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मुलायम को क्यों याद करें ?

फरवरी 14, 2019 ओये बांगड़ू

कल मुयायम अंकल ने मोदी जी से संसद में कहा कि हम चाते हैं कि आप पीएम् बने दोबारा,बस उनके कहने की देर थी कि उनके बयान का पोस्टमार्टम स्टार्ट हो गया. अरे आज का अखबार से लेकर वेबसाईट खंगाल लो,मुलायम के मुलायम वचन हर जगह तरह तरह से बेचे जा रहे हैं.सत्ता पक्ष कहता है देखो मुलायम कितने समझदार हैं तो विपक्ष कहता है पनौती है,पहले मनमोहन और अटल को भी दे चूका है एसा आशीर्वाद,दोनों को सत्ता गंवानी पड़ी थी.

खैर हमें क्या हमारा मुख्य मुद्दा यह है कि आखिर उम्र के इस पडाव पर मुलायम अपने बेटे अखिलेश से अलग क्यों जा रहे हैं ? वैसे मुलायम ने सांसद रहते हुए एक एसी फार्म्लटी वाली परिपाटी खुद इजाद कर ली है जिसमे वह आखिरी दिन में सत्ताधीन पीएम को दोबारा पीएम बनने की बात कहते हो,और अच्छा भी है,उम्र के इस पडाव में इतने साल की राजनीती के बाद इस तरह के कोइ रस्मो रिवाज अगर मुलायम दे भी जाते हैं तो बुराई क्या है.

संसद की परिपाटियाँ इसी तरह तो इजाद होती हैं,जैसे वह बजट से पहले हलवा खाने वाली. हर आदमी चाहता है कि देश उसे किसी न किसी अच्छी वजह से याद करे,वैसे मुलायम ने काफी अच्छे काम भी किये होंगे,मगर जब याद करने वाली बात आती है तो हमेशा दर्द पहले नजर आता है खुशी बात में.

अब अगर हम उत्तराखंड वालों की बात करें तो हम मुलायम को हमेशा एक विलेन के रूप में याद करेंगे,इसकी वजह से उत्तराखंड आन्दोलनकारियों को गोली खानी पड़ी,इसकी पुलिस ने उस समय महिलाओं का रेप तक किया,उस मामले की सीबीआई जांच अब भी चल रही है,तो मुलायम तो हमारे लिए विलेन है.

मगर बाकी देश उसे किस तरह देखता है,शायद उसके सैफई के कार्यक्रम के लिए भी उसे याद किया जाए,जब उसने पूरा बालीवुड एक जगह पर ला खड़ा किया,मुंहमाँगी कीमतों पर सैफई में लोगों को नचवा दिया,सैफई वाले तो खुश होंगे लेकिन बाकी देश के लिए तो यह अय्याशी से ज्यादा और कुछ नहीं,राजशाही होती तो अब तक उसे सदी का सबसे अय्याश राजा घोषित भी कर दिया गया होता.

यूपी की बिगड़ी क़ानून व्यवस्था के लिए मुलायम को हमेशा याद किया जाता रहेगा,अपने परिवार के सभी लोगों को राजनीति में लाने के लिए मुलायम याद किये जायेंगे,बहु बेटे भतीजे सभी राजनीती में ले आये समाजवाद के नाम पर.मुलायम जेपी आन्दोलन से निकले वह नेता हैं जो बाकी निकले नेताओ की तरह उम्मीदों पर बिलकुल भी खरे नहीं उतरे.हाँ इमरजेंसी के बाद जब जनता के पास कोइ विकल्प नहीं थे तब मुलायम जैसे नेताओं ने अपनी खूब पकड़ बनाई जैसे केजरीवाल ने बनाई,शीला दीक्षित के अपोजिशन में जब भाजपा विकल्प दे पाने में असमर्थ रही तब केजरीवाल का उदय हुआ.

खैर मुलायम ने मोदी जी को आशीर्वाद दिया है दोबारा जीतने के,और हमें आशंका है कि पूर्व की भाँती कहीं दोबारा मुलायम पनौती ही न साबित हो जाएँ.k

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