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राम मंदिर मुद्दा: सिर्फ इस वजह से फिर याद आए राम

नवंबर 25, 2018 ओये बांगड़ू

अयोध्या में राम के नाम पर राजनीति का दौर फिर से शुरू हो गया है। चुनाव आते ही राम नाम का खेल शुरू होना सन 1992 के बाद अब आम बात हो गई है। 90 में पैदा हुए सभी बच्चे जो अब 18 से ऊपर हो गए हैं वह सब जानते हैं कि राम मंदिर और अयोध्या एक साथ बोला जा रहा है मतलब देश मे कहीं न कहीं चुनाव हो रहे हैं।और कुछ खास दल चुनाव प्रचार ने संलग्न है.

चुनाव के समय मे अयोध्या राम मंदिर को याद करना अब साधारण सी बात हो गई है। अयोध्या के कुछ फेसबुक मित्र बता रहे थे कि टीवी चैनल में जरूर युद्ध की स्थिति है मगर अयोध्या के अंदर जन जीवन सामान्य है और जहां तक रही फौज की बात तो वह लगती हटती रहती है। हालांकि कुछ अखबार दावा कर रहे हैं कि मुस्लिम मोहल्लों में इस बार डर का माहौल है मगर फेसबुक में मौजूद अयोध्या और उसके आस पास के लोग बता रहे हैं कि केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार होने के कारण मुस्लिम असुरक्षित महसूस कर सकते हैं मगर अयोध्या में हर बार की तरह इस बार भी कुछ दिन तमाशा रहेगा फिर सब शांत।

वैसे वीएचपी ने आज अयोध्या में धर्मसंसद भी की है और कहा है कि 11 दिसम्बर को कुछ बड़ा होगा। अब देखिए इसे कहते हैं माहौल बनाना, आरएसएस के भैय्या जी कहते हैं लास्ट बार टेंट में राम लला को देख रहे हैं, और सीएम साहब राम मंदिर को पीतल का बनाने और वगेरह वगेरह का प्लान कर चुके। ये पूरा माहौल राम मंदिर के लिए है, ऐसा मानने की भूल मत करियेगा. चुनाव हैं 2019 में , जब जनता पूछेगी की राम मंदिर के लिए क्या क्या किया तो ये सब घटनाएं बताने को होंगी न। वैसे भी चुनाव से पहले राम मंदिर बनवाने का प्रॉमिस किया था और फाइव स्टार कार्यालय बनवा दिया।

जनता खफा इस बात से है कि वह पार्टी जिसे वह राम मंदिर के नाम पर जिताते आये हैं वह पावर में है मगर उस मुद्दे को नही साल्व कर रही जो सालों से उसे थोड़ा या ज्यादा चुनाव जितवा रहा है। और पार्टी जानती है कि मुद्दा कितना भी बासी पुराना क्यों न हो मगर धर्म से जुड़ा है और इस देश मे धर्म जाति के नाम पर सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं। वैसे राजस्थान के अलवर में चुनाव प्रचार में जुटे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस ना बनने देने और जातिवाद फैलाने का आरोप लगाया हैं.पीएम मोदी कहा कि कांग्रेस खतरनाक खेल कर रही है. सुप्रीम कोर्ट अयोध्या पर लोगों की बात सुनकर फैसला करना चाहती है, लेकिन कांग्रेस महाभियोग लाकर सुप्रीम कोर्ट के जजों को डरा रही है.

अभी 2019 में तुरन्त कोई दूसरा धर्म से जुड़ा मुद्दा मिल नही सकता, और राम मंदिर अभी इतना भी बूड़ा नही हुआ है कि आडवाणी की तरह सलाहकार मंडल में भेज दिया जाए। तो फिलहाल इसे ही भुनाया जाएगा।

आगे क्या होगा पता नही मगर चुनाव में पार्टी फिर से भुनाना जरूर चाहेगी, कारसेवक भेज दिए है थोक के भाव, जो अयोध्या घेर के बैठे हैं उनकी चौकसी के लिए अर्धसैनिक बल और इन दोनों को दिखाने के लिए मीडिया। मतलब अयोध्या के बाहर की जनता तो यही सोचे बैठी है कि राम मंदिर की जंग हो रही है।

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