बांगड़ूनामा

नज़रों की बेरोज़गारी

अगस्त 8, 2018 ओये बांगड़ू

भूटान के एक खुबसूरत शहर में घुमते हुए गैर ज़िम्मेदार आज़ादी और खुबसूरत लड़की से मुलाक़ात का किस्सा बता रहे है पिथौरागढ में रहने वाले अभिजीत. अभिजीत नवाबों के शहर लखनऊ में पत्रकारिता पढ़ रहें है साथ ही हिप्पी की तरह घूमना और हर आर्ट से प्यार करना इन्हें पसंद है.

लड़कपन की ज़िद समझिए या फिर से भाग जाने की, हम यूँ ही चल दिया करते थे.

ये कुछ चौथी या पांचवी बार होगा जो मैंने अपना ATM गुमा दिया था, ज़िन्दगी काफी डिजिटल और कैशलेस हो चुकी थी. असली गैर ज़िम्मेदार आज़ादी का एहसास तभी होता है जब आप कंगाल हो। परदेश में बैचलर होना आप हमसे सीखिए. कई बार यूँ  हुआ कि 16 की गोल्ड-फ्लैक लेने पर अगर 1-2 का चिल्लर भी कम पड़ जाता तो पनवाड़ी को पेटीऍम  से भुगतान करना पड़ता है. 1 रुपये को डिजिटल वॉलेट में ऐड करने पर OTP आने के बीच का जो अंतराल होता है ना ? बस उसी दौरान मेरी यह कोशिश रहती थी कि उस 3×3 फुट के जमीन से काफी ऊपर हवा में उठे हुए एक लोहे के डब्बे में बैठे गहरे रंग का आदमी जो मुझे एक-टुक हीन निगाहों से देख रहा है, उससे नज़र न मिलने पाए. नज़र मिल गयी तो मेरा अस्तित्व एक घोर उदासीन सन्नाटे में समां जायेगा. जहाँ से मुझे खुद को बहार निकालने में काफी परेशानी होगी. देखिये, जीवन काफी सरल है, आप कुछ भी ऐसा न करे जिसके कारण आपको परेशानी मोल लेनी पड़े इसीलिए मेरी तरह बेशर्मी का रास्ता अपनाइए. परेशानी आये, उससे पहले ही भाग जाइये. ज़िन्दगी में सबसे ज़रूरी होता है जिन्दा रहना. वैसे भी मरने के बाद इंसान को कब तक याद रखा जाता है और कौनसा हमें कोई शहीद स्मारक और एइक्किस तोपों की सलामी से विदा किया जायेगा बस इसीलिए की फलाने आदमी ने जीवन के फलाने समय पर फलानी परेशानी का सामना किया. हद्द बेरोज़गारी.

अभी मैं लखनऊ के चिन्न्हट के पास पनवाड़ी के सामने खड़ा हूँ और मेरी OTP कहीं रास्ता भटक गई है. कुछ यूँ ही होता है जब आपके साथ-साथ आपका नेटवर्क भी आवारा हो, यानी रोमिंग . मै इधर-उधर झाँक रहा हूँ और मेरी नज़र पनवाड़ी के पीछे लगे आईने पर पड़ती है . मै खुद को देखता हूँ. मेरे घर में आइना नहीं है, मेरे साथी ने अपने ब्रेकअप का गुस्सा आइनें पर निकाला था. वो सदमे से उभर नहीं पाया और हरमाल 20 रूपए में देने वाले लोग paytm नहीं लेते,  इसिलए घर में शीशा कभी आ नहीं सका. मुझे खुद की तस्वीरे लेना भी कुछ ख़ास पसंद नहीं है,  में ऐसा ही हूँ. काफी वक़्त बाद मै खुद को देख रहा था. मै और ज्यादा ध्यान से देखने लगा. इसिलए क्यूंकि मेरी दाड़ी नहीं आई थी. मुझे लगा कि हेयरकट की ज़रूरत है.

आँखों की गुस्ताकियां और नज़रें तो वो मिलाया करती थी. ऐसी की मेरे जैसे निहंग-बेशर्म को भी हया आ जाये. खैर वो अलग चैप्टर है. अभी हज़ारों से नज़ारे तो चुरा लोगे लेकिन खुद से नज़रे कैसे चुराओगे गुरू ? मैंने ये सीखा कि आप दुनिया में और कोई नहीं पर केवल खुद को जवाब देने के हक़दार हैं. भले ही आप नहीं तो आपके भीतर कोई सही मायनें में इंसान सा कुछ है जिससे आप चाहकर भी कभी राग-द्वेष, धोखा, चारसौ बीसी, ईर्षा-घमंड कदापि नहीं कर सकते.

