गंभीर अड्डा

मॉब लिंचिंग- अफ़वाहों पर जान से मार देने वाली अंध भीड़

जुलाई 24, 2018 ओये बांगड़ू

राइटर-आदित्य सिंह (मीडिया स्टूडेंट )

आज संसद में एक बार फिर से विपक्ष ने मॉब लिंचिंग बड़ा मुद्दा बनाया लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर भी राजनीती होते हुए एक दुसरे पर आरोप का सिलसिला शुरू हो गया. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा ‘देश में लिंचिंग की घटनाएं कोई पहली बार नहीं हो  रही . लिंचिंग की  सबसे बड़ी घटना 1984 में हुई थी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री की हत्या के बाद हजारों सिख मारे गए थे.’

बीते चार सालों में कुछ हिंसक हिंदुवादी संगठनों ने गाय के नाम पर पूर्व से लेकर पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक चारों तरफ़ कोहराम मचा रखा है। दिलचस्प बात यह है कि 29 राज्यों में से 18 राज्यों में बीजेपी की सरकार है और 95 % हिंसा बीजेपी शासित राज्यों में ही हुई हैं । धर्म की आड़ में गायों के नाम पर हो रही हिंसा दिल्ली के लुटियनो के चुनावी अखाड़े का अहम हिस्सा हो गया है, जिसकी क़ीमत अख़लाक़ ,अलीमुद्दीन, पहलू खान ,अकबर जैसे और कई लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ीं। इन सब को किसी जंग में शहादत नहीं मिली है, बल्कि धर्म के नाम पर बेहरमी से मार दिया गया.

गोरक्षा के नाम पर सड़कों पर दौड़ते हिंदुवादी सगठनो ने 28 निर्दोषों की हत्या कर दी , जिसमें से 83% एक विशेष समुदाय के लोग मारे गए। इन आँकड़ो को देखकर ऐसा ही लगता है की गाय के नाम पर एक विशेष समुदाय को निशाने पर लिया गया है। इंडियास्पेंड सर्वे के मुताबित 2014 के बाद गायों के नाम पर 93 % हिंसा बढ़ी जिसमें सबसे ज़्यादा हिंसक साल 2017 में 20 हिंसाग्रस्त मामले हुए थे जिसमें जुनैद,पहलू खान, अलीमुद्दीन समेत और लोगों की हत्या हुई ।

प्रधानमंत्री द्वारा गाय के नाम पर मॉब लिंचिंग को लेकर निंदा करने के तुरंत बाद झारखण्ड में एक पशु व्यापारी अलीमुद्दीन हत्या हो जाती है. आश्चर्य तब हुआ जब अलीमुद्दीन के आरोपियों को नेता जयंत सिन्हा मिठाई खिलाते है ।आँकड़ो पर ग़ौर करे तो 70 में से 36 केस में 51 फ़ीसद किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाया गया और जिसमें 154 लोग घायल हुए ।इसमें 54% मामले हिंदुवादी संगठनो के WhatsApp ग्रुप पर फैलाई अफ़वाहों के कारण हुए । इन 4 सालों में  कट्टर और हिंसक संगठनों के पाठशाला अलग अलग नामो से खुले , जो WhatsApp यूनिवर्सिटी से धर्म और जाति के नाम पर हिंसा भड़काने के लिए शिक्षा देने लगे। इन्हीं  WhatsApp यूनिवर्सिटी के बेरोज़गार युवाओं ने माब लिंचिंग के नाम पर कई लोगों के हत्या कर दी।

