बांगड़ूनामा

अनसुनी करके – रविंद्रनाथ टैगोर

मई 7, 2018 ओये बांगड़ू

भारत और बांग्लादेश का राष्ट्रगान लिखने वाले महान लेखक और चित्रकार रविंद्रनाथ टैगोर का आज जन्मदिन हैं. टैगोर ने अपनी पहली कविता 8 साल की छोटी आयु में हीं लिख डाली थी. उन्होंने करीब 2,230 गीतों की भी रचना की,गुरुदेव के नाम से जाने जाने वाले टैगोर भारतीय साहित्य के एकमात्र नोबेल पुरस्कार विजेता है. आज गुरुदेव के जन्मदिन पर पढ़िए उनकी यह बेहद खास कविता –

अनसुनी करके तेरी बात
न दे जो कोई तेरा साथ
तो तुही कसकर अपनी कमर
अकेला बढ़ चल आगे रे–
अरे ओ पथिक अभागे रे ।

देखकर तुझे मिलन की बेर
सभी जो लें अपने मुख फेर
न दो बातें भी कोई क रे
सभय हो तेरे आगे रे–
अरे ओ पथिक अभागे रे ।

तो अकेला ही तू जी खोल
सुरीले मन मुरली के बोल
अकेला गा, अकेला सुन ।
अरे ओ पथिक अभागे रे
अकेला ही चल आगे रे ।

जायँ जो तुझे अकेला छोड़
न देखें मुड़कर तेरी ओर
बोझ ले अपना जब बढ़ चले
गहन पथ में तू आगे रे–
अरे ओ पथिक अभागे रे ।

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