बांगड़ूनामा

परदेसी बेटा

नवंबर 7, 2018 ओये बांगड़ू

इस दीवाली मेरा घरौंदा सूना सा होगा

मिट्टी के दीयरी (दीये) का उजाला घुँधलाएगा

ओसारे की चौखट राह तकेगा आने का 

अब बेटा परेदेशी वापस कैसे घर आयेगा

 

माँ की उदासी फीका कर देगी बतासे को 

अचानक फोन की घंटी कोई बजायेगा

हैल्लो ! बबुआ कैसे हो लाला मेरे तुम ?

ठीक हूँ माँ पर आँखों से पानी छलक जायेगा

 

सुनो पुरी खीर मिठाई और बारह व्यंजन 

हाथ से मेरे इस त्योहार कौन खायेगा ?

बस कर अम्मा अब और मत बोल 

बेटा तेरा अब  कुछ भी न सह पायेगा 

 

डेहरी बड़ी उँची है लल्ला दीयरी कैसे रखे ?

चौकी, सूप, कुदाल , सब बाट निहार रहे

सुखी रहो खुश रहो साथ हमारा प्यार रहे

अगले बरस जरूर आना ई साल तो गुजर जायेगा |

 

राजीव कुमार भारती (भावी पत्रकार)

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