महीनों निकल गए बस यूँ ही आवारगी में.

तीन बातें. मै 21 साल का कॉलेज विद्यार्थी हूँ, आज मेरा जन्मदिन है, इन दिनों मेरे कॉलेज में शानदार वार्षिकोत्सव चल रहा है , क्योंकि मेरा कॉलेज लखनऊ में है, मै भूटान देश के पारो शहर में एक आकर्षक से छोटे bar/cafe में बैठ कर शराब पी रहा हूँ. शाम के करीब 6 बज चुके है. मै पिछले 3 घंटे से एक ही स्थान पर विराजमान हूँ. क्यूँ न शहर घूम लिया जाए? क्यों ना इस सुन्दर देश की परंपरा को देखा जाए? नहीं! इसीलिए कि इसके पीछे भी एक कारण है. बार  टेबल के जिस तरफ मै बैठा हूँ, उसके दूसरी तरफ एक काफी आकर्षक महिला है, ज्ञात होता है कि उस जगह की मालकिन भी वहीं है. सुन्दरता का पैमाना यह है कि मै किसी ऐसे इंसान को नहीं जानता जिसे छोटी आँखों वाली महिलाए पसंद ना आए.

लौटरी के दर्जन भर टिकट घिसती वो मोहतरमा बीच बीच में बालों को कान के पीछे डाल एकदम नज़रे मिलाये मुझसे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओँ में बातें कर रही थी.

काफी आश्चर्यजनक था कि वो मुझसे 60 और 70 के दशक के हिप्पी कल्चर में बहस कर रही थी. ऐसा लग रहा था मानों उसको वो सब पहले से ज्ञात था और मुझे लगता था की मुझे पता है. शराबी आदमी को अज्ञात जगहें अकेले नहीं घूमनी चाहिए, इसीलिए मेरे साथ एक साथी था जो अभी ही 50% टल्ली हो चूका था. उसकी आस करना अब अँधेरे में तीर चलाने सामान था. देश के लोगों में ख़ुशी के पैमाने में भूटान दुनिया का 8वां और एशिया का सबसे खुश देश है. शायद इसीलिए था की cafe में आते जाते लोग हमे अपने साथ बिठा कर मुफ्त में महंगी शराब पिला रहे थे,  ख़ुशी ख़ुशी!

मेरा साथी चाहता था कि हम उस cafe से बहार निकल कर अन्य जगहें भी घुमें लेकिन मुझे मेरा इरादा उससे बिलकुल उल्टा प्रतीत हो रहा था. काउंटर के दूसरी तरफ एक 5-6 साल का बच्चा भी दौड़ भाग कर रहा था जिसे वो महिला डांट भी रही थी. कुछ देर बाद बातो ही बातों में उसने मुझे बताया की वो शादी-शुदा है और वो लड़का उसका बच्चा है. यह सुन कर मेरे साथी को जोर से हंसी छूट गयी.  मै सोच में पड़ गया और cafe में लगे एक शीशे में खुद को देख बैठा,  मेरी आँखें तैर रही थी और मुझे वो पनवाड़ी याद आ रहा था.

हांलाकि ऐसा कोई पल नहीं था जिससे मुझे पछतावा हो. जाते हुए मैंने उस महिला उसका कांटेक्ट लिया जिसके जवाब में उसने अपना ईमेल आईडी एक नोट पर लिखकर दिया .मैंने वादा जो किया था कि उसे अपने पसंदीदा गानों के नाम भेजूंगा.

अगर आपको यह आकर्षण अनैतिक लग रहा है तो आप गलत है क्योंकि इंसानों में स्वाभाविकता भी कुछ चीज़ होती है. घर से हजारों मील दूर किसी अनजान देश में अनजान लेकिन सुन्दर लोगो के बीच शराब पीते वक़्त खुद से काफी उम्रदार महिला से प्रेम कर बैठना भी तो अपने आप में एक मज़ेदार अनुभव है ना!

पारो शहर से निकलते हुए एक दुकान के पास वो बच्चा नज़र आया और मैंने उसे दूर से इशारा किया. दुकान से कुछ सामान खरीदते हुए मैंने उसकी माँ के बारे में पुछा तो उसने खिन्नता से जवाब दिया की वो उसकी माँ नहीं उसकी दीदी है. मेरे साथी की फिर से ज़ोरों की हंसी छूट गयी.

खैर उसका दिया नोट अभी भी मेरे वॉलेट में महफूज़ है.

 

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