तित्व का प्रमाण है। हालांकि फेसबुक पर स्काई डाइविंग के कवर फोटो वाली इस प्रत्याशी को राजनीति में लखनऊ की केन्ट सीट पर सपा ने किसी आसमान से नहीं उतारा है।ना ही किसी चॉपर से लैंडिंग दी है। बस एक साइकिल थमा दी। पेशे से समाज सेविका रही यादव परिवार की इस बहू की समाज सेवा की चर्चा समाजवाद के घोर विरोधी अमेरिका तक में हैं। बड़े घरानों की बहुओं के स्वभाव से इतर अपर्णा पिछले एक साल में आपको केन्ट सीट की धूल फांकती नजर आयी होंगी, बशर्ते आप जमीन से जुड़े रहे हों।

निश्चित ही अपर्णा मुलायम की या अखिलेश की बहु की छवि से अलग स्वयं की छवि गढ़ती नजर आती हैं।एक सशक्त नेत्री के रुप में अपर्णा के तेवर देखते बनते हैं। 26 वर्ष की आयु में परिवार के विभीषण का आरोप झेल चुकी अपर्णा की राजनीतिक जागरुकता और रुचि का अनुमान इस बात भर से लगाया जा सकता है कि केन्द्र की नमामि गंगे योजना पर एनजीटी की जिस रिपोर्ट पर अभी मीडिया का मोलभाव जारी है वो रिपोर्ट अपर्णा के भाषण का हिस्सा रहती है।अन्तराष्ट्रीय सम्बन्धों पर विदेश से पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री प्राप्त करने वाली अपर्णा यादव ऐसी फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती हैं कि एकबार के लिये उत्तर प्रदेश में उनके सारे देवर शर्मा जायें। आवाज में ऐसी मिठास की हाथी वालों की कविता में रस घुल जाए।

पिछले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश का पता नहीं कितना विकास हुआ है लेकिन यादव परिवार में अपर्णा के रुप में महिला सशक्तिकरण, वास्तविक युवा सशक्तिकरण एवं एक शिक्षित समाजवादी नेता का विकास जरुर हुआ है। उत्तर प्रदेश में अखिलेश-राहुल की जोड़ी के क्या मायने हैं भगवान जाने लेकिन देवरानी-जेठानी की ये जोड़ी भारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ नये और सशक्त का इशारा जरुर देती है। वंशवाद के आरोप के साथ ही सही पर महिलाओं की भारतीय राजनीती में भागीदारी के इस शुभ संकेत से कोई इन्कार नहीं कर सकता।

 

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