ओए न्यूज़

ओपन लेटर टू रामभक्त

नवंबर 27, 2018 ओये बांगड़ू

प्रिय राम भक्तों,

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह कह रहे हैं कि हमारा बस चलता तो हम राम मंदिर बना चुके होते। बहुत शानदार बयान है लेकिन क्या आप जानते हैं कि वर्षों से चली आ रही राजनीति, आज भी बदस्तूर जारी है। आज आपको चिट्ठी लिखने का मुख्य उद्देश्य आपको भड़काना है। मैं चाहता हूँ कि आपका गुस्सा फूटे और ये राम मंदिर का कुछ समाधान निकले, ताकि आप फिर शिक्षा, स्वास्थ, जल, बिजली सड़क जैसी बुनायदी बातों पर बातचीत कर सकें।

अभी अखबार बता रहा था कि एक रामभक्त सोनू त्रिपाठी अपने घर से राम मंदिर बनाने निकला और वापसी में एक कार ने उसे टक्कर मार दी, घरवालों का इकलौता चिराग था। ऐसी और भी खबरें सुनने को मिल सकती थी मगर उस राम की असीम कृपा रही कि किसी की भी साजिश सफल नही हो पाई।

खैर राम मंदिर अब तो बन ही जाना चाहिए, मैं अमित शाह को याद दिलाना चाहूंगा कि केंद्र में सरकार उनके पास है,राज्य में भी उन्ही के पास है। हां अगर वह मंदिर मुद्दे पर कुछ करते हैं तो देश मे उनके वोट बैंक पर असर जरूर पड़ेगा, मगर राम मंदिर तो बन ही जायेगा। मुख्य मुद्दा तो राम मंदिर है ना। अमित शाह जमकर वहां भक्तों का जमावड़ा करवा दें मगर जब तक सरकार नही चाहेगी तब तक कुछ नही होगा।

बाबरी ढहाने के समय भी सुप्रीम कोर्ट था बीच मेज़ लेकिन भीड़ ने कैसे एक झटके में गिरा दी थी मस्जिद, जब एक निर्माण गिराया जा सकता है तो एक निर्माण किया भी तो जा सकता है, इतने भक्त हैं कि सब एक एक ईंट भी लगाएंगे तो सुप्रीम कोर्ट को पता चलने से पहले मंदिर बन जायेगा। और सुप्रीम कोर्ट कौनसा रोज कार्रवाई कर रही है। अगर ये इतना जरूरी मामला होता तो इस  पर हफ्ते दर हफ्ते कार्रवाई नही होती क्या।

ऐसा लगता है कोर्ट भी चुनाव देखकर अयोध्या की तारीख तय करती है कि ठीक चुनाव के आसपास इसकी कार्रवाई सुनिश्चित हो।

कार्रवाई में क्या होता है ये तो नही पता,मगर बाहर आते ही यह पता चलता है कि तरीख पर तारीख चालू है।

प्रिय राम भक्तों आपकी भावना से सन 90 से खिलवाड़ किया जा रहा है। मेरी यह समझ नही आता कि हर बार ठगे जाने के बावजूद आप उसी दुकान में राशन लेने पहुँच कैसे जाते हैं। ये तो पराकाष्ठा है डेडिकेशन की।

खैर पहले जो हुआ सो हुआ लेकिन इस बार आप इनकी राजनीति में खुद का मुर्गा बकरा मत बनने देना, इस बार आपको मंदिर बनवाना ही बनवाना है और उसके बाद अन्य मुद्दों के लिए सरकार के कान भी उमेठने हैं। बता दो इस देश के राजनीतिज्ञों को कि हम टुच्ची चीजों से ऊपर उठ गए हैं। हमें लड़ाना अब आसान नही

जय श्री राम

आपका

मित्र(मंदिर वहीं बनाएंगे)

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