यंगिस्तान

रिस्की डोयाट -घुम्मकड़ी की कहानी 

सितंबर 26, 2018 ओये बांगड़ू

करीब दो महीने पहले उत्तराखंड के अखंड घुम्मक्कड लखनऊ निवासी डोई पांडे का मोबाईल में संदेश आया,’बाईकिंग बहुत हो गयी अब ट्रेकिंग’.

डोई जी का छोटा सा परिचय लेख के शुरुवात में ही देना सही रहेगा ताकि जो पाठक डोई को न जानते हैं वह भी जान जाएँ, डोई का असली नाम डोई तो बिलकुल नहीं है, पहाड़ों में यूं ही बेमतलब इधर से उधर घुमते रहने वाले को अक्सर इस उपाधी से नवाजा जाता है,डोई से पहले जिसे भी इस उपाधी से नवाजा गया होगा उसने बतौर गाली इस शब्द से ही दूरी बना ली, मगर डोई ने इस शब्द के मायने ही बदल कर रख दिए,क्योंकि ड़ोयाट (घूमना) सिर्फ यूं ही घूमना नही होता,इंसान न चाहते हुए भी खुद ब खुद अनुभवों से सीखता चला जाता है,तो डोई जी अपने डोयाटो में इतना कुछ जान गये कि बाकी लोगों को उनसे कोफ़्त होना जायज सी बात है.

डोई जी पहाड़ों में हर पहाडी पर अपनी अपाचे (मोटरबाईक) के साथ चढ़ चुके हैं,अभी पिछले साल ही नेपाल भूटान की यात्रा करके (बाईक में ) उन्होंने अपनी सबसे लम्बी यात्रा भी पूरी कर ली, उनकी इन्ही यात्राओं की बदौलत उन्हें अपार ज्ञान की प्राप्ती हुई,बचपन से लखनऊ में रहे इस बच्चे ने पहाड़ के बारे में इतना कुछ जान लिया जो पहाड़ में पले बड़े मेरे जैसे किसी बच्चे के लिए कभी इंटरेस्ट की वस्तु रहा ही नहीं, डोई की बदौलत मेरा पहाड़ की हर चीज में इंटरेस्ट बड़ने लगा. मुझे पहाडी गानों से लेकर पहाडी खाने तक में एक अनोखी बात नजर आने लगी. और फिर स्क्रीन पर प्रकट हुए रिस्की ..
अब रिस्की का सुन लो,तो डोई ने जो यात्राएं की वह सिर्फ यात्राएं नही थी बल्कि उन यात्राओं में उसने बहुत सारे मित्र भी बनाये, उसके अधिकतर मित्र उसी की तरह अनोखे और पहाड़ प्रेमी निकले.

रिस्की भी उन्ही पहाड़ प्रेमियों में एक,एक एसा अदभुद लड़का जिसकी परवरिश तो दिल्ली की प्रदूषित आबो हवा में हुई लेकिन उसके शरीर में पहाड़ की शुद्ध हवा लगातार घुसती चली गयी और परिणाम स्वरूप एक एसा लडका बाहर आया जिसके मन मस्तिष्क में सिर्फ पहाड़ ही पहाड़ था,उसने किताबो और इन्टरनेट के जरिये पहाड़ की हर उस चीज को जान लिया जो लिखित रूप से कहीं न कहीं उपलब्ध थी (ये पहाडी हवा वही है ) साथ ही हर उस चीज को देखने का रिस्क भी उसने हर कदम में उठाया,कभी पल्सर लेकर पहाड़ों में चढ़ गया तो कभी पहाड़ प्रेमियों के साथ पहाड़ बचाने निकल पड़ा.उसे पहाडी एन्साक्लोपीडिया कहने में  मुझे कोइ गुरेज नहीं क्योंकि पहाड़ (खासकर कुमाऊँ) के बारे में उसे जितना पता है ,इस उम्र के अन्य लोगों को इतना पता करने में दोगुनी उम्र लगेगी,शब्दों से लेकर इतिहास तक,सभी चीजें उसके मस्तिष्क में छपी हुई हैं.

और तीसरा किरदार मैं जिसका इंटरेस्ट इन दोनों की वजह से पहाड़ में आया है वरना मुझे सिर्फ पिथोरागढ़ से प्यार था.हम तीनों इस ट्रेकिंग यात्रा में संगी साथी बने.

अब आता हूँ शुरू की बात पर डोई ने ट्रेकिंग का प्रस्ताव रखा, जो जंगल जंगल गाँव गाँव होते हुए होने वाली है,पात्रता के लिए हम तीनों के नाम तो थे ही साथ में अन्य घुम्मकड लोगों को भी इनविटेशन भेजा गया था,उद्देश्य ये था कि सभी घुमक्कड़ एक साथ घूमने चलें,ज्ञान का आदान प्रदान हो पहाड़ को सभी जानें सभी समझें.

ट्रेकिंग कैसे शुरू हुई ? कौन कौन आये ? क्या क्या हुआ ? जाननें के लिए पढ़ते रहें……
जारी रहेगी श्रंखला
रिस्की डोयाट _घुम्म्कडी की कहानी

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