गंभीर अड्डा

सिर्फ एक दिन रेप फ्री इण्डिया ?

दिसंबर 18, 2017 कमल पंत

साल के 365 में से एक दिन बलात्कार मुक्त भारत को समर्पित कर देने से क्या देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराध कम हो जायेंगे?

16 दिसंबर के दिन दिल्ली में दो दर्जन से ज्यादा प्रदर्शन, धरने, भूख हड़ताल आदि आयोजित हुए। अब यह एक परिपाटी बन गयी है कि 16 दिसम्बर के दिन बलात्कार विरोधी और नारीमुक्ती समर्थित रैलियां आयोजित की जाएं। इस एक दिन सभी राजनैतिक और गैर राजनैतिक दल जाग जाते हैं और बलात्कार मुक्त भारत की मांग लेकर सड़कों पर उतर आते हैं।

निर्भया/दामिनी को याद करते हुए दिल्ली और दिल्ली से बाहर अलग अलग प्रदर्शन हुए। सबकी अपनी अलग सोच, अलग विचारधारा। एक तरफ वामदल जहां लड़कियों से “पिंजड़ा तोड़ने” की बात करते हैं तो दूसरी तरफ रेप फ्री इंडिया की मांग लिए धरने पर बैठे लोग असुरक्षित दिल्ली में लड़कियों के बाहर ना निकलने का समर्थन करते हैं।

वाम दलों से जुडी मनीषा कहती हैं कि लड़कियां जब तक खुद से आगे नहीं आएंगी, तब तक समाज पूरी आज़ादी और इज्जत नहीं देगा। दूसरी तरफ एक साइंटिस्ट विभा कहती हैं कि पहले दिल्ली सुरक्षित हो, उसके बाद लड़कियां आज़ाद होकर बाहर घूमेंगी।

लेकिन एक दिन के संघर्ष से क्या बलात्कार मुक्त भारत का सपना सच होगा?

निर्भया बलात्कार मामले को तीन साल पूरे हो गए। हर साल 16 दिसम्बर को बड़े बड़े वादे हुए, अपराध की गंभीरता पर विचार हुए, बलात्कार मुक्त भारत बनाने के लिए कोशिशें की गयी। लेकिन उसके बाद भी बलात्कार के मामलों में बढोत्तरी देखने को मिली है। एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली आधिकारिक रूप से रेप केपिटल तक घोषित हो चुकी है, जिसका कारण है बलात्कार के मामलों का बढ़ना। 2013 में जहां 1441 बलात्कार और छेड़छाड़ के मामले दर्ज किये गए, वहीं 2014 में 1813 मामले दर्ज हुए।

लेकिन निर्भया मामले के बाद के दो सालों में बलात्कार मामलों में बढ़ोत्तरी ने यह तो साफ़ कर दिया है कि प्रदर्शन, धरने और भूख हड़तालों से इस तरह के मामले कम होने वाले नहीं हैं। इसके लिए ज़मीनी पहल करना बेहद ज़रूरी है।

16 दिसम्बर क्रांति मंच से जुड़े विकास बताते हैं कि निर्भया के बाद के वर्षों में जो मामले बढ़ें हैं, ये वो मामले हैं जिनकी शिकायत दर्ज हई है। उससे पहले पुलिस शिकायत तक दर्ज करने में आनाकानी करती थी। यह एक सफलता मानी जा सकती है कि निर्भया मामले के बाद लोग ऐसे मामलों को दबाने के बदले अपराधियों के खीलाफ खुलकर सामने आते हैं।

मगर इसके आगे क्या सिर्फ प्रदर्शन और धरनों के ज़रिये ही आंदोलन जारी रखना चाहिए?

इस सवाल पर 16 दिसम्बर क्रांति से जुड़े चन्दन बताते हैं कि जन जागरूकता के दूसरे पहलुओं पर भी वह विचार कर रहे हैं। शीघ्र ही इसके लिए किये जा रहे प्रयास लोगों के सामने आएंगे।

प्रदर्शन, धरने के अलावा अब बलात्कार मुक्त भारत के लिए जन जागरूकता बहुत ज़रूरी है और उसके लिए स्कूल कॉलेजों में जाकर बच्चों और किशोरों के मन में ऐसे अपराधों के प्रति घृणा का भाव लाना बेहद आवश्यक है। कल का भविष्य जब बलात्कार मुक्त भारत का सपना देखेगा तो वह धरने, प्रदर्शन पर निर्भर ना होकर धरातल से लड़ाई लड़ेगा और नारी अपराध के प्रति सजग होगा।

(यह पूर्व में डीएनए में प्रकाशित एक खबर है जो आज 2017 के समाज में भी पूरी तरह फिट बैठती है )

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