गाय का नाम सुनते पूर्वी भारत के लोग तुरंत भावुक होने लगते है क्यूँकि बचपन से पढ़ते आ रहे की गाय हमारी माता है। इसी भावुकता ने कितने लोगों की जान ले ली। इसी भावुकता में छिपीं एक सच्चाई है जो आपको गोरक्षा वाले नहीं बताएंगे कि गाय माता बुचड़खानो से कही ज़्यादा गोशाला में मर रही है।गोशाला में ना ही ठीक से कोई व्यवस्था और ना ही ठीक से चारा पानी मिलता है।इन संगठनो को गाय को लेकर इतनी ही चिन्ता है तो गोशाला पर जाकर थोड़ी सेवा कर दे ,शायद कुछ गायों की जान बच जाए। हरियाणा,राजस्थान,छत्तीसगढ़ इन तीनो राज्यों में अभी तक हज़ारों की संख्या में गाये मरी लेकिन इन हिंदुवादी संगठनो के कान पर ज़ू तक नहीं रेंगी। गाय के नाम पर तो हम किसी की जान भी लेने के लिए उतारू हो जाते है,लेकिन क्या हमने ये कभी सोचा कि अधिकतर लोग गाय निजी स्वार्थ के लिए ही पालते है ना की ये गाय माता है । सभी हिन्दू घरों में गाय की पूजा होती ,लेकिन तभी तक ही जबतक वो दूध देती है। 95% फ़ीसदी गाय को लोग 7से 8 वी बार बच्चा देने के बाद उसे नहीं रखते है।अगर गाय का बछड़ा हो तो कुछ दिन बाद बछड़े को ऐसे ही छोड़ देते है या कसाई को बेच देते है । हमारे गाँवों में एक कहावत है(दूधारू गाय के लातो सहल जाला) लेकिन वही गाय दूध देना बंद कर दे तो लोग दरवाज़े पर बूढ़ी गाय रखना अशुभ मानने लगते है। इस हक़ीक़त को भूल से कोई गोरक्षक वाले पढ़े ले तो मेरा पता ले सकते है, अपने इलाक़े की सारे बूढ़ी गाय और बछड़े उनके दरवाज़े पहुँचा देंगे। हमारी एक राय माने तो आप सभी अपने इलाक़ों से बूढ़ी गाय और बछड़ों को इन अखंड गाय रक्षको के यहाँ पहुँचा दे।

पिंक और वाइट में फँसी मासूमों की जान

एक तरफ भारत सरकार पिंक और वाइट क्रांति एक साथ चला रही है ,दूसरी तरफ  गोरक्षक दल सड़कों पर ख़ूनी क्रान्ति खेल रहे है । हाल ही के एक सर्वे में बीफ़ एक्सपोर्ट् में भारत विश्व में दूसरे पायदान पर है। 2016 तक 10.56 मिलियन बीफ़ एक्सपोर्ट् हुआ, 2026 तक 12.43 मिलियन एक्सपोर्ट् करने का लक्ष्य है। अधिकतर बड़ी बीफ़ एक्सपोर्ट् कम्पनी के मालिक हिन्दू है ,ये कोई जे॰एन॰यू॰ वाले नहीं है। अल कबीर एक्सपोर्ट्(सतीश और अतुल सभरवाल),अरेबियन एक्सपोर्ट्(सुनील करन )एमकेआर फ़ूड्स  फ्रोजन(मदन एबट),पीएमएल इंडस्ट्रीज (एमएस बिंद्रा)  इन सब का कहना है की धर्म और व्यवसाय दोनों अलग अलग है. वही बीफ़ एक्सपोर्ट् पर मोदी सरकार ने 13000 करोड़ रेवेन्यू वसूले और साथ में  बूचड़खान मालिकों को 15 करोड़ की सब्सिडी भी दी। अभी फ़िलहाल में 3600 बूचड़खाने नगरपालिका के पास में है और 34 बूचड़खाने भारत सरकार के ‘आल इंडिया मीट एंड लाइवस्टॉक एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन’ के पास है जो बस निर्यात करती है।मोदी जी जब गुजरात में चीफ़ मिनिस्टर थे तब सबसे ज़्यादा बीफ़ निर्यात 22000 टन था। बीफ़ के नाम पर हत्या करने वालो को पता होना चाहिए की बीफ़ में भैसा माँस आता है,जिसका निर्यातक ख़ुद भारत सरकार भी है और इसमें गाय का माँस नहीं होता है |

