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अयोध्या एवरग्रीन ‘मुद्दा’

अक्टूबर 29, 2018 ओये बांगड़ू

मंदिर वही बनायेंगे और मस्जिद वहीं बनायेंगे…सालों से चले आ रहे इस मुद्दे पर  अदालत में होने के बावजूद राजनीतिक उबाल आता ही रहता है. हिन्दू मुस्लिम के इस एवरग्रीन मुद्दे पर चुनाव आने से पहले राजनीती की रोटियां तेजी से सिकने लगती है. जब जब अदालत में सुनवाई होती है तब तब टीवी चैनलों पर नेता आकर बोलते नहीं बल्कि चिल्लाते है.

आज भी जब हिंदूवादी नेता आज सुनवाई कल से मंदिर निर्माण के मूड में टीवी पर चिल्ला रहे थे,तब सुप्रीम कोर्ट ने कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि मालिकाना हक विवाद पर साफ़ कर दिया कि इस मामले पर जल्द कोई सुनवाई नहीं होने वाली और मामला अगले तीन महीने यानी जनवरी तक के लिए टाल दिया गया. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि उचित पीठ अगले साल जनवरी में सुनवाई की आगे की तारीख तय करेगी. यानी  2019 चुनाव में भी यह मुद्दा भरपूर राजनीतिक गर्माहट देता रहेगा.

क्या है अयोध्या की पूरी कहानी

वैसे तो अयोध्या विवाद आजादी से पहले का चला आ रहा है. लेकिन दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद 7 जनवरी, 1993 से केंद्र सरकार ने  कानून बनाकर वहां आस पास तक की 67 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर लिया. जिसके बाद सरकार के खिलाफ अपनी गुहार लेकर मुस्लिम पक्ष कोर्ट गया लेकिन अदालत ने गुहार सुनने से इनकार कर दिया.

लेकिन विवाद वहीं नहीं थमा 18 साल पहले यानी 2010 में इलाहबाद कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए विवाद खत्म करते हुए 2.77 एकड़ विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांट दिया . एक हिस्सा रामलला विराजमान को,एक हिस्सा निर्मोही अखाड़ा को और तीसरा हिस्सा सुन्नी सेंट्रल वक्फ़ बोर्ड को दे दिया गया.

लेकिन फिर खूब बवाल मचा और इस बार तीनों हिस्स्दारों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसले पर स्टे लगा दी. आज फिर अयोध्या मुद्दा कोर्ट में पहुंचा और सिर्फ 3 मिनट सुनावई करते हुए तीन महीनों तक लिए टाल दिया गया.

और यह धर्म आस्था और राजनीती से सबसे ज्यादा जुड़ा मुद्दा फिर से गरमा गर्म मुद्दा बन गया.

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