ओए न्यूज़

गठजोड़ देखते जाना,बाहुबली काआना विरोधियों का जाना

जनवरी 26, 2017 ओये बांगड़ू

यशवीर जमीन में घूमने वाले पत्रकार हैं, सुबह 40 वाला पास बनाकर ये पूरी दिल्ली को एक पाँव में घूम लेते हैं. नेताओं के अंदर की खबरें लाना इनका पार्ट टाईम शौक है. फुल टाईम में नेताओं की बाहर की खबरें लाते हैं.

चढ़ गुंडों की छाती पर, मोहर लगाओ हाथी पर
ये वही नारा है जिसके दम पर कभी मायावती ने उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी की थी। आज खुद बहन मायावती (अरे माफ़ी बहन तो ये हमारे पिताजी की हैं मेरी तो बुआ हुईं) ने माफिया डॉन से नेता बने मुख्तार अंसारी को पार्टी ज्वाइन करवाई बल्कि लगे हाथ न सिर्फ उसे बल्कि उसके बेटे और भाई को भी हाथी पर चढ़ चुनाव लड़ने का लाइसेंस भी दे दिया(ध्यान से पढ़ो गोली चलाने का नहीं लिखा है)।
क्या वो 2014 लोकसभा चुनाव में हाथी के अंडा देने की अनोखी घटना की मज़बूरी थी या सपा कांग्रेस के गठजोड़ के बाद हाथ से जाते मुस्लिम वोटों को अपने पलड़े से छिटने की आशंका. जो बुआ मायावती ने अंसारी परिवार के तीन लोगों को हाथी पर चढ़ विरोधियों को ठिकाने लगाने का लाइसेंस दे दिया (सिर्फ चुनावों में).जिन्हें बीएसपी से साल 2010 में आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहने के कारण पार्टी से बाहर कर दिया था.
न्यूज़ रिपोर्ट्स के मुताबिक बसपा प्रवक्ता ने कहा था कि अंसारी बंधुओं ने बसपा में प्रवेश के समय आपराधिक गतिविधियां छोड़ जनसेवा करने का वादा किया था.लेकिन वे लगातार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त थे, जिससे जनता के बीच बसपा की छवि खराब हो रही थी। इसीलिए बसपा प्रमुख ने अंसारी बंधुओं को पार्टी से निकालने का फैसला किया। (गूगल कर लें)
आपको बता दें कि मुख्तार अंसारी बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय समेत हत्या, अपरहण और फिरौती समेत कई मामले दर्ज हैं। वो चार बार मऊ विधानसभा से विधायक रह चुका है। कहा जाता है कि सैफई वाले यादव परिवार में विवाद की एक वजह मुख़्तार की एंट्री भी थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *