ओए न्यूज़

अपडेट में देरी …कहानी सुनो मेरी

नवंबर 10, 2016 ओये बांगड़ू

कल एक भी अपडेट ना आने से हेड बांगड़ू नाराज़ थे इसलिए उन्होंने बांगड़ू मीटिंग बुलाई तो बांगड़ूओं ने बताया की कोई अपने गद्दे फाड़ रहा था ,तो कोई घर के पीछे जमीन खोदने में था. कुछ ने तो  घर का पूरा फर्नीचर ही तोड़ डाला, कमबख्त ‘काले धन’ को उजियारे से  बचाने के जुगाड़ में ही पूरा दिन सभी बांगड़ू  व्यस्त से भी ज्यादा वाला व्यस्त रहे .

कल बांगडू कहाँ था ? कल  ओएबांगडू में कोइ भी अपडेट क्यों नहीं लगाई गयी ?

-अरे काला धन ठिकाने लगाना था इसलिए ओएबांगडू के सभी साथी अपने अपने घरों में छिपा काला धन जमा कर रहे थे. किसी की तकिया से 500 के दो नोट निकले तो किसी की पुरानी जींस से धुला हुआ हजार का नोट. हमारे एक बांगडू जैकी की लैट्रीन से 2004 में गायब हुआ 500 का नोट मिला जो उस थर्टी फर्स्ट को खो गया था जब हास्टल में पढने वाले जैकी की मंथली पेंशन(घर से पैसे ) आयी थी . बेचारे ने इस एक नोट के कारण पूरा महीना बँगला साहेब गुरूद्वारे में खाना खाया था .

खैर बीती रोज हमारे बांगडू लोग अपने अपने नोट ठिकाने लगा रहे थे. कैसे लगा रहे थे ये नीचे पढ़ लो.

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बांगडू 1 – ‘मम्मी ने फ्रिज के ऊपर बिछे अखबार के नीचे से हजार के चार नोट निकाले और बोली पहले इन्हें बदल ला फटाफट फिर बाकि  के देती हूँ. मेरे हाथ पाँव सूख गए ये ‘बाकी के बाद में देती हूँ’ सुनकर. जब घर आयी तो मम्मी ने डोर मेट , चीनी के डब्बे, चावल के कनस्तर , अलमारी के नीचे जूते वाले ड्रार से  हजार के 25 और  500 के 50  नोट निकाले . ठिकाने लगाते लगाते घर में पेट्रोल के दो ड्रम भर गए. कल से मम्मी पापा को अब पेट्रोल बेचने वाली है.

बांगडू 2 – अकेला रहता हूँ जनाब , इसलिए कभी नहीं सोचा था कि मै भी काला धन रखता होऊंगा. सुबह एक दस का नोट ढूंढते हुए  पुराने पर्स से दो पांच सौ के नोट निकल आये. कालेज टाईम में मैंने बुरे वख्त में काम आने के लिए पर्स की इनर पाकेट में रखे थे. उसके बाद कितने ही बुरे वख्त आये मगर इन नोटों की याद नहीं आयी. जोश में दो तीन पुरानी चीजें जैसे पेनबाक्स, डायरी देखी तो याद आया कि मैंने बुरे वख्त के लिए यहाँ भी हजार और पांच सौ के नोट रखे थे. ना जाने कितने बुरे वख्त भंडारे में लाइन लगाकर गुजारे लेकिन इन कमबख्त बुरे वख्त की अमानत की याद ना आयी .आज इन नोटों के कारण बुरा वख्त आ गया. सफल से घर भर के सब्जी ले आया हूँ बाकी अब मदर डेयरी में दे आऊँगा .

बांगडू 3 -मोहतरमा को बायफ्रेंड का पुराना एटीम मिला जो खाली था , लेकिन एटीम कवर में दो हजार रूपये मिले. जिस पर आज तक इनकी नजर नहीं पड़ी. सलाम है एसे बायफ्रेंड पर जो गर्लफ्रेंड को सब कुछ दे दे मगर गर्लफ्रेंड फिर भी पता ना कर पाए कि माल आखिर छिपाया कहाँ है. खैर मोहतरमा ने रूपये ठिकाने लगाने के लिए बाय्फ्रेंड को हास्पिटल में एडमिट करवा दिया है. आगे जो महंगा होगा वह इलाज करेंगे.

बांगडू 4 – इनकी कहानी ज़रा अलग है , ब्यूटी पार्लर में जाकर ये अठन्नी चवन्नी के अलावा बाकी सिक्के कैश करा लाती हैं मतलब 450 रूपये के सिक्के के बदले 500 का एक नोट और सिक्के इन्हें मिलते हैं पति की जेब से . जो सिगरेट पान बीडी में बच जाते हैं वो सिक्के. तो मैडम ने एसे बचा बचा कर बीस हजार रूपये जमा किये दो साल में पति से छिपाकर. सारी कमाई आज सबके सामने आ गयी . फिलहाल इन्होने कल भिखारियों से कान्टेक्ट कर लिया है नोट को वापस सिक्कों में बदलने के लिए .

वैसे अभी हमारे बांगडू लोग अपने अपने घर से काला धन निकाल रहे हैं. लेकिन अपडेट करते रहेंगे . क्योंकि अब अधिकतर काला धन ठिकाने लग चूका है .

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