ओए न्यूज़

पाकिस्तान भून डालें

मार्च 4, 2017 Girish Lohni

शुक्रिया इस बात का कि तुम्हें एक फौजी की बेटी का एक साल पहले का वीडियो याद तो आया. पिछले साल देख लेते तो शायद उस पाकिस्तानी लड़के की तरह तुम भी कुछ सीख लेते. उसे भूल जाओ क्योँकि मैं 50 से ज्यादा ऐसे फौजी के बच्चो से मिला सकता हूँ जो मानते हैं कि युद्ध ने नहीं पाकिस्तान ने उनके बाप को मारा है. तो अब चलो बंदूक उठाओ भून आते हैं पाकिस्तान सारा. हमारी तो ये सरकार सुनती नहीं तुम कहो भून आते हैं तो शायद मान जाये.

देश विरोधी नारा लगाने वाले को लटका दो का नारा सड़क पर खूब गला फाड-फाड कर लगाने वाले चुपके से सैयद अली शाह गिलानी के बेटे को लाख रुपये की नौकरी पर टिकाते हैं. सेना को एक तू कहने पर बवाल कर देते हैं, उसी सेना पर पत्थर मरवाने वाले अलगाववादी नेताओं को साल का करोड़ों रुपया दे देते हैं. सेना की सर्जिकल स्ट्राइक पर रोटी सबने सेक खानी है लेकिन पिछले दो महिने में शहीद 26 जवानों के तिरंगे में लिपटने के बाद उंनका क्या हुआ? उनके परिवार का क्या हुआ? ये जानने की फुर्सत किसी को नहीं है. इतनी फुर्सत नहीं की सभी मिलकर नियमों में थोड़ा सा परिवर्तन कर देश के लिये कुर्बान होने वाले इन जवानो को शहीद का दर्जा दें. 2017 के पिछले 2 महिने में 26 जवान देश की सीमा पर शहीद हो गये जबकि केंद्र की सरकार समेत विपक्ष चार राज्यों के राजनैतिक भ्रमण पर है. बुलाओ सबको और चलो बदला लेते हैं, भून के आते हैं.
  पाकिस्तान के साथ हमारा तो हुक्का पानी बंद था. वर्तमान सरकार थी जिसने पहले चुनावों में पाकिस्तान को गरिया-गरियाकर चुनाव जीता और फिर उसी पाकिस्तान के बिना शपथ तक नहीं ली. नेहरू ने धोखा खाया अटल ने धोखा खाया उसके बाद भी ना जाने किस उम्मीद से वर्तमान प्रधान ने बिन बुलाये बड्डे का केक खा लिया. तब तो नहीं पूछा कौन साइड के लिबरल हो? कितनी किताबें पढ़ ली हैं? कौन जमात के इंटलेकच्वल हो? तब का पाकिस्तान दूसरा वाला था क्या ?
कश्मीर के नाम पर सालों से भारतीयों को मूर्ख बनाया जा रहा है. 8 नवम्बर की नोटबन्दी की घोषणा के बाद के दो हफ्तों का अखबार उठा लो, घाटी में कितनी पत्थरबाजी की घटनाएँ हुयी देखो जरा. साफ है बीते सत्तर सालों में देश के अन्य भागो की तरह कश्मीर का विकास किया गया होता तो आज कश्मीर में 6 लाख जवान खड़ा करने की जरूरत नहीं पड़ती. लेकिन कश्मीर का मुद्दा जो हल हो जाये तो राजनैतिक खीर कैसे पकेगी? राजनैतिक इच्छा शक्ति,अंतरराष्ट्रीय दबाव, शान्ति आदि-आदि के दूत जिस दिन मान जाये तो मेरी पसन्द की ऐके-47 ना भी मिले तो लाठी ही ले आना, सिर फोड देंगे पाकिस्तान का. मानोगे नहीं फिर भी खून-पसीने की कमाई अब किसी अलगाववादी पर मत बहाना.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *