गंभीर अड्डा

मोदी की गलती नही,मार्किट में झोल है

अगस्त 21, 2018 कमल पंत
आज भी आलोचना का ही मन है लेकिन उन टुच्चे सोशल मीडिया मार्केटिंग वालों की आलोचना जो सस्ते प्रचार के कारण कुछ भी लिख डाल देते हैं और बदनाम होते हैं पीएम मोदी  .
कहानी शुरू होती है 2013 से जब पीएम कैंडिडेड मोदी के प्रचार के लिए भाजपा द्वारा सोशल मीडिया का दबाकर इस्तेमाल किया जाने लगा था. मोबाईल टू मोबाईल वो चीजें सोशल मीडिया में ट्रांसफर की जा रही थी जिनसे नरेंद्र मोदी नाम लोगों की जुबान पर छप जाए. जियो का पदार्पण हुआ नहीं था इसलिए फ्री इंटरनेट उपलब्ध नहीं था और प्रचार का सारा जिम्मा अकेले फेसबुक और ट्विटर के राईटअप्स ने संभाला हुआ था.
सोशल मीडिया में लिखा जाने वाला कंटेंट इस दौर में बहुत हिट हो रहा था,फेसबुक में पढ़े कंटेंट को ब्रहमांड का अखंड सत्य मानने वाले लोग तुरंत मोबाईल पकड़ कर चाय की दूकान पर कहा करते थे कि अबे देखो गुजरात जो है न्यूयार्क के बाद सबसे विकसित राज्य है.  दूकान में बैठा लगभग हर आदमी इस आंकलन की कोइ विवेचना नहीं करता क्योंकि नेट सस्ता नहीं था इसलिए हर कोइ अपने मोबाईल में डलवाता नहीं था.तो नेट ज्ञानी द्वारा कही गयी बात आख़िरी सत्य मानी जाती थी.
धीरे धीरे शुरू हुई सोशल मीडिया क्रांती, जिसमे सभी लोगों ने अपने ज्ञान का भरपूर इस्तेमाल करते हुए दबाकर एक के चार तारीफों के पुल बाँधने शुरू किये . 2013 में गुजरात सोशल मीडिया के अंदर विश्व के सबसे बड़े समृद्ध राज्यों में गिना जाने लगा था. 2014 चुनाव में इस प्रचार का काफी फायदा हुआ और देखते देखते मोदी पीएम बन गए.
अब पीएम साहब तो अपने काम में व्यस्त हो गए लेकिन पीछे रह गए वो लोग जो सोशल मीडिया के सहारे दिन काटा करते थे. विधानसभाओं के नेताओं ने कुछ सोशल मीडिया धुरंधरों को अपने यहाँ नौकरी पर रख लिया और बाकी नौकरी के लिए भटकने लगे.
 बाजार में फ़ैल रही किसी भी चीज पर सबसे ज्यादा बारीक नजर कोइ रखता है तो वो होता है व्यापारी. यहाँ भी व्यापारियों ने देखा कि फेसबुक ट्विटर में प्रचार करके फायदा तो मिल रहा है,तो उन्होंने भी फेसबुक ट्विटर को प्रचार के माध्यम के रूप में चुनना शुरू किया,मेकडी, केऍफ़सी,बिग बाजार,जैसे छोटे बड़े ब्रांड खुद को सोशल मीडिया में लाने लगे. अपने प्रोडक्ट के प्रचार के लिए इन्हें उपयुक्त जगह मिली . इनके पेज से इनके प्रोडक्ट के बारे में जानकारी प्राप्त करने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई.
समुद्र की इन बड़ी मछलियों की देखा देखी छोटी मछलियाँ भी इस प्रचार में अपना हाथ आजमाने के लिए आगे आना चाहती थी.
लेकिन उस समय की डिजिटल मीडिया मार्केटिंग में बड़े महंगे टाईप के लोग काम करते थे.मने बड़े ब्रांड बड़ा पैसा वगेरह वगेरह. इन छोटे व्यापारियों को घेरने की सफल कोशिश की सोशल मीडिया मार्केटर्स ने, इन्होने बड़ी ख़ूबसूरती से मार्केट के बदलते ट्रेंड्स को पहचाना और इन ब्रांड्स को कम बजट वाले प्रचार की फेसिलिटी उपलब्ध कराई.