सुप्रीम कोर्ट ने देश के अलग अलग जगहों पर कभी गाय के नाम पर तो कभी बच्चा चोरी को लेकर हो रहे हिंसक घटनाओं पर राज्यों को क़ानून  बनाने का निर्देश जारी किया । मानसून सत्र के अविश्वास प्रस्ताव के दिन विपक्ष के तरफ़ से मॉब लिंचिंग के मुदे को संसद में उठाया गया वही सरकार के तरफ़ से गृहमंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनो लोगों ने इस घटना पर चिंता ज़ाहिर की और ऐसी घटना ना हो इसके लिए राज्य सरकार इस पर क़ानून लाये। मॉब लिंचिंग पर प्रधानमंत्री के बोलने के 24 घण्टे के अंदर अलवर में फिर से मॉब लिंचिंग की घटना हो जाना बहुत ही चिंताजनक बात है । ऐसी घटनाओं पर करवाई करने के बजाए बीजेपी के मंत्री अजीब तर्क दे रहे है, कि मॉब लिंचिंग मोदी जी के बढ़ते लोकप्रियता के कारण हो रहा है, ऐसी घटनाए और भी बढ़ सकती है । जहाँ आर्टिकल 21 में सबक़ों जीने का अधिकार मिला है,और नागरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य और केंद्र दोनों की है। वहीं  इस बयान से ऐसा ही लगता है की हम सब हिट्लर और नेपोलियन के दौर में जी रहे है जहाँ इनकी लोकप्रियता बढ़ने के बाद लोगों पर ज़ुल्म ढाहा गया था। इस देश के फ़िज़ाओं में घुलते मज़हबी ज़हरवाद से जितनी जल्दी अपने वतन को बचा ले उतना अच्छा  नहीं तो पूरा मुल्क ज़हरीला  गैसचेम्बर बन जाएगा

सरकार ने 4 लोगों की  समिति बनाने का फैसला किया है जो मॉब लिंचिंग  को रोकने के लिए कानून बनाने सम्बन्धी सलाह देगी.  अब देखना यह है की  मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक़ पर जिस तरीक़े से बीजेपी सरकार लोकसभा में बिल पारित किया, क्या उसी तरीक़े से बढ़ते मॉब लिंचिंग पर केन्द्र सरकार एंटी मॉब लिंचिंग बिल लाएगी ?

1 thought on “मॉब लिंचिंग- अफ़वाहों पर जान से मार देने वाली अंध भीड़”

  1. मानसिकता की गुलामी
    सरकार मॉब लिंचिंग पर है निराकार
    तभी भीड़तन्त्र कर रही है अपने सपने साकार
    पुलिस अगर वास्तविक कर्तव्य निभाती
    रकबर को भी सही सलामत घर पहुँचाती
    गाय अगर भारतीय समाज में है पूज्यनीय
    फिर इन्सानियत बचाना क्या यहा है निन्दनीय
    अधिकार और कर्तव्यों में फैला है गहरा भेद
    तभी इन्सानियत के दुश्मन समाज में कर रहे रोज नये छेद ,
    विपक्ष भी आग लगाकर सुलझा रहा है अपने मतभेद
    जिसके सहारे फिर लालकिला लेगें भेद,
    सभ्य समाज ने आज सभ्यता है खोई
    इसी से चल रही है राजनेताओं की रसोई ,
    गाय बचाने का प्रण लिये बैठा हर कोई
    फिर भी क्यू गलियों – गलियों गाय घुमती है खोई – खोई,
    वास्तविकता से परे रहकर समाज ने है सुध बुद्व खोई
    सरकार व विपक्ष यही चाहते है कि जनता रहे हमेशा यू ही सोई,
    जिस दिन समाज ने प्रबुद्धता इच्छा संजोई
    उसी दिन से ” मॉब लिंचिंग ” के पक्ष में रहेगा न कोई !

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