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फिलिप कोटलर कौन ?

जनवरी 16, 2019 ओये बांगड़ू

आज से चुनाव के एक साल तक अब यह प्रचार किया जाएगा कि हमारे प्रधानमन्त्री को वैश्विक स्तर पर पुरुस्कृत किया गया है,उन्हें कोटलर प्रेसिडेंशियल अवार्ड दिया गया है. वैसे खुशी की बात होती अगर कोइ वैश्विक जाना पहचाना पुरूस्कार उन्हें मिलता,मगर जैसे हम प्रधानमन्त्री स्टार्टअप पर बहुत ज्यादा विशवास करते हैं शायद इसी वजह से उन्होंने इस स्टार्टअप पुरूस्कार को एक्सेप्ट भी किया हो. कोटलर प्रेसिडेंशियल अवार्ड क्या है कब बना वगेरह वगेरह जानकारी मैंने भी महागुरु गूगल के दरबार से प्राप्त की. और शायद आप लोग भी अब तक जान गए होंगे कि मार्केटिंग के कोइ गुरु रहे कोटलर की याद में ये पुरूस्कार पिछले साल से ही शुरू हुआ है और इसकी कोइ ज्यूरी नहीं है,अलबत्ता भारत में जिस कम्पनी के साथ इनका टाईअप है वह अलीगढ़ की है.और जाहिर सी बात है नाम भले ही विदेशी है मगर पुरूस्कार खालिस देशी है.

अब मार्केटिंग के गुरु थे कोटलर तो जाहिर है मार्केटिंग वालों से ही पूछा जाना चाहिए था कि कौन हैं ये,मैंने अपने दर्जन भर एमबीए के मित्रों को फोन किया,उनमे से आठ लोगों ने मेरी तरह पहली बार कोटलर का नाम सुना था,एक ने कोटलर के मार्केटिंग के सिद्धांत पढ़े थे ,एक अन्य ने कोटलर की किताब ‘मार्केटिंग एंड मैनेजमेंट’खरीद कर रखी थी,एक अन्य जो वैश्विक स्तर पर मार्केटिंग की किताबों का जानकार है उसने बताया कि दुनिया के बड़े बड़े बिजनेस स्कूल्स में इस शख्स की किताब सेलेबस में है और वहां इसे पढाया जाता है,आखिर में एक मित्र ने पूरी सिद्दत से मुझे बताया कि ‘हाँ वो कोटलर को जानता है’

बस उसी के मित्र की वजह से मुझे एमबीए का कोर्स जेन्यून लगने लगा,अन्यथा सभी लोग एमबीए में बस पैसे कमाने जाते हैं,पैसे कमाने का कोर्स करने,शायद तभी इसे बिजनेस स्कूल कहते होंगे.

खैर उसने बताया कि कोटलर ने एमाईटी से पीएचडी की है और इस बात पर उसने इस कद्र जोर दिया कि कुछ पल के लिए मेरे लिए एमाईटी विश्व की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी बन गयी,खैर पीएचडी अर्थशास्त्र में थी मार्केटिंग में नहीं,मार्केटिंग तो उन्होंने नार्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी से शुरू की,मार्केटिंग मतलब नौकरी नही,सीधे पढाना,जैसे हमारे जर्नलिज्म में होता है,बिना कभी रिपोर्टिंग,प्रोड्क्शन या एडिटिंग की नौकरी करे,कुछ टीचर सीधे एमए और नेट पास करके छात्रों को बताने लगते हैं कि ये काम कैसे किया जाना चाहिए ठीक वैसे ही कोटलर ने बिना कोइ मार्केटिंग की नौकरी करे सीधे नार्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी में पढ़ाना शुरू कर दिया. वैसे कई जर्नलिज्म के एसे टीचर सबसे अच्छे टीचर बनकर निकलते हैं और नार्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी से कोटलर भी एसे ही अच्छे शिक्षक बनकर निकले.

अब टीचर हैं तो किताब तो लिखना मेंडेटरी हो जाता है तो उन्होंने कई किताबें लिख डाली,इनकी खासियत ये रही कि किताबों में अपने हिसाब से जो सही लगा लिखते गए,बाद में इनका लिखा कई कालेज और बिजनेस स्कूल के टीचर्स ने अपने अपने हिसाब से पढाया.

कोटलर पिछले पचास सालों से अमेरिका के जार्जिया में केलाग स्कूल आफ मेनेजमेंट में पढाते हैं,इज्जत बहुत है इनकी,इन्हें मार्केटिंग गुरु,मार्डन मार्केटिंग का जनक कहा जाता है.बदलते ट्रेंड के हिसाब से इन्होने मार्केटिंग के फंडों को भी अपग्रेड किया है.

अब आते हैं अवार्ड पर,राहुल गांधी ने ट्विट करके कहा था कि अलीगढ की कम्पनी है,अब कम्पनी तो अलीगढ़ की नहीं है ,मगर भारत में इस कम्पनी के साथ जिसका टाईअप है वो अलीगढ़ के हैं.बाकी राहुल के ट्विट करने वाले ने अधूरा ज्ञान पेला है और जैसा राजनीती में होता है अधूरा सच बोलकर सामने वाले को नीचा दिखाओ वही किया है.

हाँ कोटलर भले ही पुराने हो मगर ये पुरुस्कार बिलकुल नया है और मार्केटिंग के फील्ड वालों को ही दिया जाता है.अब मोदी जी का मार्केटिंग से क्या लेना देना ये तो बाजार समझता है.विदेशों की यात्राएँ ज्ञान बांटने को थोड़ी न की जाती हैं ये तो बस बिजनेस है जी.

देश के युवा वर्ग को आज एक और नया नाम मोदी जी की वजह से पता चला,कोटलर.कोटलर साहब की फेन फोलोइंग में अचानक जबर्दस्त वृद्धी आ गयी होगी.

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