गंभीर अड्डा

सरकार क्या है?

अक्टूबर 29, 2018 ओये बांगड़ू

सांसद विधायक से मिलकर बनी सरकार ही क्या सरकार है?

नही, सरकारी महकमे के हर विभाग का हर आदमी जो भारत सरकार की उस आमदनी से तनख्वाह पा रहा है जो उसे आम आदमी के दिये टेक्स से मिल रही है। वह सब सरकार है।

आप जब कहीं आम आदमी के अधिकार और सरकार के अधिकार की विवेचना करने लगते हैं तो आपको एक सरकारी चपरासी को भी एक सरकार के रूप में देखना होगा।

ये सवाल अचानक आया क्यों? क्योंकि जम्मू कश्मीर में शहीद हुए फौजियों को लेकर आम आदमी क्यों उनके अधिकार पर चर्चा नही कर रहा इससे सबंधित मेम्स और व्हाट्सअप मेसेजस, सोशल मीडिया विंग फैलाने लग गई है।

चुनाव हैं, इसलिए माहौल बनाना जरूरी है। इसलिए देशभर में जहां जहां फौजी हैं वहां वहां उनको और आम नागरिकों के अधिकारों को एक करके देखने का सोशल मीडिया का फर्जी खेल शुरू हो जाएगा। फायदा किसी को भी हो। मगर हमारा काम है सही परिभाषा को जनता तक पहुंचाना।

सरकारी तनखा पा रहा और सरकार के लिए काम कर रहा हर व्यक्ति उस समय सरकार ही होता है जब वह ऑन ड्यूटी होता है। वह सरकार को जनता के सामने रिप्रजेंट कर रहा होता है। अब सरकार को रिप्रजेंट करने वाला आदमी आम आदमी तो हो ही नही सकता। क्योंकि प्रशासन और आम आदमी दो अलग अलग लोग हैं न। प्रशासन में बैठा व्यक्ति ये कहे कि देखिए भाई मैं भी तुम्हारी तरह आम आदमी ही हूँ। तो इसका मतलब वह या तो अपनी ड्यूटी खत्म कर चुका है। या सरकार की तरफ से उसे फिलहाल कोई जवाब जनता को देने के लिए नही मिल रहा.

कश्मीर  पत्थरबाजी में अगर फौजी शहीद होते हैं तो यह सरकारी रिप्रजेंटर का खून माना जायेगा वरना सरकार ने, सरकार के काम मे बाधा डालने, सरकारी आदमी को परेशान करने, सरकारी मुलाजिम को काम न करने देने के लिए अलग अलग कानून बनाये हुए हैं .

सरकार का आदमी जब काम कर रहा है तो वह सरकारी ताकत लिए हुए होता है।

सरकारी ताकत मतलब वह नियम जो उसे आम जनता से अलग करते हैं। उसे परेशान किया जाएगा तो सबंधित आदमी जेल जाएगा। उसके काम मे बाधा नही पहुंचाई जा सकती उसकी भी सजा है। इन अतिरिक्त ताकतों के साथ वह सरकारी आदमी बनता है। सरकार का वह नुमाईंदा जो जनता के बीच सरकार को रिप्रजेंट कर रहा है.

सोशल मीडिया विंग इस तरह के मेमस बना कर सवाल करने लगी है,ताकि लोग भड़कें

अगर ऐसे में कोई सोशल मीडिया भड़काऊ संस्था ये मैसेज फैलाने की कोशिश करे कि आखिर क्यों आम जन के अधिकार उस सरकारी आदमी के नही हुए। क्यों उसके लिए मानवाधिकार आयोग नही गए, क्यों संस्थाएं सरकारी आदमी के हित मे नही बोल रही

वगेरह वगेरह

तो उसे जाकर ये पोस्ट पढ़ाइये और उसे बताइये कि कोई भी गैरसरकारी संस्था सरकार द्वारा पीड़ित आदमी के हितों की रक्षा के लिए काम करती है। जो खुद सरकार हो, उनके हित की रक्षा के लिए उनके पास उनकी अपनी संस्थाएं हैं। गैरसरकारी संस्थाओं का वहां इंटरफेयर न तो लॉजिकल है और न ही किसी भी एंगल से जायज है।

ऐसे भड़काऊ मेसेज फैलाने वाले लोगों से बचकर रहें

अपनी सरकार और अपनी आम जनता की सही और तथ्यपरक समझ रखें

बाकी हमें पैसे देने का मन हो तो कमेंट करें.

 

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