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अथ श्री बड्डे आडवाणी, श्राद्ध नोटबन्दी कथा

नवंबर 8, 2018 ओये बांगड़ू

नमस्कार मित्रों, भाईयों और बहनों। मेरे प्यारे भारतवासियों। ये शब्द सुनकर आजकल कैसा लगता है? भयंकर लगता है न , मतलब मन में डर पैदा हो जाता है, कि क्या 2000 का नोट का भी बन्द होने वाला है। जी हां, आज नोटबन्दी का द्वितीय वार्षिक श्राद्ध है। वार्षिक श्राद्ध का अर्थ होता है किसी के मर जाने पर उसकी आत्मा की शांति के लिए किया जाने वाला वार्षिक कर्मकांड.

वार्षिक कर्मकांड पहले 500 और हजार के नोट का किया जाना था मगर जैसे ही रिजर्व बैंक के चौकीदार उर्जित पटेल ने कहा कि देखो जितने भेजे थे नोट उतने सब वापस आ गए।

मतलब नोटबन्दी नाम की चिड़िया फेल हो गई अपने एग्जाम में। इसलिए अब हम जो है श्राद्ध मनाएंगे नोटबन्दी का।

तो नोटबन्दी के श्राद्ध में इसका बड़ा बेटा तर्पण पिंडदान के लिए बैठेगा, तो मोदी साहब को बुलाइये, इसकी आत्मा को परलोक पहुंचाने का टिकेट उन्ही के हाथों कटेगा।

पण्डित जो है स्पेशली बनारस से बुलाये जाने थे लेकिन वो एन वख्त में उनकी खिसक गई और वो कुपित हो गए इसलिए आनन फानन में प्रगति मैदान के शनि मंदिर में बैठने वाले हरिप्रसाद जी को बुलाया गया है। श्राद्ध की समस्त प्रकिया भाजपा कार्यालय में सम्पन्न होनी हैं । श्राद्ध पूरा सनातनी प्रक्रिया से होगा इसलिए सभी लोग पण्डित के कर्मकांड पूरे होने तक या तो कार्यालय से बाहर बैठे या अपना अपना दिवाली हफ्ता जमा करने चले जाएं

तो सबसे पहले बड़े सुपुत्र श्री नयन मोई जी को स्नान आदि करवाया जाएगा। कुश अपने हाथ मे पकड़ लीजिये, अंजल में जल लीजिये और श्राद्ध का संकल्प कीजिये। उसके बाद ठंडे पानी से बिना साबुन लगाए स्नान करके सिर्फ एक धोती और जनेऊ धारण करके इधर आ जाइये

पण्डित हरिप्रसाद ने नोटबन्दी की फ़ोटो लगा ली है, एक तरफ एक दिशा में अमित शाह, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज , बैठी हैं, स्मृति ईरानी आई थी मगर फिलहाल एकता कपूर के किसी फंक्शन में चली गयी हैं।

दूसरी तरफ लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी वगेरह बैठे हैं, इनका होना न होना बराबर है इनकी तरफ मोई जी ने पीठ कर रखी है, उधर पण्डित हरिप्रसाद ने श्राद्ध प्रकिया शुरू कर दी है।

पहले पूछा गया कि आटे वाले पिंड बनाओगे या चावल वाले, उसके बाद तय किया गया कि 500 के पुराने नोट के पिंड बनाये जाएंगे, तुरन्त भाजपा कार्यकर्ताओं ने एक दीवार तोड़कर 500 1000 का नोट की गड्डी निकाली और उसको गलाने डाल दिया, तभी पण्डित भड़क गया बोला क्या मजाक है, पिंड ऐसे बनते हैं क्या। दोबारा लाओ

कार्यकर्ता ने दोबारा आडवाणी जी के पीछे वाला पिलर तोड़ा और दोबारा नोट निकाले। पंडित ने नोटों का चूरा करवाया और पिंड बनाने के लिए उन्हें भिगाने डाल दिया

अब पण्डित नयन मोई जी को श्राद्ध करवाने जा ही रहा था कि मोई जी बोले दो मिनट में आता हूँ, पण्डित गुस्सा गया बोला ‘ फिर किसी देश घूमने निकल लिए, अरे श्राद्ध कर लो फिर जहां मर्जी चले जाना’

मोई जी बोले अरे किसी देश नही जा रहा बस हल्का होने जा रहा हूँ, उधर अमित शा ने टेडी आंख दिखाई तो पण्डित ने मोई जी को ब्रेक दे दिया बोला जा यार

अब मोई जी 4 घण्टे बाद लौटे , पता चला पाकिस्तान तक गए थे, श्राद्ध के लिए बिरयानी लाने। उधर आडवाणी जी बड़े गौर से श्राद्ध प्रकिया देख रहे थे, अमित बोले’चिचा चिंता न करो, हम बढ़िया से करवा देंगे’। किसी को समझ नही आया आखिर अमित किस्से क्या कह रहा थ।

खैर पण्डित ने मर तर के जैसे तैसे श्राद्ध करवाया । मगर तभी पता चला आज आडवाणी का बड्डे भी है।

बस फिर क्या आडवाणी के दस समर्थक बूढ़ों ने हल्ला शुरू कर दिया। पहले बड्डे मनाओ, पहले बड्डे मनाओ।

अमित शा बोला वो भी मना देंगे, अभी बिरयानी खाओ, पाकिस्तान से आई है ।

चलो श्राद्ध हो गया

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