ओए न्यूज़

गालियां देंगे अब यह वाले नोट

नवंबर 10, 2016 ओये बांगड़ू

हरिद्वारी पंडित विनोद पन्त 1000 , 500 के नोट बंद होने से सदमे में  हैं . बड़ी मुश्किल  से 501 की दक्षिणा आने की संभावना बनी थी. लेकिन अब बैन के बाद वो भी बंद हो गयी. पूरे घर में ढूँढने के बाद भी उन्हें एक भी 500 का नोट  नहीं  मिला. तो उन्होंने नोटों की व्यथा लिख डाली और उसका अमीर गरीब से अनोखा रिश्ता भी बयां कर दिया.

आज रहीमदास जी जीवित होते तो शायद कुछ यूं कहते –

“रहिमन देख बड़ेन को लघु न दीजिये डार

जहां काम आवे चिल्हर कहा करे हजार”

अचानक बड़े नोट बन्द हो गये तो अमीरों के आफत आ गई. वैसे तो आफत अमीरों को भी नहीं हुई. अमीरों की भी कई प्रजातियां हैं हिन्दुस्तान में जैसे – अमीर,अतिअमीर,महाअमीर,पिछड़ा अमीर, अति पिछड़ा अमीर ,अब आप सोच रहे होंगे कि पिछड़ा और अति पिछड़ा अमीर कौन हैं ?

पिछड़े अमीर सरकारी नौकरी वाले हैं तथा अति पिछड़े अमीर सरकारी अफसर टाइप लोग जिनके तनख्वाह का सरकार को पता होता है . सरकार टैक्स काटकर बाकि छोड़ देती है . इन अति पिछड़े लोगो में कुछ समझदार लोग उपरी कमाई कर अपनी गरीबी से संघर्ष कर ही लेते हैं . बाकि के अमीर महाअमीर अति अमीरों को तो आप जानते ही होंगे .

साधारण आदमी आज बड़े नोट के शहीद होने पर खुश है . हालांकि वो अपने दो चार बड़े नोटों को लेकर परेशान है. पर उसे खुशी इस बात की है कि महाअमीरों का नुकसान हो रहा है . इतिहास गवाह है गरीब अमीर का कुछ नहीं बिगाड़ पाया पर आज इस सरकारी कहर को अमीर पर पड़ते देख खुश है . हजार का नोट गरीब के पास कभी भी नहीं आ पाया . अगर आया भी तो उसकी जेब में टिक नहीं पाया . वैसे भी बड़े नोट जेब में कहां टिकते हैं . ये तो तिजोरी में ही टिकते हैं . गरीब के पास ना तो तिजोरी होगी ना ही नोट . गरीब आज हजार के नोट के आगे ये फिल्मी डायलाग मार रहा है – जा तू मेरा न हो सका तो आज से अमीरों का भी नहीं रहेगा .

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चर्चा तो ये भी है कि जिस दिन हजार का नोट छपा तो सबसे बड़ा नोट होने के दम्भ में हजार नोट अपने मालिक कुबेर जी को बिना प्रणाम किये ही बाजार में कूद गया – तब कुबेर जी ने हजार के नोट को श्राप दिया. जा एक दिन तू बारह रुपे किलो की रद्दी हो जाएगा . शाप से भयभीत हजार के नोट ने कुबेर जी के चरण पकड़ लिए और क्षमा मागने लगा . कुबेर जी को दया आ गयी और बोले मेरा श्राप निरर्थक तो नहीं होगा पर जब तक तू चलायमान होगा हर किसी की पहली पसन्द होगा . तूझे जीवन में इधर उधर भटकना नहीं पड़ेगा तू हमेशा तिजोरी में आराम करेगा . तेरे साथ तेरा अनुज पांच सौ का नोट भी बन्द होगा . बाद में तुम दो हजार के नोट के रूप में पुनर्जन्म लोगे तथा पुन: अमीरों की तिजोरी में उच्च स्थान ग्रहण करोगे . गरीब से तुम्हारी दूरी यथावत रहेगीव. ऐसा कहकर कुबेर जी अन्तर्ध्यान हो गये . आज कुबेर जी का श्राप सच हो गया . चंडू नामक पुराण में ये वर्णन भी मिलता है कि – राजन साहब दूसरा कार्यकाल चाहते थे . पर उन्हें नहीं मिला . सरकार पर वश तो चला नहीं जाते-जाते अपने हस्ताक्षर वाले बड़े नोटों को भस्म होने का श्राप दे गये . शायद गालियां देंगे अब यह वाले नोट भी.

अमीरों सरकारों और राजनीतिक दलों के अपने-अपने तर्क हो सकते हैं पर मेरी इज्जत का फलूदा कर गये ये बड़े नोट . मैने भी फालतू के कागजों में हजार पांच सौ के नोटों का सर्च अभियान चलाया तो पत्नी ताना मारती हुई बोली – अपनी औकात में रहकर सर्च करो . तुम एक लेखक हो . शकल देखी है आइने में ? हजार का नोट कौन देगा तुम्हें . मैं सोच रहा था हे भगवान कहीं एक भी नोट मिल जाये तो बैंक की लाइन में अमीरों के कन्धे से कन्धा मिलाने का सुख प्राप्त हो . पर नोट होता तो मिलता . ऐसे में मेरी पगड़ी की इज्जत मेरी बिटिया ने रख ली . गुल्लक फोड़ कर एक चमचमाता हजार का नोट मेरे हाथ में रखा जो उसको उसके मामा देकर गये थे . मैं भी तोप की माफिक नोट को कन्धे पर रखकर बैंक की तरफ चल दिया . पर यह क्या ? मेरा ना तो बैंक में एकाउन्ट था . ना आधार कार्ड . और तो और वोटर आई डी में मेरी जो फोटो लगी थी उसमे तो मैं भी अपने आप को नहीं पहचान पा रहा था . मृतप्राय हजार के नोट को वापस लेकर घर की तरफ चला आया . हजार का नोट अगर बोल पाता तो अब तक मुझे छत्तीस गालियां दे चुका होता मेरी गरीबी पर .

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