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दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की हकीकत

जनवरी 12, 2019 ओये बांगड़ू

देश की राजधानी दिल्ली में भले ही सरकार मुफ्त इलाज के दावे कर रही हो लेकिन इसमे कितनी सच्चाई है ये दिल्ली के दो बड़े सरकारी अस्पतालों जीबी पंत और लोकनायक जयप्रकाशनारायण में एक साधारण सी विजिट करके पता चल जाती है ।

इस खबर की शुरुवात में ही बता दें कि हमने हॉस्पिटल हेड या दिल्ली के स्वास्थ मंत्री से इस बाबत अभी तक बात नही की। क्योंकि हम मरीजों से बाते करने में व्यस्त थे।

उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा से इलाज कराने आये एक मरीज को दिल की परेशानी है, वह जीबी पन्त हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती होते हैं। उन्हें टेस्ट के लिए सुबह सात बजे बुलाया जाता है। सरकारी अस्पताल में अधिकतर चीजें फ्री में मिल जाती हैं, या यूं कहें कि कुछ दवाएं छोड़कर बेसिक सामान उपलब्ध होता है।

मगर सुबह सुबह सात बजे एक हाथ से लिखी पर्ची में लिखा नोट लैब का गार्ड दिखाता है, जिसमे कुछ सामान लिखा हुआ है। सर्जिकल ग्लब्स, मेडिकल ग्लब्स जैसी सामान्य चीजें, जो एक सरकारी क्लिनिक तक मे फ्री उपलब्ध होती हैं , सिरिंज नीडल जैसी बिल्कुल बेसिक चीजें मरीज से बाहर से मंगवाई जाती हैं। ऐसे में महीनों के इंतज़ार के बाद इलाज का नंबर आने वाले मरीज सामान लाने को मजबूर होते है.

एक इतना बड़ा सरकारी अस्पताल क्या अपने स्टॉक में सर्जिकल ग्लब्स, नीडल, जैसी सामान्य चीजें नही रखता होगा?

लगभग यही हाल लोकनायक जयप्रकाशनारायण में भी देखने को मिला। मरीजों से सामान बाहर से मंगवाने का रिवाज।

क्या इतने बड़े हॉस्पिटल इतनी छोटी सी चीज हास्पिटल में नही रखते होंगे।

अगर मरीजों से सामान मंगवाना ही है तो कच्चे पर्चे में क्यों लिखा गया है, पक्के पर्चे में क्यों नही लिख दिया कि मरीज अपने साथ सारा सामान बाहर से लेकर आएं इस हॉस्पिटल में सिर्फ डाक्टर मिलता है.

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