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रामदेव से पहले स्वदेसी अलापने वाले राजीव दीक्षित का सच

नवंबर 30, 2018 ओये बांगड़ू

आज ही के दिन जन्म और मरण का वरण करने वाले सो कॉल्ड स्वदेशी के जनक राजीव दीक्षित ने कई लोगों के दिमाग पर स्वदेशी के नाम पर राज किया। वह कहते हैं न देशभक्ति के नाम पर बेवकूफ बनाया बस वही काम किया, कम से कम लेखक के निजी विचार तो यही हैं।

ये महाशय का पहला वीडियो जो 2004 या 05 में देखा था वह नेहरू के सिगरेट पीने और उसकी एय्याशियों को लेकर था, मैं पूछ पूछ कर थक गया कि ये तो बस स्पीच दी प्रूफ कहाँ हैं तो वीडियो दिखाने वाले भैया बोले भाई इतना ही है।

फिर एक मित्र ने अमिताभ वाला वीडियो दिखाया अमिताभ नही था उस वीडियो में , राजीव दीक्षित कह रहा था कि अमिताभ बच्चन की आंतें पेप्सी पीने से सड़ गई हैं और ये बात खुद अमिताभ ने उसे बताई है, इसलिए कुली फ़िल्म के बाद से अब तक उसने पेप्सी कोला का प्रचार नही किया, उसी स्लो इंटरनेट वाले डेस्कटॉप में मैने अमिताभ की पेप्सी के एड वाली फ़ोटो दिखा दी तो मित्र की राजीव भक्ति कुछ कम हुई.

वैसे राजीव दीक्षित का रामदेव कनेक्शन भी है।ये बन्दा कहता था कि बहुत सारे नेता फ़िल्म स्टार इसके चेले चपाटे हैं। मगर कोई भी इसका चेला तो दूर मिलने की बात से तक इनकार करते थे.

हां रामदेव जरूर राजीव दीक्षित के साथ आस्था चैनल में आते थे, सारे राजीव भक्त कहते हैं कि स्वदेशी का कॉन्सेप्ट राजीव दीक्षित का था जिसे रामदेव ने चोर लिया । अब सच क्या ये तो रामदेव जाने। बाकी 2010 में बन्दा आज ही के दिन मर गया। गाड़ी में था दिल का दौरा पड़ा हॉस्पिटल में भर्ती कराया, स्वदेशी और आयुर्वेद के कारण एलोपैथी दवा खाने से इनकार करने लगा। बहुत इंकार किया और आखिरकार मर गया.

राजीव भक्त कहते हैं कि बॉडी नीली थी जरूर रामदेव ने मारा होगा, क्योंकि रामदेव राजीव दीक्षित के रहते कभी पॉपुलर नही होता।

बाकी सच क्या है ये तो नही पता मगर राजीव दीक्षित के भक्त आज भी ऊट पटांग लॉजिक लेकर आते हैं। अब आदमी जान से हाथ गंवाने को बैठा है एलोपैथी से जान बच सकती है तो क्यों जबरन आयुर्वेद खायेगा(पर्सनल सोच)।

मगर आयुर्वेद के बहुत सारे सफलतम प्रयोग करने का दावा करने वाला, पेप्सी कोक को टॉयलेट क्लीनर कहने वाला, हेमा मालिनी से बातचीत करके ये रहस्योद्घाटन करने वाला की हेमा मलाई बेसन से नहाती है लक्स से नही, आज होता तो आरओ का सच भी ले ही आता बाहर।

प्रसिद्धि तो उसकी बढ ही रही थी। स्वदेशी के नाम पर रामदेव से पहले उसकी दुकान थी और चल भी रही थी। उसने कम्पनियों की लिस्ट बनाई थी स्वदेशी विदेशी टैग के साथ।

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