मांग आपूर्ती का नियम आपने अगर पढ़ा हो तो आपको पता होगा कि बाजार कैसे अपनी जरूरतें पूरी कर लेता है, यहाँ लाख रूपये का जूता बाजार में है तो सौ रूपये का जूता भी आपको मिल ही जाएगा. ठीक वैसा ही सोशल मीडिया मार्केटिंग के अंदर भी हुआ.एथिकली काम करने वाले सोशल मीडिया मार्केटर्स के बीच वो लोग भी घुस गए जो रोजाना सिर्फ फेसबुक पर बैठने का काम किया करते थे जिनका सोशल मीडिया मार्केटिंग से कोइ लेना देना नहीं था.
ये अलग ब्रांड पकड कर उनका पेज बनाया करते थे और उन्हें सौ दौ सौ हजार दो हजार लाईक्स पेज पर दिखा कर उनसे थोड़े बहुत पैसे ले लिया करते थे.
मार्केट में बड़ते मोदी के नाम को देखते हुए इन्होने बड़ी चालाकी से एक खेल खेलना शुरू किया, मोदी के नाम से उसके फेन पेज बनाये जाने लगे, हर छोटी बड़ी घटना पर अपडेट दिया जाने लगा और मोदी नाम से पेज पर लाईक बटोरा जाने लगा.
आप सोचेंगे कि इससे क्या होता है,लाईक हैं पेज पर तो क्या फर्क पड़ा. दरअसल पेज पर पहले मोदी नाम से लाईक्स खींचे जाने लगे. ये सभी औथेन्टिक लाईक्स होते थे, फेन पेज पर लोग मोदी नाम देखते ही लगातार क्लिक बटन दबा देते थे, दो चार दस कंट्रोवर्सियल पोस्ट कर दी तो लाईक्स बादल फाड़ कर आने लगे.
आखिर में ये लोग चुपके से उस फेन पेज का नाम बदलकर उस ब्रांड के नाम पर कर देते थे जिससे पेज बनाने के पैसे लिए हैं. लाईक्स बटोरे गए मोदी नाम से और क्लाईंट को मोदी लाईक्स दिए गए उसके ब्रांड के नाम से.
एक सीधा उदाहरण देखिये, गोपी(सोशल मीडिया मर्केटर) ने अग्रवाल मेरिज हाल से लाख रूपये लिए उसकी सोशल मीडिया मार्केटिंग के नाम पर. उसने पेज बनाया नमो सेना या मोदी लव ,जिसके नीचे टेग लाइन दी कि ‘मोदी से प्यार करने वाले ही पेज को लाईक करें.’ फेसबुक यूज कर रहे लोगों ने दनादन पेज लाईक करना शुरू किया. फिर उसने दो चार हेट पोस्ट डाली या समय के मुताबकि मोदी लव के पोस्ट डाल दी, पेज को एक से दो दो से तीन तीन से तीस शेयर मिलने लगे और ये सब बड़ता चला गया. जैसे ही पेज एक लाख लाईक्स के करीब पंहुचा उसने तुरंत पेज का नाम बदलकर रख दिया अग्रवाल मेरिज हाल, और कंटेंट को या तो डिलीट कर दिया या एडिट, उसके बदले अग्रवाल मेरिज हाल की फोटोज ,उससे रिलेटेड कंटेंट डालना शूरू. एक लाख लाईक्स वाला मोदी लव पेज बन गया अग्रवाल मेरिज हाल का आफिशियल पेज. लाख रूपये का मुनाफ़ा.
मार्केट ने सिर्फ मोदी को ही नहीं इसी तरह रवीश कुमार, जी न्यूज,सुधीर चौधरी सब को घेरा और सबके नाम से जबर्दस्त फेन पेज बनाना शुरू किया.
आज हम कहते हैं कि बीजेपी की सोशल मीडिया सेल कर रही है, बिलकुल वो कर ही रही है लेकिन उनकी संख्या मुट्ठी भर है असल काम ये सोशल मीडिया मार्केटर्स कर रहे हैं. सोशल मीडिया को कैसे भुनाया जाता है ये इनसे बेहतर कोइ नहीं जानता.

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