ओए न्यूज़

सब ‘टल्ली’ हैं

अक्टूबर 7, 2016 ओये बांगड़ू

हमारे एक साथी जैकी मिश्रा दिल्ली में पत्रकार हैं। रोज सुबह शाम पत्रकारिता करते समय उनका नशे में टल्ली कई लोगों से औचक सामना हो ही जाता है। वैसे टल्ली तो वो भी हो जाते हैं कभी कभी और बहक भी जाते हैं लेकिन आज उन्होने अलग-अलग तरह के नशे में टल्ली लोगों के दिलचस्प किस्से हमसे शेयर किए हैं-

देश नशे के आलम में मदमस्त है, कुछ दिनों पहले किक्रेट का नशा लोगों के सिर चढ़कर बलबला रहा था। सुन मेरे बंधु रे, सुन मेरे मितवा, सुनो हीरालाल रे, ये नशा भी अजब चीज है, जिसे चढ़ जाए तो उतारा लिए बिना उतरता ही नहीं। शराबी में अमिताभ बच्चन पर फिल्माया और किशोर कुमार का गाया गीत कितना सटीक है इसका अंदाजा है आपको ? अगर नहीं है तो एक बार जरूर सुनिए ’‘नशा शराब में होता तो नाचती बोतल, नशे में कौन नहीं है मुझे बताओ जरा‘‘।

आजकल तो दो तरह के नशे और प्रचलन में हैं- एक राष्ट्रभक्ति और देशभक्ति का और दूसरा सर्जिकल स्ट्राइक का!

अब कोई इन कथित देशभक्तों को ये बताए कि सिर्फ पाकिस्तान को गाली दे देने का मतलब ही राष्ट्रभक्ति नहीं है।

और सर्जिकल स्ट्राइक का नशा तो सरकार से लेकर आम लोगों पर भी चढ़ा हुआ है, सरकार पर स्ट्राइक के बहाने से अपनी राजनितिक रोटियां सेकने के आरोप लग रहे हैं तो वहीं कुछ लोग सर्जिकल स्ट्राइक पर अपनी खोखली राष्ट्रभक्ति साबित करने पर तुले हुए हैं।

सर्जिकल स्ट्राइक से याद आया कि आज सुबह ही हमारे एक मित्र मुंगेरी का फ़ोन आया। मुंगेरी ने बताया कि रात को उसकी पत्नी ने अचानक उसका मोबाइल चेक कर लिया। मुंगेरी ने इसे सर्जिकल स्ट्राइक बता कर पत्नी के खिलाफ मोर्चा निकालने की धमकी दे डाली। मुंगेरी ने बताया कि वो रात को आराम से सो रहा था, कि अचानक करीब रात के 1 बजे अपने बगल में कोई रोशनी का एहसास हुआ। जब उसने उठ कर देखा तो पाया कि उसकी पत्नी उसके मोबाइल का औचक निरीक्षण रही है।

मुंगेरी ने इस बात का विरोध किया, लेकिन कोई भी पुरुष उसके साथ खड़ा नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि सभी को अपनी अपनी पत्नियों का खौफ था।

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मेरा एक और पड़ोसी बल्लू भी नशे में चूर है, मदहोश है। जब से सगाई हुई तो उस पर मोबाईल का नशा छाया हुआ था, डेढ़ घंटे, दो घंटे, तीन तीन घंटे तक मंगेतर से बतियाता रहता था, जाने क्या-क्या बातें करता होगा, सोचते हुए मैंने एक दिन पूछ ही लिया। लल्लू प्रसाद ने अपनी खींसे निपोरते हुए बताया अरे भईया, अभी तो सगाई हुई है, शादी में कुछ महीने तो लगेंगे ही। फिर आजकल किसी का क्या भरोसा, वेलेंटाईन डे तो साल में एकाध दिन ही मनता है, पर उसका नशा पूरे युवाओं में आठों पहर, चौबीसों घंटे, साल भर चढ़ा रहता है, कहीं दूसरे का नशा उस पर चढ़ गया तो मैं तो गया न काम से, इसलिए अपना नशा चढ़ाने की कोशिश करता हूं उस पर।

एक और पड़ोसी मुंगेरी को रोज टल्ली होने का नशा है, शाम को पीना शुरू करता है तो तीन घंटे से पहले उसके पैग खत्म नहीं होते। होली हो, दीवाली या कोई राष्ट्रीय त्योहार, बिन पिए तो उसका दिन शुरू ही नहीं होता। एक दिन मिल गया हूजूरे आला, पास की नाली में गिरे हुए, एक सुअर की पूंछ पकड़कर सहलाते हुए कह रहा था अरे पप्पू की मां, मुझे तो पता ही नहीं था कि तुम चोटी भी करती हो, ये क्या अभी तक इसमें खिजाब लगा रखा है, पूरा हाथ ही खराब हो गया। मैंने उसे फटकारते हुए कहा ‘ अरे नामाकूल, इतना ही नशा करने का शौक है तो डूब मर। उसने जवाब दिया ‘अरे भाई, कैसे डूब मरूं, नदी में डूबने गया तो वहां सिर्फ रेत ही रेत है, पानी तो करोड़पतियों को बेच दिया है सरकार ने, मोहल्ले के कुएं को पाट दिया है, तालाब में सिर्फ कीचड़ बचा है, जलकर के दाम म्यूनिस्पिल ने बढ़ा दिए हैं और सरकारी हैंडपंप से भी पानी नईं निकल रहा है, अब डूबने के लिए पानी बचा ई नई, तो ठर्रा पीकर दिल बहलाता हूं।

उसकी बातों से मेरा सिर बिना नशा किए ही चकराने लगा था। मैं सोच में पड़ गया कि ये बात तो सही कह रहा है कि दूध और पानी पीने के लिए मिले न मिले, ठर्रा हर गली, कूचे, मजरेटोले में मौजूद है। वैसे भी लोग अपने अपने नशे में खोए हुए हैं, सरकार के कारिंदे भ्रष्टाचार के नशे में मदमस्त हैं, उद्योगपति राजाओं, राडियाओं, कलमाड़ियों को पाकर मदहोश है, जनता के सामने लोटासन करके वोट पाए, अधिकार प्राप्त नेताओं को घोटाला करने का नशा है, मीडिया सनसनी के नशे में सराबोर है तो बालीवुड में आईटम सांग और कम कपड़े पहनने का नशा छाया हुआ है।

देखना अभी बाकी है कि राजनीतिक सरपरस्ती के नशे में चूर, लोकतंत्र को अपनी जेब में समझने वाले भ्रष्टों की मदहोशी टूट पाएगी ?

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