यंगिस्तान

पदमावत एक फिल्मी कचरा

फरवरी 7, 2018 Girish Lohni

ये बड़े शर्म की बात है कि हम एक ऐसे समाज में रह रहे हैं जहां लोगों के मनोरंजन के लिये जौहर जैसे अमानवीय विषय पर फिल्म बनायी जाती है. निहायति वाहयात विषय को महिमा मंडित कर लोगों को झूठे गौरव का भाव दिलाना है पद्मावत. रुपकँवर सती काड में दी सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गयी गाइडलाइंस को भंसाली की फिल्म में तार-तार किया गया है. अभिव्यकित की स्वतंत्रता के नाम पर जौहर का अतिरेक महिमा मंडन कितना सही है?

फिल्म देखने के बाद अनारकली फिल्म की अदाकारा स्वरा भास्कर ने भंसाली के नाम एक खुला पत्र लिखा लगभग 500 शब्दो के इस पत्र में स्वरा ने वर्जनीटी शब्द का इस्तेमाल क्या कर दिया पितृसत्तात्मकता के अहं को ठेस पहुंच गयी. इसके बाद जो गलियां स्वरा को मिली हैं वो दिखाता है कि अभी भी हमारे समाज में स्त्री को लेकर सामंती सोच जस की तस है.

ऐसा नहीं हैं कि ये पितृसत्तामक सोच के पोषण के पीछे सिर्फ पुरुष आगे हैं. स्वरा के ओपन लेटर पर सुचित्रा कृष्णमूर्ति ट्वीट कर अनारकली फिल्म में वैश्या का किरदार करने और पद्मावती की आलोचना किये जाने पर तंज करती हैं . सुचित्रा का वैचारिक मतभेद आमंत्रित था लेकिन उनके द्वारा स्वरा पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी दिखाता है कि पितृसतात्मक सोच हमारे समाज में किस कदर हावी है.

फिल्म के समर्थको का मानना है कि भंसाली राजपूतो का गौरवशाली इतिहास दिखाना चाहते हैं लेकिन पहला सवाल तो यह कि फिल्म में जातिवादी शुद्धता के ढिंढोरे को कैसे गौरवशाली इतिहास मान लिया जाय दूसरा ये कि यदि एक पल के लिये इसे गौरवशाली इतिहास मान भी लिया जाय तो पद्मावती को ही क्यों चुना गया क्या नागमती को चुनने से राजपूताना शान में कोई कलंक लग जाता. जानकारी के लिये बता दूं नागमती रत्नसेन की पहली पत्‍‌नी थी.

वास्तविक मुद्दे से ध्यान हटाकर कुछ गुंडों से छदमी विरोध कराकर भंसाली ने फिल्म को खूब पब्लिसिटी भी दिला दी और एक डिस्केल्मर कि वे सती को बढ़ावा नहीं देते हैं के साथ सती को ही महिमामंडित करते हुये खत्म कर दी. भारत में न केवल सती कानून अपराध है बल्कि उसका किसी प्रकार से महिमामंडन भी एक अपराध है इसके बावजूद पद्मावती धड़ल्ले से दिखायी जा रही है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *